मिजोरम में दो नई उभयचर प्रजातियों की पहचान

मिजोरम में दो नई उभयचर प्रजातियों की पहचान

मिजोरम से विज्ञान जगत के लिए एक अहम खोज सामने आई है, जहां दो ऐसी उभयचर प्रजातियों का रिकॉर्ड मिला है जो पहले विज्ञान के लिए ज्ञात नहीं थीं। इनमें Duttaphrynus phawngpui नामक टोड और Ingerana aizawl नामक मेंढक शामिल हैं। दोनों प्रजातियों का औपचारिक वर्णन सितंबर 2026 में प्रकाशित वैज्ञानिक शोधपत्रों में किया गया।

मिजोरम की जैव विविधता में नई उपलब्धि

यह खोज बताती है कि पूर्वोत्तर भारत की पहाड़ी और वनाच्छादित पारिस्थितिकी अभी भी कई अनदेखी प्रजातियों को समेटे हुए है। विशेष रूप से ऊंचाई वाले क्षेत्र, झरनों के आसपास के आवास और अलग-थलग पर्वतीय इलाके उभयचरों के लिए अनुकूल माने जाते हैं। इसी वजह से मिजोरम जैसे राज्यों में नई प्रजातियों का मिलना जैव विविधता के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Duttaphrynus phawngpui को Phawngpui National Park में 2,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर पाया गया। इसका नाम Phawngpui से लिया गया है, जिसे Blue Mountain भी कहा जाता है और जो मिजोरम की सबसे ऊंची चोटी है। दूसरी ओर Ingerana aizawl को मिजोरम विश्वविद्यालय परिसर में एक धारा के पास खोजा गया, और इसका नाम राज्य की राजधानी आइजोल के संदर्भ में रखा गया है।

वर्गीकरण और नामकरण का महत्व

इन दोनों प्रजातियों का वैज्ञानिक वर्गीकरण भी अलग-अलग है। Duttaphrynus phawngpui जीनस Duttaphrynus और परिवार Bufonidae से संबंधित है, जबकि Ingerana aizawl जीनस Ingerana और परिवार Dicroglossidae का हिस्सा है। जीवों की पहचान, नामकरण और वर्गीकरण की प्रक्रिया को टैक्सोनॉमी कहा जाता है, और यही जैव विविधता अध्ययन की आधारशिला है।

दिलचस्प बात यह है कि Ingerana aizawl को दो दशकों से अधिक समय तक Ingerana borealis समझा जाता रहा। बाद में हुए टैक्सोनॉमिक पुनर्मूल्यांकन ने इसे एक अलग प्रजाति के रूप में स्थापित किया। इससे यह भी साफ होता है कि पुराने रिकॉर्ड और नई वैज्ञानिक जांच के बीच अंतर कई बार नई खोजों तक पहुंचा देता है।

पूर्वोत्तर भारत और ‘स्काई आइलैंड’ पारिस्थितिकी

इस शोध में मिजोरम विश्वविद्यालय, कॉटन यूनिवर्सिटी, Help Earth और इंडोनेशिया की National Research and Innovation Agency के शोधकर्ता शामिल थे। नई प्रजातियों का प्रकाशन वैज्ञानिक पत्रिकाओं में किया गया, जो सहकर्मी-समीक्षा प्रक्रिया से गुजरती हैं।

पूर्वोत्तर भारत को उभयचर विविधता का एक प्रमुख क्षेत्र माना जाता है। यहां के अलग-थलग पर्वतीय आवासों को जीवभूगोल में sky islands कहा जाता है। ऐसे क्षेत्र आसपास के इलाकों से अलग होने के कारण विशिष्ट प्रजातियों को जन्म देते हैं और संरक्षण की दृष्टि से बेहद संवेदनशील भी होते हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • Phawngpui मिजोरम की सबसे ऊंची चोटी है और इसे Blue Mountain भी कहा जाता है।
  • Phawngpui National Park मिजोरम के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित है और पर्वतीय जैव विविधता के लिए जाना जाता है।
  • Taxonomy जीवों की पहचान, नामकरण और वर्गीकरण की विज्ञान शाखा है।
  • पूर्वोत्तर भारत में पहाड़ी, वन और जलधाराओं वाले आवास उभयचरों की विविधता के लिए अनुकूल माने जाते हैं।

मिजोरम में मिली यह खोज न केवल राज्य की जैव विविधता को रेखांकित करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि भारत के पर्वतीय क्षेत्रों में अभी बहुत कुछ वैज्ञानिक रूप से दर्ज किया जाना बाकी है।

Originally written on September 16, 2026 and last modified on September 16, 2026.

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