अमेरिका-जॉर्डन का ईगर लायन 2026 अभ्यास, संयुक्त सैन्य तैयारी पर फोकस
अमेरिका और जॉर्डन के बीच होने वाला द्विवार्षिक सैन्य अभ्यास ईगर लायन 2026 15 सितंबर 2026 को कोलोराडो के फोर्ट कार्सन में शुरू हुआ। दो सप्ताह तक चलने वाले इस अभ्यास में अमेरिकी सेंट्रल कमांड और जॉर्डन की सशस्त्र सेनाएं मिलकर भाग ले रही हैं। इस बार 200 से अधिक सैन्यकर्मी शामिल हैं, जिससे यह अभ्यास दोनों देशों की संयुक्त तैयारी और समन्वय का अहम मंच बन गया है।
पहली बार अमेरिका में हो रहा आयोजन
ईगर लायन अभ्यास अमेरिका और जॉर्डन के बीच नियमित रूप से होने वाला सैन्य अभ्यास है, लेकिन 2026 संस्करण की खास बात यह है कि इसे पहली बार अमेरिका मेजबानी कर रहा है। यह इसका 12वां संस्करण है, जो दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी रक्षा सहयोग को दर्शाता है। ऐसे अभ्यासों का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण नहीं, बल्कि अलग-अलग परिस्थितियों में संयुक्त प्रतिक्रिया क्षमता को परखना भी होता है।
कौन-कौन से परिदृश्य शामिल हैं
इस अभ्यास में आतंकवाद-रोधी कार्रवाई, वायु रक्षा, समुद्री सुरक्षा, साइबर अभियानों और आपदा प्रतिक्रिया से जुड़े परिदृश्य शामिल किए गए हैं। आधुनिक संयुक्त सैन्य अभ्यासों में इन क्षेत्रों को इसलिए जोड़ा जाता है ताकि भूमि, वायु, समुद्र और साइबर डोमेन में तालमेल की वास्तविक परीक्षा हो सके। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि संकट की स्थिति में दोनों सेनाएं कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से साथ काम कर सकती हैं।
साझेदारी और रणनीतिक महत्व
कोलोराडो और जॉर्डन के बीच स्टेट पार्टनरशिप प्रोग्राम 2004 में शुरू हुआ था। यह कार्यक्रम दोनों पक्षों के बीच दीर्घकालिक सैन्य संबंधों को मजबूत करता है। ईगर लायन 2026 में कोलोराडो नेशनल गार्ड और इलिनॉय नेशनल गार्ड के कर्मियों की भागीदारी भी शामिल है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर इस ढांचे के तहत संयुक्त परिचालन क्षमता और तत्परता को बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ईगर लायन अमेरिका और जॉर्डन के बीच होने वाला द्विवार्षिक सैन्य अभ्यास है।
- ईगर लायन 2026 इस अभ्यास का 12वां संस्करण है।
- 2026 संस्करण की मेजबानी अमेरिका के कोलोराडो स्थित फोर्ट कार्सन ने की है।
- कोलोराडो और जॉर्डन के बीच स्टेट पार्टनरशिप प्रोग्राम 2004 में शुरू हुआ था।
ईगर लायन 2026 जैसे अभ्यास दिखाते हैं कि आधुनिक रक्षा सहयोग अब केवल हथियारों तक सीमित नहीं है, बल्कि आतंकवाद, साइबर सुरक्षा, समुद्री निगरानी और आपदा प्रबंधन जैसी बहु-क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटने की तैयारी भी इसका हिस्सा है।