अमेरिकी फेडरल रिज़र्व ने ब्याज दर बढ़ाकर कड़ा किया रुख
अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिज़र्व ने 16 सितंबर 2026 को अपनी प्रमुख ब्याज दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की। इस फैसले के बाद फेडरल फंड्स टारगेट रेंज 3.75% से 4.00% हो गई। मुद्रास्फीति पर नियंत्रण और आर्थिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में यह कदम अमेरिकी मौद्रिक नीति के सख्त रुख को दिखाता है।
फेड की बैठक में क्या तय हुआ
फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) ने सर्वसम्मति से 12-0 के मत से दर बढ़ाने का निर्णय लिया। यह वही समिति है जो अमेरिका की मौद्रिक नीति तय करती है। फेड की ओर से जारी संकेतों के अनुसार, आर्थिक गतिविधि मजबूत बनी हुई है, घरेलू मांग में स्थिरता है, उत्पादकता में सुधार दिख रहा है और पूंजीगत निवेश भी मजबूत है।
फेडरल रिज़र्व का मुख्य दायित्व अधिकतम रोजगार और स्थिर कीमतों को बढ़ावा देना है। इसी लक्ष्य के तहत वह ब्याज दरों, ओपन मार्केट ऑपरेशंस और रिज़र्व आवश्यकताओं जैसे औजारों का इस्तेमाल करता है।
ब्याज दर बढ़ने का असर क्यों अहम है
25 आधार अंक का मतलब 0.25 प्रतिशत अंक होता है। फेडरल फंड्स रेट वह ओवरनाइट दर है, जिस पर अमेरिकी बैंक और वित्तीय संस्थान एक-दूसरे को उधार देते हैं। जब यह दर बढ़ती है, तो आमतौर पर इसका असर होम लोन, ऑटो लोन और क्रेडिट कार्ड की ब्याज दरों पर भी पड़ सकता है।
फेड का दीर्घकालिक मुद्रास्फीति लक्ष्य 2% है। इसलिए जब कीमतों पर दबाव बना रहता है या अर्थव्यवस्था अपेक्षा से अधिक मजबूत दिखती है, तो केंद्रीय बैंक दरें बढ़ाकर मांग को संतुलित करने की कोशिश करता है।
2026 की नीति दिशा और पिछला रुख
फेड ने इससे पहले जुलाई 2023 में दरें बढ़ाई थीं। इसके बाद 2026 में यह नई बढ़ोतरी की गई। फेड के ताजा अनुमानों के मुताबिक 18 में से 16 अधिकारियों ने साल 2026 के अंत तक कम से कम एक और 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की संभावना जताई है। इससे संकेत मिलता है कि महंगाई पर पूरी तरह काबू पाने तक नीति सख्त रह सकती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- फेडरल रिज़र्व की स्थापना 1913 में हुई थी और यह अमेरिका की केंद्रीय बैंकिंग प्रणाली है।
- FOMC में 12 मतदान सदस्य होते हैं और यही अमेरिकी मौद्रिक नीति तय करती है।
- 25 आधार अंक = 0.25 प्रतिशत अंक होते हैं।
- फेडरल फंड्स रेट अमेरिकी बैंकों के बीच ओवरनाइट उधारी दर को दर्शाती है।
यह फैसला दिखाता है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक अभी भी मुद्रास्फीति और आर्थिक मजबूती के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है। वैश्विक वित्तीय बाजारों के लिए भी फेड की हर दर-निर्णय बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।