खाद्य तेल महंगाई पर लगाम के लिए आयात शुल्क में राहत पर विचार
भारत सरकार घरेलू बाजार में बढ़ती कीमतों और त्योहारी मांग के बीच खाद्य तेलों पर आयात शुल्क घटाने पर विचार कर रही है। इसका मकसद सितंबर-नवंबर के दौरान बढ़ने वाली महंगाई को कुछ हद तक थामना है, क्योंकि वनस्पति तेल भारतीय भोजन की टोकरी का अहम हिस्सा हैं और देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है।
क्यों अहम है यह फैसला
भारत दुनिया का सबसे बड़ा वनस्पति तेल आयातक है। देश में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख तेलों में पाम ऑयल, सोयाबीन ऑयल और सूरजमुखी तेल शामिल हैं। इनकी कीमतें अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति, ढुलाई लागत और आयात शुल्क में बदलाव से सीधे प्रभावित होती हैं। इसलिए जब वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव आता है, तो उसका असर घरेलू रसोई के बजट पर भी दिखता है।
सितंबर 2026 तक वनस्पति तेलों की कीमतें पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 20% बढ़ चुकी थीं। इसी अवधि में खुदरा महंगाई भी खाद्य पदार्थों की ऊंची कीमतों के कारण तेज हुई। ऐसे में शुल्क में कटौती को महंगाई नियंत्रण के एक तात्कालिक उपाय के रूप में देखा जा रहा है।
सरकारी कदम और मौजूदा शुल्क ढांचा
मई 2025 में सरकार ने कच्चे खाद्य तेलों पर मूल आयात कर आधा करके 10% कर दिया था। इसके बाद कच्चे पाम ऑयल, कच्चे सोया तेल और सूरजमुखी तेल पर प्रभावी कुल आयात शुल्क 16.5% रह गया। यह व्यवस्था आयात को सस्ता बनाने और बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए बनाई गई थी।
सितंबर 2026 में सरकार ने खाद्य तेलों के बेस इंपोर्ट प्राइस में भी 4 से 6 डॉलर प्रति टन की बढ़ोतरी की। कच्चे पाम ऑयल के लिए यह कीमत 1,219 डॉलर प्रति टन और कच्चे सोया तेल के लिए 1,268 डॉलर प्रति टन तय की गई। इस तरह के मूल्य संकेत आयात लागत और घरेलू कीमतों पर असर डालते हैं।
त्योहारी मांग और किसानों पर असर
सितंबर से नवंबर के बीच त्योहारों के कारण तेल की खपत सामान्य से अधिक रहती है। इस दौरान मिठाइयों, नमकीन और तले हुए खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ती है, जिससे खाद्य तेलों की खपत भी तेज हो जाती है। सरकार के सामने चुनौती यह है कि उपभोक्ताओं को राहत दी जाए, लेकिन साथ ही तिलहन और सोयाबीन किसानों के दाम पर दबाव न पड़े।
इसी वजह से उद्योग से जुड़े कुछ अधिकारियों ने 5% की सीमित कटौती की सलाह दी है, ताकि घरेलू सोयाबीन कीमतों को बहुत अधिक नुकसान न पहुंचे। भारत की आयात निर्भरता को देखते हुए यह संतुलन नीति-निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत दुनिया का सबसे बड़ा वनस्पति तेल आयातक है।
- पाम ऑयल, सोयाबीन ऑयल और सूरजमुखी तेल भारत के प्रमुख आयातित खाद्य तेल हैं।
- मलेशिया और इंडोनेशिया भारत को पाम ऑयल के बड़े आपूर्तिकर्ता हैं।
- अर्जेंटीना, रूस और यूक्रेन सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की आपूर्ति में अहम भूमिका निभाते हैं।
कुल मिलाकर, खाद्य तेल आयात शुल्क में संभावित बदलाव केवल व्यापार नीति का मामला नहीं है, बल्कि यह महंगाई, उपभोक्ता खर्च और किसानों की आय से भी सीधे जुड़ा हुआ फैसला है।