तेलंगाना के नए शहरी शासन बिल पर संवैधानिक बहस तेज
तेलंगाना में शहरी प्रशासन के ढांचे को बदलने वाले CURE बिल को लेकर विवाद बढ़ गया है। सार्वजनिक नीति विशेषज्ञ दोंठी नरसिम्हा रेड्डी ने राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से आग्रह किया है कि वे इस विधेयक को पुनर्विचार के लिए वापस भेजें। उनका कहना है कि बिल में प्रस्तावित शासन संरचना, वार्ड समितियों की भूमिका और अधिकार-क्षेत्र से जुड़े कई प्रावधान स्थानीय स्वशासन की भावना पर असर डाल सकते हैं।
CURE बिल क्या बदलना चाहता है
Core Urban Region (Integrated Governance) Bill, 2026 यानी CURE बिल को 12 सितंबर 2026 को तेलंगाना विधानसभा ने पारित किया था। इसका उद्देश्य ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम अधिनियम, 1955 की जगह एक एकीकृत शासन ढांचा लाना है। यह ढांचा हैदराबाद, साइबराबाद और मलकाजगिरी नगर निगमों वाले कोर अर्बन रीजन के लिए प्रस्तावित है।
बिल के तहत CURE Apex Governance Council बनाने का प्रावधान है, जिसे व्यापक प्रशासनिक शक्तियाँ दी जाएंगी। इसके साथ ही स्थानीय स्वशासन, वार्ड समितियों और संपत्ति कर प्रशासन से जुड़े नियमों को भी नए सिरे से परिभाषित किया गया है।
संपत्ति कर व्यवस्था में बड़ा बदलाव
इस विधेयक का एक अहम पहलू संपत्ति कर से जुड़ा है। अभी तक कई नगर निकायों में वार्षिक किराया मूल्य आधारित प्रणाली का उपयोग होता रहा है, लेकिन CURE बिल में इसे Capital Value System से बदलने का प्रस्ताव है। इस प्रणाली में कर की गणना संपत्ति के सरकारी तौर पर तय बाजार मूल्य के आधार पर होती है।
विधानसभा ने 12 सितंबर 2026 को बिल में संशोधन कर संपत्ति कर में वार्षिक वृद्धि की अधिकतम सीमा 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दी। यह संशोधन करदाताओं पर संभावित बोझ को सीमित करने के लिए किया गया माना जा रहा है।
आपत्ति क्यों उठाई गई
रेड्डी ने राज्यपाल को दिए अपने प्रतिनिधित्व में कहा कि बिल में CURE Apex Governance Council को बहुत अधिक अधिकार दिए गए हैं। उनके अनुसार, वार्ड समितियों की वैधानिक भूमिका GHMC Act, 1955 की तुलना में कमजोर की गई है, जबकि नगर प्रशासन में विकेंद्रीकरण के लिए वार्ड समितियाँ महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
उन्होंने यह भी आपत्ति जताई कि कुछ प्रावधान CURE प्राधिकरणों को कोर अर्बन रीजन की सीमाओं से बाहर जाकर शक्तियाँ प्रयोग करने की अनुमति देते हैं। रेड्डी का कहना है कि ऐसे प्रावधानों पर कानून के पाठ में ही बदलाव की जरूरत है, इसलिए विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटाया जाना चाहिए।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- राज्यपाल किसी गैर-वित्त विधेयक को मंजूरी देने, रोकने, पुनर्विचार के लिए लौटाने या राष्ट्रपति के लिए आरक्षित करने का संवैधानिक विकल्प रखते हैं।
- ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम अधिनियम, 1955, लगभग 70 वर्षों से हैदराबाद के नगर प्रशासन का आधार रहा है।
- Capital Value System में संपत्ति कर की गणना किराये के बजाय संपत्ति के बाजार मूल्य पर होती है।
- वार्ड समितियाँ शहरी स्थानीय शासन में विकेंद्रीकरण और नागरिक भागीदारी का महत्वपूर्ण माध्यम मानी जाती हैं।
अब निगाह इस बात पर है कि राज्यपाल इस विधेयक पर क्या रुख अपनाते हैं। यदि इसे पुनर्विचार के लिए लौटाया जाता है, तो तेलंगाना में शहरी शासन और स्थानीय निकायों की भूमिका पर नई बहस और तेज हो सकती है।