पीएम विश्वकर्मा योजना ने बदली पारंपरिक कारीगरों की तस्वीर
पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को औपचारिक सहायता देने के लिए शुरू की गई पीएम विश्वकर्मा योजना ने तीन साल के भीतर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 17 सितंबर 2023 को शुरू हुई इस केंद्रीय क्षेत्रीय योजना के तहत 30 लाख पंजीकरण का लक्ष्य पूरा कर लिया गया है। योजना का उद्देश्य 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगरों को कौशल, औजार, ऋण और बाजार से जोड़कर उनकी आजीविका को मजबूत करना है।
योजना का दायरा और उद्देश्य
पीएम विश्वकर्मा योजना खास तौर पर उन कारीगरों के लिए बनाई गई है, जिनकी पारंपरिक कला पीढ़ियों से चली आ रही है, लेकिन जिन्हें आधुनिक बाजार और वित्तीय व्यवस्था से पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पाता। इसमें बढ़ई, नाव बनाने वाले, लोहार, हथौड़ा और टूलकिट निर्माता, ताला बनाने वाले, सुनार, कुम्हार, मूर्तिकार, पत्थर तराशने वाले और टोकरी बनाने वाले जैसे 18 व्यवसाय शामिल हैं।
इस योजना के लिए वित्त वर्ष 2023-24 से 2027-28 तक 13,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार का फोकस केवल पंजीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशिक्षण, आधुनिक औजार, बिना गारंटी ऋण और डिजिटल बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करने पर भी है।
कौशल प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता
15 सितंबर 2026 तक 24.37 लाख से अधिक कारीगरों को बेसिक स्किल ट्रेनिंग दी जा चुकी थी। यह प्रशिक्षण 5 से 7 दिन का होता है और इसमें प्रतिदिन 500 रुपये का स्टाइपेंड दिया जाता है। इसका मकसद पारंपरिक काम को आधुनिक तकनीक और बेहतर उत्पादन पद्धतियों से जोड़ना है।
इसी तरह 18.16 लाख से अधिक लाभार्थियों को आधुनिक टूलकिट उपलब्ध कराई गई है। इसके लिए 15,000 रुपये तक की सहायता दी जाती है, ताकि कारीगर बेहतर उपकरणों के साथ काम कर सकें और उनकी उत्पादकता बढ़े।
डिजिटल भुगतान और बाजार से जुड़ाव
योजना का एक अहम पहलू कारीगरों को डिजिटल और ऑनलाइन बाजार से जोड़ना है। 16 सितंबर 2026 तक 6.19 लाख से अधिक बिना गारंटी ऋण स्वीकृत किए जा चुके थे, जिनकी कुल राशि लगभग 5,316 करोड़ रुपये रही। इन ऋणों पर ब्याज दर 5% रखी गई है, जिससे छोटे कारीगरों के लिए पूंजी जुटाना आसान होता है।
डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए पात्र डिजिटल ट्रांजैक्शन पर 1 रुपये का प्रोत्साहन दिया जाता है, जो महीने में 100 लेनदेन तक लागू है। अब तक 8.11 लाख से अधिक लाभार्थियों को डिजिटल प्रोत्साहन मिला है और 42 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की गई है। इसके अलावा 12,000 से अधिक कारीगरों को एआई टूल्स के उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वे ब्रांडिंग, उत्पाद डिजाइन, पैकेजिंग और मार्केटिंग में बेहतर हो सकें।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- पीएम विश्वकर्मा योजना 17 सितंबर 2023 को शुरू की गई थी।
- यह योजना 18 पारंपरिक व्यवसायों को कवर करती है और एक केंद्रीय क्षेत्रीय योजना है।
- बेसिक स्किल ट्रेनिंग के दौरान 500 रुपये प्रतिदिन का स्टाइपेंड दिया जाता है।
- डिजिटल प्रोत्साहन 1 रुपये प्रति पात्र लेनदेन है, जो महीने में 100 लेनदेन तक मिलता है।
कुल मिलाकर, पीएम विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों को केवल सहायता नहीं, बल्कि सम्मान, तकनीक और बाजार से जोड़ने का माध्यम बन रही है। 30 लाख पंजीकरण का लक्ष्य पूरा होना इस बात का संकेत है कि देश के हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यवसायों को नई आर्थिक पहचान मिल रही है।