SEBI की नई पहल से PMS नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी

SEBI की नई पहल से PMS नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज यानी PMS के नियमों की व्यापक समीक्षा के लिए 23 जुलाई 2026 को एक परामर्श पत्र जारी किया है। इस प्रस्ताव में PMS, म्यूचुअल फंड योजनाओं, एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETF), स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स (SIF) और पोर्टफोलियो मैनेजरों की निवेश सीमा से जुड़े कई बदलाव शामिल हैं। इसका उद्देश्य निवेशकों के लिए ढांचे को अधिक व्यावहारिक, लचीला और बाजार की मौजूदा जरूरतों के अनुरूप बनाना है।

PMS ढांचे में क्या है बदलाव की दिशा

पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज उन निवेशकों के लिए पेशेवर सेवाएं हैं, जिनके पास अपेक्षाकृत अधिक निवेश योग्य धन होता है। भारत में यह सेवा SEBI (Portfolio Managers) Regulations, 2020 के तहत नियंत्रित होती है। अभी PMS के तहत पोर्टफोलियो मैनेजर ग्राहक की जरूरत के अनुसार डिस्क्रेशनरी, नॉन-डिस्क्रेशनरी या एडवाइजरी सेवाएं दे सकते हैं।SEBI के नए प्रस्तावों में एक अलग म्यूचुअल फंड-ओनली PMS ढांचा बनाने की बात है। इसके तहत पोर्टफोलियो मैनेजर केवल म्यूचुअल फंड योजनाओं के डायरेक्ट प्लान, ETF और SIF के जरिए ही ग्राहक की राशि का प्रबंधन कर सकेंगे। यह कदम ऐसे निवेशकों के लिए उपयोगी माना जा रहा है जो पेशेवर प्रबंधन चाहते हैं, लेकिन अपेक्षाकृत सरल और पारदर्शी उत्पादों में निवेश करना पसंद करते हैं।

निवेश सीमा और पात्रता में प्रस्तावित राहत

परामर्श पत्र में इस श्रेणी के लिए न्यूनतम ग्राहक निवेश सीमा को 50 लाख रुपये से घटाकर 25 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है। साथ ही, आवेदन करने वाले पोर्टफोलियो मैनेजरों के लिए न्यूनतम नेटवर्थ की शर्त 5 करोड़ रुपये से घटाकर 2 करोड़ रुपये करने की बात कही गई है।इन बदलावों का असर PMS बाजार में भागीदारी बढ़ाने पर पड़ सकता है। निवेशकों के लिए प्रवेश सीमा कम होने से यह सेवा पहले की तुलना में अधिक लोगों तक पहुंच सकती है, जबकि सेवा प्रदाताओं के लिए पूंजीगत शर्तों में राहत से नए खिलाड़ियों के लिए अवसर बन सकते हैं।

निवेश दायरे को लेकर SEBI की सोच

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • SEBI का पूरा नाम Securities and Exchange Board of India है, जो भारत के प्रतिभूति बाजार का नियामक है।
  • PMS का नियमन SEBI (Portfolio Managers) Regulations, 2020 के तहत होता है।
  • ETF यानी Exchange-Traded Fund, जो शेयरों की तरह स्टॉक एक्सचेंज पर खरीदे-बेचे जाते हैं।
  • SIF का अर्थ Specialised Investment Funds है, जो भारत के फंड प्रबंधन ढांचे का एक विशेष वर्ग है।

SEBI ने पोर्टफोलियो मैनेजरों को निवेश के अधिक विकल्प देने का भी प्रस्ताव रखा है। इनमें विदेशी सूचीबद्ध इक्विटी और ऋण प्रतिभूतियों में निवेश, साथ ही जल्द सूचीबद्ध होने वाली प्रतिभूतियों में निवेश की अनुमति शामिल है। इसके अलावा, डिस्क्रेशनरी PMS सेवाएं देने वाले पोर्टफोलियो मैनेजरों को ग्राहक के AUM का 10% तक निवेश-ग्रेड अनलिस्टेड डेट सिक्योरिटीज में लगाने की अनुमति देने पर भी विचार किया गया है।यह प्रस्ताव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि PMS उद्योग का आकार तेजी से बढ़ा है। 31 मई 2026 तक PMS का AUM 42.61 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि अप्रैल 2019 में यह 18.07 लाख करोड़ रुपये था। इसी अवधि में पोर्टफोलियो मैनेजरों की संख्या 2020 के 226 से बढ़कर 31 मई 2026 तक 515 हो गई।कुल मिलाकर, यह परामर्श पत्र PMS ढांचे को अधिक व्यापक, प्रतिस्पर्धी और निवेशक-अनुकूल बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अब आगे की दिशा सार्वजनिक टिप्पणियों और अंतिम नियामकीय निर्णय पर निर्भर करेगी।

Originally written on July 25, 2026 and last modified on July 25, 2026.

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