बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने जारी किए सोशल मीडिया आचरण नियम, वकीलों और विधि छात्रों के लिए नई गाइडलाइन

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने जारी किए सोशल मीडिया आचरण नियम, वकीलों और विधि छात्रों के लिए नई गाइडलाइन

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने 17 जुलाई 2026 को वकीलों, विधि छात्रों (लॉ स्टूडेंट्स) और इंटर्न के लिए सोशल मीडिया के उपयोग से संबंधित नई आचार संहिता जारी की। इस परिपत्र का उद्देश्य डिजिटल माध्यमों पर पेशेवर आचरण, न्यायालय की गरिमा, गोपनीयता और नैतिक मानकों को बनाए रखना है। यह दिशा-निर्देश सभी राज्य बार काउंसिलों तथा कानूनी शिक्षा केंद्रों (Centres of Legal Education) पर लागू होंगे। नई व्यवस्था के माध्यम से न्यायिक संस्थानों की गरिमा और अधिवक्ता पेशे की विश्वसनीयता को बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया है।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया की भूमिका

बार काउंसिल ऑफ इंडिया एक वैधानिक संस्था है, जिसका गठन अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (Advocates Act, 1961) के तहत किया गया था। यह संस्था भारत में कानूनी शिक्षा के मानकों का निर्धारण करती है तथा अधिवक्ताओं के लिए पेशेवर आचरण और नैतिकता से जुड़े नियम बनाती है। इसके अतिरिक्त, राज्य बार काउंसिलों के माध्यम से अधिवक्ताओं के पंजीकरण और अनुशासनात्मक मामलों की निगरानी भी की जाती है।

न्यायालय परिसर में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध

नई गाइडलाइन के अनुसार न्यायालय परिसर, कोर्ट रूम, गलियारों, बार रूम, अधिवक्ताओं के चैंबर और न्यायिक भवनों के भीतर रील, वीडियो, फोटोग्राफ या प्रचारात्मक सामग्री बनाना और साझा करना प्रतिबंधित रहेगा। इसके अलावा, किसी भी भौतिक, वर्चुअल या हाइब्रिड न्यायिक कार्यवाही की रिकॉर्डिंग सामान्यतः निषिद्ध होगी। केवल तभी रिकॉर्डिंग की अनुमति होगी जब संबंधित न्यायालय के नियम इसकी अनुमति दें या न्यायालय अथवा रजिस्ट्रार जनरल से लिखित स्वीकृति प्राप्त हो।

पेशेवर वेशभूषा और प्रचार पर रोक

बार काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि अधिवक्ता अपने बैंड, गाउन या रोब का उपयोग व्यक्तिगत प्रचार, सोशल मीडिया पोस्ट या विज्ञापन के उद्देश्य से नहीं कर सकते। इन वेशभूषाओं का उपयोग केवल उन औपचारिक अवसरों पर किया जा सकेगा, जिन्हें बार काउंसिल के नियमों के तहत अनुमति प्राप्त है। इस कदम का उद्देश्य अधिवक्ता की पेशेवर पहचान को व्यावसायिक प्रचार का माध्यम बनने से रोकना और न्यायिक गरिमा को बनाए रखना है।

विधि छात्रों और नए अधिवक्ताओं के लिए विशेष निर्देश

नई व्यवस्था के तहत नामांकन के इच्छुक नए अधिवक्ताओं को एक अनुपालन शपथपत्र (Compliance Affidavit) या स्वीकृति पत्र जमा करना होगा। वहीं, कानून के छात्र और इंटर्न “डे इन कोर्ट” व्लॉग, “डे इन ए चैंबर” रील या “इंटर्नशिप रिवील” जैसे वीडियो साझा नहीं कर सकेंगे, यदि उनमें न्यायालय भवन, न्यायालय का नाम, साइनबोर्ड या परिसर का उपयोग प्रचारात्मक पृष्ठभूमि के रूप में किया गया हो।

डिजिटल नैतिकता और अनुशासनात्मक कार्रवाई

बार काउंसिल ने भ्रामक कानूनी जानकारी, फर्जी न्यायिक निर्णय, गुमनाम कानूनी राय, कृत्रिम न्यायालय अनुभवों की झूठी कहानियां तथा एआई-जनित सामग्री और डीपफेक के दुरुपयोग पर भी रोक लगाई है। यदि कोई अधिवक्ता, छात्र या इंटर्न इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई, संबंधित राज्य बार काउंसिल को संदर्भित किए जाने या न्यायालय की गरिमा को ठेस पहुंचाने की स्थिति में अवमानना (Contempt of Court) की कार्यवाही भी की जा सकती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • अधिवक्ता अधिनियम, 1961 भारत में विधि व्यवसाय को नियंत्रित करने वाला प्रमुख कानून है।
  • बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) अधिवक्ताओं के पेशेवर आचरण, नैतिकता और कानूनी शिक्षा के मानकों का नियमन करती है।
  • राज्य बार काउंसिलें अधिवक्ताओं के पंजीकरण और अनुशासनात्मक मामलों की जिम्मेदारी निभाती हैं।
  • भारत के न्यायालय अपने-अपने नियमों और आदेशों के माध्यम से न्यायिक कार्यवाही की रिकॉर्डिंग और प्रकाशन को नियंत्रित कर सकते हैं।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया की नई सोशल मीडिया आचार संहिता डिजिटल युग में कानूनी पेशे की गरिमा और विश्वसनीयता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इन नियमों से न्यायालयों की गोपनीयता, पेशेवर नैतिकता और न्यायिक संस्थाओं के प्रति सम्मान को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

Originally written on July 18, 2026 and last modified on July 21, 2026.

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