सुप्रीम कोर्ट से मिली मंजूरी, लखनऊ में बनेगा भारत का पहला शहरी नाइट सफारी

सुप्रीम कोर्ट से मिली मंजूरी, लखनऊ में बनेगा भारत का पहला शहरी नाइट सफारी

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 16 जुलाई 2026 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रस्तावित कुकरेल नाइट सफारी एवं डे जू परियोजना को अंतिम मंजूरी प्रदान कर दी। इस स्वीकृति के साथ भारत में पहली बार एक शहरी नाइट सफारी विकसित करने का रास्ता साफ हो गया है। यह परियोजना पूरी होने के बाद दुनिया की पांचवीं नाइट सफारी होगी। इससे पहले सिंगापुर, थाईलैंड, चीन और इंडोनेशिया में इस प्रकार की सुविधाएं स्थापित की जा चुकी हैं। यह परियोजना वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा, अनुसंधान और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

कुकरेल रिजर्व वन में विकसित होगी परियोजना

यह परियोजना लखनऊ जिले के 2,027 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील कुकरेल रिजर्व वन में विकसित की जाएगी। नाइट सफारी और डे जू परिसर के लिए लगभग 855 एकड़ भूमि निर्धारित की गई है। परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 1,510 करोड़ रुपये है। सुप्रीम कोर्ट की अंतिम मंजूरी से पहले इस परियोजना को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (Central Zoo Authority), पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा केंद्रीय सशक्त समिति (Central Empowered Committee) से आवश्यक अनुमोदन और सशर्त स्वीकृतियां प्राप्त हो चुकी थीं।

परियोजना की प्रमुख विशेषताएं

परियोजना के प्रथम चरण में 38 वन्यजीव बाड़ों (एनक्लोजर) का निर्माण किया जाएगा। इनमें एशियाई शेर, बंगाल टाइगर, तेंदुआ, लकड़बग्घा, उड़न गिलहरी और घड़ियाल सहित कई प्रमुख वन्यजीवों को प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप रखा जाएगा। नाइट सफारी को आधुनिक और प्रकृति-अनुकूल स्वरूप देने के लिए थीम आधारित क्षेत्र, प्राकृतिक आवास, रात्रिकालीन ट्रेल, तथा वन पथ विकसित किए जाएंगे। पर्यटकों की आवाजाही के लिए बैटरी चालित वाहनों का उपयोग किया जाएगा ताकि ध्वनि और प्रदूषण को न्यूनतम रखा जा सके। इसके अलावा प्रकाश व्यवस्था इस प्रकार तैयार की जाएगी कि वह चांदनी जैसी प्राकृतिक रोशनी का अनुभव कराए और वन्यजीवों के व्यवहार पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।

पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता

परियोजना की समीक्षा के दौरान सर्वोच्च न्यायालय और केंद्रीय सशक्त समिति ने कुछ महत्वपूर्ण बदलाव भी किए। 104 वर्ष पुराने नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान को कुकरेल स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया गया। इसके अलावा जंगल के भीतर सड़क चौड़ीकरण को केवल दो लेन तक सीमित रखा गया है। पहले प्रस्तावित एडवेंचर जोन, जिसमें ट्राम सेवा, रात्रिकालीन वन अनुभव और ऑगमेंटेड रियलिटी थिएटर शामिल थे, उसे भी परियोजना से हटा दिया गया है ताकि वन क्षेत्र पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद पहले चरण का निर्माण लगभग 24 महीनों में पूरा होने की संभावना है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत का पहला शहरी नाइट सफारी परियोजना उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित कुकरेल रिजर्व वन में विकसित की जाएगी।
  • सिंगापुर, थाईलैंड, चीन और इंडोनेशिया में पहले से नाइट सफारी सुविधाएं मौजूद हैं।
  • केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (Central Zoo Authority) भारत में चिड़ियाघरों के नियमन के लिए जिम्मेदार वैधानिक संस्था है।
  • सफारी परियोजनाओं में बैटरी चालित वाहनों का उपयोग ध्वनि और वायु प्रदूषण कम करने के लिए किया जाता है।

कुकरेल नाइट सफारी परियोजना भारत में वन्यजीव संरक्षण और सतत पर्यटन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है। पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हुए आधुनिक पर्यटन सुविधाएं विकसित करने का यह प्रयास देश में इको-टूरिज्म को नई दिशा देगा। साथ ही, यह परियोजना वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उत्तर प्रदेश को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

Originally written on July 18, 2026 and last modified on July 21, 2026.

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