दूरसंचार विभाग ने दो वर्षों में 5 करोड़ से अधिक फर्जी मोबाइल कनेक्शन किए बंद
भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने जुलाई 2026 तक के दो वर्षों में 5 करोड़ से अधिक फर्जी मोबाइल कनेक्शनों को निष्क्रिय कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यह कार्रवाई साइबर अपराधों पर नियंत्रण, मोबाइल उपभोक्ताओं की सुरक्षा, खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन की बरामदगी तथा मोबाइल ग्राहकों के सत्यापन को मजबूत बनाने के व्यापक अभियान का हिस्सा है। सरकार का उद्देश्य फर्जी सिम कार्ड और गलत पहचान के आधार पर लिए गए मोबाइल कनेक्शनों पर रोक लगाकर डिजिटल सुरक्षा को और मजबूत बनाना है।
दूरसंचार विभाग की भूमिका
दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications-DoT) संचार मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाला केंद्रीय सरकारी विभाग है। यह देश में दूरसंचार सेवाओं के नियमन, मोबाइल उपभोक्ताओं के सत्यापन, सिम कार्ड जारी करने की प्रक्रिया तथा दूरसंचार सुरक्षा से जुड़े नियमों का संचालन करता है। विभाग समय-समय पर मोबाइल नेटवर्क की सुरक्षा और साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए नई व्यवस्थाएं लागू करता है।
फर्जी मोबाइल कनेक्शन और सिम सत्यापन
फर्जी मोबाइल कनेक्शन वे सिम कार्ड होते हैं, जो नकली, अधूरे या किसी अन्य व्यक्ति के पहचान दस्तावेजों का दुरुपयोग करके प्राप्त किए जाते हैं। ऐसे सिम कार्ड अक्सर साइबर धोखाधड़ी, वित्तीय अपराध और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में उपयोग किए जाते हैं। अगस्त 2025 में सरकार ने लगभग 40 लाख सिम कार्ड ब्लैकलिस्ट किए, 68 लाख मोबाइल नंबरों को पुनः सत्यापन के लिए चिह्नित किया तथा फर्जी पंजीकरण कराने वाले 52,000 पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) एजेंटों को भी ब्लैकलिस्ट किया। इन कदमों से मोबाइल कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया गया है।
साइबर धोखाधड़ी रोकने के लिए नई व्यवस्था
दूरसंचार विभाग ने फाइनेंशियल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर का उपयोग करके ऐसे मोबाइल नंबरों की पहचान की, जिनका संबंध संदिग्ध वित्तीय धोखाधड़ी से था। इस प्रणाली की सहायता से दूरसंचार आधारित साइबर अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई की गई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन प्रयासों से ₹1,800 करोड़ से अधिक की साइबर धोखाधड़ी को रोका गया तथा 12 लाख से अधिक खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद किए गए। इसके अलावा, वर्ष 2025-26 के दौरान आंध्र प्रदेश लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्र (एलएसए) इकाई ने 11 अवैध दूरसंचार एवं साइबर अपराध केंद्रों का भंडाफोड़ किया और लगभग 2.04 लाख खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद किए। जुलाई 2026 में हैदराबाद में दूरसंचार विभाग की पहली नेटवर्क सुरक्षा प्रयोगशाला भी स्थापित की गई, जो दूरसंचार सुरक्षा और साइबर अपराध रोकथाम से जुड़े अनुसंधान को बढ़ावा देगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- दूरसंचार विभाग (DoT) संचार मंत्रालय के अधीन कार्य करता है और भारत में दूरसंचार सेवाओं का नियमन करता है।
- फाइनेंशियल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर संदिग्ध वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े मोबाइल नंबरों की पहचान करने के लिए उपयोग किया जाता है।
- पॉइंट ऑफ सेल (POS) एजेंट ग्राहक सत्यापन के बाद अधिकृत रूप से सिम कार्ड जारी करने का कार्य करते हैं।
- भारत की दूरसंचार सुरक्षा व्यवस्था में सिम सत्यापन, ब्लैकलिस्टिंग, पुनः सत्यापन और मोबाइल ट्रैकिंग जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
फर्जी मोबाइल कनेक्शनों के खिलाफ दूरसंचार विभाग की यह व्यापक कार्रवाई देश की डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने, वित्तीय धोखाधड़ी रोकने और मोबाइल उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।:::