जलवायु लक्ष्यों की निगरानी के लिए भारत के नए डिजिटल प्लेटफॉर्म
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 16 सितंबर 2026 को मुंबई में भारत नेट ज़ीरो पोर्टल और राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना डैशबोर्ड लॉन्च किए। विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर शुरू किए गए ये दोनों प्लेटफॉर्म भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं और राष्ट्रीय मिशनों की प्रगति को अधिक पारदर्शी और केंद्रीकृत तरीके से ट्रैक करने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं।
भारत नेट ज़ीरो पोर्टल क्या करेगा
भारत नेट ज़ीरो पोर्टल एक ऐसा डिजिटल मंच है, जहां भारतीय संस्थान अपनी नेट ज़ीरो प्रतिबद्धताएं स्वेच्छा से दर्ज कर सकते हैं और समय-समय पर अपनी प्रगति अपडेट कर सकते हैं। इस पोर्टल पर संस्थानों को अपने स्कोप 1 और स्कोप 2 ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की रिपोर्टिंग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि स्कोप 3 रिपोर्टिंग स्वैच्छिक रहेगी। जो संस्थान नेट ज़ीरो लक्ष्य घोषित करेंगे, उन्हें मंत्रालय की ओर से एक स्वीकृति-पत्र भी मिलेगा।
यह पोर्टल जलवायु प्रतिबद्धताओं का एक सार्वजनिक और एकीकृत रिकॉर्ड तैयार करेगा। इससे कंपनियों, संस्थानों और अन्य संगठनों की घोषणाएं एक ही जगह उपलब्ध होंगी, जिससे नीति-निर्माताओं और आम लोगों दोनों के लिए जानकारी तक पहुंच आसान होगी।
एनएपीसीसी डैशबोर्ड से मिशनों की निगरानी
राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना यानी NAPCC डैशबोर्ड का उद्देश्य देश के राष्ट्रीय मिशनों की प्रगति को एक ही डिजिटल दृश्य में दिखाना है। यह मंत्रालयों को निगरानी में मदद करेगा और मिशन स्तर पर जहां कमी रह गई है, उसे पहचानने में सहायक होगा।
राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना वर्ष 2008 में शुरू की गई थी और इसमें आठ राष्ट्रीय मिशन शामिल हैं। इनमें राष्ट्रीय सौर मिशन, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने का राष्ट्रीय मिशन, सतत आवास मिशन, राष्ट्रीय जल मिशन, हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण का मिशन, हरित भारत मिशन, सतत कृषि मिशन और जलवायु परिवर्तन पर रणनीतिक ज्ञान का राष्ट्रीय मिशन शामिल हैं।
नेट ज़ीरो और भारत की जलवायु नीति
नेट ज़ीरो का अर्थ है ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और उसके हटाने की मात्रा के बीच संतुलन बनाना, ताकि कुल शुद्ध उत्सर्जन शून्य हो जाए। भारत ने वर्ष 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य तय किया है। ऐसे में डिजिटल प्लेटफॉर्म न केवल लक्ष्य-निर्धारण को मजबूत करेंगे, बल्कि प्रगति की निगरानी और जवाबदेही को भी बेहतर बनाएंगे।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- विश्व ओजोन दिवस हर साल 16 सितंबर को मनाया जाता है।
- मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल 1987 में अपनाया गया था और यह ओजोन परत संरक्षण से जुड़ा है।
- स्कोप 1 उत्सर्जन सीधे स्वामित्व या नियंत्रण वाले स्रोतों से होते हैं।
- स्कोप 2 उत्सर्जन खरीदी गई बिजली, भाप, हीटिंग और कूलिंग से होने वाले अप्रत्यक्ष उत्सर्जन होते हैं।
इन दोनों प्लेटफॉर्मों के जरिए भारत ने जलवायु शासन को डिजिटल, पारदर्शी और अधिक निगरानी योग्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।