मेक इन इंडिया के 12 साल: विनिर्माण, निवेश और निर्यात में बड़ा बदलाव

मेक इन इंडिया के 12 साल: विनिर्माण, निवेश और निर्यात में बड़ा बदलाव

भारत ने 25 सितंबर 2026 को मेक इन इंडिया पहल के 12 वर्ष पूरे किए। 2014 में शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य देश में विनिर्माण को बढ़ावा देना, निवेश आकर्षित करना, निर्यात बढ़ाना और उद्योगों की प्रतिस्पर्धा क्षमता मजबूत करना था। समय के साथ यह पहल केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रही, बल्कि सेवाओं, निवेश और घरेलू मूल्य संवर्धन से जुड़ी व्यापक औद्योगिक नीति का हिस्सा बन गई।

27 क्षेत्रों को कवर करने वाली औद्योगिक पहल

मेक इन इंडिया एक राष्ट्रीय पहल है, जो विनिर्माण, सेवाओं और निवेश संवर्धन से जुड़ी है। इसके दायरे में कुल 27 क्षेत्र आते हैं, जिनमें 15 विनिर्माण क्षेत्र और 12 सेवा क्षेत्र शामिल हैं। इसका मकसद ऐसे उद्योगों को बढ़ावा देना है, जिनमें भारत में उत्पादन बढ़े, आयात पर निर्भरता घटे और वैश्विक बाजारों तक पहुंच मजबूत हो।

एफडीआई और उत्पादन में तेज़ी

इस पहल के दौरान भारत में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश यानी एफडीआई में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2025-26 में देश में अब तक का सबसे अधिक वार्षिक एफडीआई प्रवाह 94.53 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। वहीं, वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच कुल एफडीआई 843 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया।

उत्पादन के मोर्चे पर इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में बड़ा विस्तार हुआ। वित्त वर्ष 2014-15 में जहां इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर अनुमानित 13.11 लाख करोड़ रुपये हो गया। मोबाइल फोन निर्माण भी 18,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 6.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसी अवधि में भारत मात्रा के आधार पर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन गया।

पीएलआई, रक्षा और फार्मा में असर

उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन व्यवस्था यानी प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजनाओं ने भी इस औद्योगिक बदलाव को गति दी। 31 मार्च 2026 तक पीएलआई योजनाओं के तहत 2.40 लाख करोड़ रुपये का वास्तविक निवेश, 23.8 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन और बिक्री, 15.2 लाख करोड़ रुपये का निर्यात तथा 14.6 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार दर्ज किए गए। जून 2026 तक पीएलआई से जुड़े निवेश 2.58 लाख करोड़ रुपये, उत्पादन और बिक्री 23.79 लाख करोड़ रुपये तथा निर्यात 15.53 लाख करोड़ रुपये तक बताए गए।

रक्षा उत्पादन में भी आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रगति हुई। स्वदेशी रक्षा उत्पादन 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। फार्मा क्षेत्र में भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति और मजबूत की है। 2024-25 में भारतीय दवा उद्योग उत्पादन की मात्रा के आधार पर दुनिया में तीसरे और मूल्य के आधार पर 11वें स्थान पर रहा, जबकि इसका वार्षिक टर्नओवर 4,71,898 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • मेक इन इंडिया की शुरुआत 25 सितंबर 2014 को हुई थी।
  • यह पहल 27 क्षेत्रों को कवर करती है, जिनमें 15 विनिर्माण और 12 सेवा क्षेत्र शामिल हैं।
  • एफडीआई का अर्थ Foreign Direct Investment है, जिसे हिंदी में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश कहा जाता है।
  • PLI का पूरा नाम Production Linked Incentive है, जो उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना है।

मेक इन इंडिया के 12 वर्षों का यह सफर बताता है कि भारत अब केवल उपभोग आधारित अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि उत्पादन, निवेश और निर्यात के बड़े केंद्र के रूप में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है।

Originally written on September 25, 2026 and last modified on September 25, 2026.

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