भारत-न्यूजीलैंड व्यापार समझौते से बढ़ेगा द्विपक्षीय कारोबार
न्यूजीलैंड की संसद ने भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते को लागू करने के लिए विधेयक पारित कर दिया है। 93 मतों के समर्थन और 29 मतों के विरोध से पारित यह कदम दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों को नई गति देने वाला माना जा रहा है। अब यह समझौता दोनों देशों की औपचारिक मंजूरी यानी रैटिफिकेशन के बाद लागू होगा।
समझौते की पृष्ठभूमि और दायरा
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते पर 27 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में हस्ताक्षर हुए थे। इसकी बातचीत मार्च 2025 में शुरू हुई और दिसंबर 2025 में पूरी हुई। यह समझौता केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवाओं, सीमा प्रक्रियाओं और बाजार पहुंच से जुड़े प्रावधानों को भी शामिल करता है।
मुक्त व्यापार समझौते आम तौर पर दो देशों के बीच शुल्क और अन्य व्यापारिक बाधाओं को कम या समाप्त करते हैं। इसी वजह से ऐसे समझौते निर्यातकों, निवेशकों और सेवा क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों के लिए अहम माने जाते हैं।
शुल्क में कटौती और बाजार पहुंच
समझौते के तहत भारत को निर्यात होने वाले न्यूजीलैंड के लगभग 95 प्रतिशत उत्पादों पर शुल्क या तो समाप्त किया जाएगा या कम किया जाएगा। इनमें से आधे से अधिक उत्पाद समझौता लागू होते ही शुल्क-मुक्त हो जाएंगे। दूसरी ओर, भारतीय वस्तुओं को न्यूजीलैंड बाजार में 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर बन सकते हैं।
समझौते में तेज सीमा-निकासी, प्राथमिकता आधारित बाजार पहुंच और खाद्य, फाइबर, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, पर्यटन तथा पेशेवर सेवाओं जैसे क्षेत्रों के लिए बेहतर व्यापारिक सुविधा का भी प्रावधान है।
व्यापारिक रिश्तों पर संभावित असर
जून 2026 तक दोनों देशों के बीच दोतरफा व्यापार NZ3.99 अरब दर्ज किया गया। इसी अवधि में भारत न्यूजीलैंड का नौवां सबसे बड़ा वस्तु एवं सेवा निर्यात बाजार था। समझौते के साथ न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में लगभग US20 अरब निवेश करने की प्रतिबद्धता भी जताई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और क्रिस्टोफर लक्सन ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में यह समझौता केवल व्यापार बढ़ाने का साधन नहीं, बल्कि दोनों देशों के आर्थिक सहयोग को दीर्घकालिक आधार देने वाला कदम भी माना जा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- मुक्त व्यापार समझौता दो देशों के बीच आयात-निर्यात पर शुल्क घटाने या हटाने के लिए किया जाता है।
- रैटिफिकेशन किसी अंतरराष्ट्रीय समझौते को लागू करने से पहले की औपचारिक मंजूरी प्रक्रिया होती है।
- टैरिफ का अर्थ आयातित वस्तुओं पर लगने वाला सीमा शुल्क है।
- भारत ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई देशों के साथ भी व्यापार समझौते किए हैं।
न्यूजीलैंड संसद का यह फैसला भारत के साथ आर्थिक साझेदारी को संस्थागत रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब निगाहें दोनों देशों की अंतिम मंजूरी और समझौते के लागू होने की प्रक्रिया पर रहेंगी।