प्रोजेक्ट चीता ने भारत में संरक्षण की नई कहानी लिखी
भारत में चीतों की वापसी से जुड़ा प्रोजेक्ट चीता 17 सितंबर 2026 को चार वर्ष पूरा कर चुका है। इस अवधि में देश में चीतों की कुल संख्या 52 तक पहुंच गई है, जिनमें 32 चीते भारत में जन्मे हैं। वर्तमान में ये चीते मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधी सागर अभयारण्य में मौजूद हैं।
चीतों की वापसी और परियोजना की शुरुआत
प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई थी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा था। इसके बाद 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते और 28 फरवरी 2026 को बोत्सवाना से नौ चीते भारत लाए गए। यह भारत का पहला अंतरमहाद्वीपीय बड़े मांसाहारी जीवों का स्थानांतरण कार्यक्रम है।
इस परियोजना का उद्देश्य केवल चीतों को वापस लाना नहीं, बल्कि उनके लिए उपयुक्त आवास तैयार करना और देश में एक दीर्घकालिक, आत्मनिर्भर आबादी विकसित करना भी है।
कूनो और गांधी सागर में मौजूदा स्थिति
16-17 सितंबर 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कूनो राष्ट्रीय उद्यान में 49 चीते हैं, जबकि गांधी सागर अभयारण्य में तीन चीते रखे गए हैं। कूनो में 17 चीते खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं, जिनमें 10 नर और 7 मादा शामिल हैं।
इसके अलावा 32 चीते सॉफ्ट-रिलीज़ बाड़ों में रखे गए हैं। इनमें 5 नर, 8 मादाएं और एक वर्ष से कम उम्र के 19 शावक शामिल हैं। यह चरण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे चीतों को धीरे-धीरे प्राकृतिक वातावरण में ढलने का मौका मिलता है।
प्रजनन, दूसरी पीढ़ी और संरक्षण का महत्व
भारत में जन्मे 32 चीतों में प्रजनन करने वाली मादाओं का स्थापित होना इस परियोजना की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। मार्च 2023 में भारत में जन्मे पहले शावकों में से केवल जीवित बची मादा मुखी ने नवंबर 2025 में पांच शावकों को जन्म दिया। दूसरी पीढ़ी के ये शावक परियोजना के दीर्घकालिक विस्तार की दिशा में अहम माने जा रहे हैं।
चीतों को भारत में 1952 में विलुप्त घोषित किया गया था। इसलिए उनकी वापसी केवल एक वन्यजीव परियोजना नहीं, बल्कि देश में प्रजाति पुनर्स्थापन और आवास प्रबंधन की एक बड़ी पहल भी है। कूनो को पहले रिलीज़ स्थल के रूप में चुना गया था, जबकि गांधी सागर को बाद में इस कार्यक्रम में शामिल किया गया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत में चीता 1952 में विलुप्त घोषित किया गया था।
- प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान से हुई थी।
- यह भारत का पहला अंतरमहाद्वीपीय बड़े मांसाहारी जीवों का स्थानांतरण कार्यक्रम है।
- कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधी सागर अभयारण्य, दोनों मध्य प्रदेश में स्थित हैं।
चार वर्षों में चीतों की संख्या, भारत में जन्मी दूसरी पीढ़ी और दो अलग-अलग स्थलों पर उनकी मौजूदगी यह दिखाती है कि प्रोजेक्ट चीता अब केवल पुनर्वास की नहीं, बल्कि दीर्घकालिक संरक्षण रणनीति की दिशा में आगे बढ़ चुका है।