राजस्थान के EMRS में स्मार्ट क्लासरूम से आदिवासी शिक्षा को डिजिटल बढ़त
राजस्थान के 29 कार्यरत एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (EMRS) में अब पढ़ाई का माहौल और अधिक डिजिटल होने जा रहा है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (NSTFDC) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के बीच 15 सितंबर 2026 को हुए समझौते के तहत इन स्कूलों में एकीकृत कंप्यूटर लैब-सह-स्मार्ट क्लासरूम स्थापित किए जाएंगे। इस परियोजना पर 16.01 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है और इससे हर साल 10,000 से अधिक अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
EMRS में डिजिटल शिक्षा का नया ढांचा
यह पहल राजस्थान के 11 जिलों में फैले EMRS नेटवर्क को तकनीकी रूप से मजबूत करेगी। प्रत्येक स्कूल में चार स्मार्ट क्लासरूम बनाए जाएंगे, जिनमें 86-इंच के इंटरैक्टिव फ्लैट-पैनल डिस्प्ले, लाइसेंस प्राप्त सॉफ्टवेयर, चुने हुए ओपन एजुकेशनल रिसोर्सेज और ऑडियो-विजुअल उपकरण शामिल होंगे। इसके साथ ही हर स्कूल में पूरी तरह नेटवर्कयुक्त कंप्यूटर लैब भी तैयार की जाएगी।
इन लैब्स में डेस्कटॉप, यूपीएस बैकअप, स्ट्रक्चर्ड LAN, मल्टी-फंक्शन प्रिंटर, फर्नीचर, एयर-कंडीशनिंग, बिजली संबंधी उन्नयन और सुरक्षा व्यवस्था जैसी सुविधाएं होंगी। इसका उद्देश्य केवल उपकरण उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए आधुनिक शिक्षण वातावरण तैयार करना है।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को भी मिलेगा सहारा
परियोजना में हर स्कूल के लिए 10 टैबलेट भी शामिल हैं, जिनमें प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी कोचिंग सामग्री पहले से लोड होगी। इसके अलावा एक वर्ष की इंटरनेट कनेक्टिविटी और कक्षा में उपयोग के लिए डिजिटल लर्निंग टूल्स भी उपलब्ध कराए जाएंगे। यह व्यवस्था उन छात्रों के लिए खास तौर पर उपयोगी मानी जा रही है जो ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों से आते हैं और जिनकी डिजिटल संसाधनों तक पहुंच सीमित रहती है।
समझौते के अनुसार, यह पूरा काम एमओयू पर हस्ताक्षर की तारीख से छह महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य है। समझौते के समय जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव सुश्री रंजना चोपड़ा, NSTFDC और HPCL के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- NSTFDC, जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन एक सार्वजनिक क्षेत्र का संगठन है।
- HPCL पेट्रोलियम क्षेत्र की एक महारत्न केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है।
- EMRS यानी एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए आवासीय स्कूल हैं।
- स्मार्ट क्लासरूम में इंटरैक्टिव फ्लैट-पैनल डिस्प्ले डिजिटल शिक्षण का प्रमुख उपकरण माना जाता है।
यह पहल आदिवासी बहुल क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता, डिजिटल पहुंच और परीक्षा-उन्मुख तैयारी को एक साथ मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।