भारत-यूके व्यापार समझौते से 642 ब्रिटिश कारों के आयात को मंजूरी

भारत-यूके व्यापार समझौते से 642 ब्रिटिश कारों के आयात को मंजूरी

भारत ने ब्रिटेन से 642 कारों के आयात के लिए सात कंपनियों के आवेदन मंजूर किए हैं। यह आवंटन भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) के तहत टैरिफ रेट कोटा (TRQ) व्यवस्था के अनुसार किया गया है, जो 15 जुलाई 2026 से लागू है। इस फैसले को भारत-ब्रिटेन व्यापार संबंधों में एक अहम शुरुआती कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे तय कोटे के भीतर आयातित कारों पर शुल्क में बड़ी राहत मिलेगी।

समझौते के तहत शुल्क में बड़ी राहत

भारत-यूके CETA के तहत ब्रिटेन से आने वाली ऑटोमोबाइल आयात पर टैरिफ लगभग 110% से घटकर कोटे के भीतर 10% तक आ सकता है। यह राहत केवल निर्धारित सीमा के भीतर लागू होगी, जबकि कोटे से अधिक आयात पर सामान्य या ऊंची शुल्क दरें लागू रहेंगी। इसी वजह से TRQ व्यवस्था व्यापार नीति में एक संतुलित उपकरण मानी जाती है, जिसमें सीमित मात्रा में आयात को रियायती शुल्क पर अनुमति दी जाती है।

भारत ने इस समझौते के तहत पहले 15 वर्षों में ब्रिटेन से 3,78,000 पारंपरिक इंजन वाली यात्री कारों को रियायती सीमा शुल्क पर आयात की अनुमति देने का वादा किया है। इससे दोनों देशों के बीच ऑटो सेक्टर में व्यापार के नए अवसर खुलने की संभावना है।

कौन कर सकता है आवेदन और कैसे हुआ आवंटन

इस कोटे के लिए केवल वे Original Equipment Manufacturers (OEMs), डीलर और चैनल पार्टनर आवेदन कर सकते थे, जिन्हें ब्रिटेन-उत्पत्ति वाले वाहन निर्माताओं की ओर से अधिकृत किया गया हो। DGFT ने जुलाई 2026 में लगभग 5,000 वाहनों के वार्षिक कोटे के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे।

कुल आठ कंपनियों ने आवेदन किया, जिनमें से सात को मंजूरी मिली और एक को कमी प्रमाणपत्र जारी किया गया। यह 2026 कोटे के तहत पहली आवंटन प्रक्रिया है। DGFT भारत में आयात-निर्यात नीति के प्रशासन की प्रमुख संस्था है, इसलिए इस तरह के फैसलों में उसकी भूमिका केंद्रीय रहती है।

ऑटो व्यापार और नीति के लिहाज से इसका महत्व

यह निर्णय केवल कार आयात तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत-यूके व्यापार समझौते के व्यावहारिक क्रियान्वयन की शुरुआत भी दिखाता है। ऑटोमोबाइल क्षेत्र द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं में हमेशा संवेदनशील और महत्वपूर्ण रहा है, क्योंकि इसमें शुल्क, बाजार पहुंच और घरेलू उद्योग के हितों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।

TRQ जैसी व्यवस्था से सरकार सीमित आयात को नियंत्रित ढंग से अनुमति देती है, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ती है, लेकिन घरेलू शुल्क ढांचे पर अचानक दबाव नहीं पड़ता। आने वाले समय में इस कोटे के उपयोग और आगे के आवंटनों पर भी उद्योग की नजर रहेगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • DGFT का पूरा नाम Directorate General of Foreign Trade है और यह भारत की आयात-निर्यात नीति लागू करने वाली प्रमुख संस्था है।
  • TRQ का अर्थ Tariff Rate Quota है, जिसमें तय मात्रा तक आयात पर कम शुल्क और उससे अधिक पर ऊंचा शुल्क लगता है।
  • CETA का पूरा नाम India-UK Comprehensive Economic and Trade Agreement है।
  • OEMs वे कंपनियां होती हैं जो मूल ब्रांड विनिर्देश के अनुसार वाहन या उनके पुर्जे बनाती हैं।

भारत-यूके CETA के तहत यह पहली बड़ी आवंटन प्रक्रिया है, इसलिए इसे दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में एक महत्वपूर्ण शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

Originally written on September 17, 2026 and last modified on September 17, 2026.

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