असम में गैंडे की बढ़ती आबादी ने संरक्षण की सफलता दिखाई

असम में गैंडे की बढ़ती आबादी ने संरक्षण की सफलता दिखाई

असम में सितंबर 2026 तक एक सींग वाले गैंडों की संख्या 3,260 दर्ज की गई, जो दुनिया की कुल बड़ी एक-सींग वाले गैंडे की आबादी का लगभग 80% है। यह आंकड़ा बताता है कि भारत के पूर्वोत्तर में स्थित यह राज्य इस प्रजाति के संरक्षण का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है।

असम क्यों बना गैंडों का सबसे बड़ा ठिकाना

बड़ी एक-सींग वाले गैंडे को भारतीय गैंडा भी कहा जाता है और इसका वैज्ञानिक नाम Rhinoceros unicornis है। यह प्रजाति वulnerable श्रेणी में आती है और भारतीय उपमहाद्वीप के बाढ़ मैदानों, घास के मैदानों और आर्द्रभूमियों पर निर्भर रहती है। वैश्विक स्तर पर 2026 में इनकी संख्या 4,075 आंकी गई, जिसमें भारत में लगभग 3,323 और नेपाल में करीब 752 गैंडे थे।

असम की ब्रह्मपुत्र घाटी इस प्रजाति के लिए सबसे अहम परिदृश्य मानी जाती है। यहां के घास के मैदान, नदी-तटीय वन और दलदली क्षेत्र गैंडों के भोजन, विचरण और प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराते हैं।

काजीरंगा और मानस की भूमिका

असम में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान गैंडों का सबसे बड़ा सुरक्षित क्षेत्र बना हुआ है, जहां 2,600 से अधिक गैंडे मौजूद हैं। यह उद्यान न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया में इस प्रजाति के संरक्षण का प्रतीक माना जाता है।

मानस राष्ट्रीय उद्यान भी इस संरक्षण कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सितंबर 2026 तक यहां 40 से 50 गैंडों का अनुमान था। काजीरंगा और मानस, दोनों ही ब्रह्मपुत्र घाटी के उस पारिस्थितिक तंत्र का हिस्सा हैं, जहां गैंडों की दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए आवास संरक्षण बेहद जरूरी है।

शिकार पर रोक और संरक्षण की रणनीति

असम ने 2025 में गैंडों के अवैध शिकार की एक भी घटना दर्ज नहीं की। राज्य में 2016 की तुलना में शिकार की घटनाओं में 86% की गिरावट दर्ज की गई है। यह उपलब्धि गश्ती दलों की सक्रियता, आवास प्रबंधन, और वन्यजीव कानूनों के सख्त पालन का परिणाम मानी जा रही है।

गैंडों की सुरक्षा के लिए केवल शिकार रोकना ही पर्याप्त नहीं है। उनके लिए उपयुक्त घासभूमि, जलस्रोत और सुरक्षित आवाजाही वाले क्षेत्र बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। इसी कारण संरक्षण प्रयासों में आवास सुधार और निगरानी दोनों पर समान जोर दिया जा रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • बड़ी एक-सींग वाले गैंडे को भारतीय गैंडा भी कहा जाता है और इसका वैज्ञानिक नाम Rhinoceros unicornis है।
  • यह प्रजाति IUCN रेड लिस्ट में Vulnerable श्रेणी में शामिल है।
  • काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और असम में गैंडों का सबसे बड़ा आवास है।
  • मानस राष्ट्रीय उद्यान असम में राष्ट्रीय उद्यान होने के साथ-साथ टाइगर रिजर्व भी है।

असम के ताजा आंकड़े दिखाते हैं कि संगठित संरक्षण, सख्त निगरानी और बेहतर आवास प्रबंधन से संकटग्रस्त प्रजातियों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। एक-सींग वाले गैंडे की यह सफलता भारत के वन्यजीव संरक्षण मॉडल को और मजबूत बनाती है।

Originally written on September 16, 2026 and last modified on September 16, 2026.

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