महाराष्ट्र के दिगी में बड़ा शिपबिल्डिंग क्लस्टर, समुद्री उद्योग को नई रफ्तार

महाराष्ट्र के दिगी में बड़ा शिपबिल्डिंग क्लस्टर, समुद्री उद्योग को नई रफ्तार

मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) ने महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के दिगी में लगभग 27,000 करोड़ रुपये के ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर में निवेश की योजना बनाई है। यह परियोजना भारत के समुद्री विनिर्माण ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, क्योंकि इसमें जहाज निर्माण, मरम्मत और उससे जुड़ी औद्योगिक गतिविधियों के लिए एक समेकित केंद्र विकसित किया जाएगा।

दिगी में बनेगा बड़ा औद्योगिक समुद्री केंद्र

यह परियोजना एक ग्रीनफील्ड विकास है, यानी इसे पहले से खाली भूमि पर नए सिरे से तैयार किया जाएगा। दिगी क्लस्टर को कम से कम 20 लाख ग्रॉस टन वार्षिक जहाज निर्माण क्षमता के साथ विकसित करने की योजना है। ग्रॉस टन भार नहीं, बल्कि जहाज के आंतरिक आयतन का मानक माप है, जिसका उपयोग शिपबिल्डिंग और समुद्री योजना में किया जाता है।

इस क्लस्टर का उद्देश्य बड़े वाणिज्यिक जहाजों के निर्माण के लिए एक आधुनिक औद्योगिक आधार तैयार करना है। इससे भारत की समुद्री उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ-साथ आपूर्ति श्रृंखला, सहायक उद्योगों और तकनीकी सेवाओं को भी गति मिलने की उम्मीद है।

एमडीएल की भूमिका और निवेश योजना

15 सितंबर 2026 को एमडीएल ने नेशनल शिपबिल्डिंग एंड हेवी इंडस्ट्रीज पार्क महाराष्ट्र लिमिटेड (एनएसएचआईपीएमएल) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत एमडीएल को क्लस्टर का एंकर शिपयार्ड बनाया गया है। कंपनी की ओर से लगभग 15,000 करोड़ रुपये के निवेश और कम से कम 12 लाख ग्रॉस टन वार्षिक क्षमता विकसित करने की योजना रखी गई है।

एमडीएल मुंबई स्थित एक प्रमुख भारतीय शिपयार्ड और रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है। ऐसे एंकर शिपयार्ड की भूमिका परियोजना को तकनीकी, औद्योगिक और संचालनात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण होती है।

नीतिगत ढांचे और रोजगार पर असर

यह पहल केंद्र सरकार की ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर विकास योजना और Maritime Amrit Kaal Vision 2047 से जुड़ी है। इस परियोजना को महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड और मुंबई पोर्ट अथॉरिटी, एनएसएचआईपीएमएल के माध्यम से संयुक्त रूप से विकसित कर रहे हैं। एनएसएचआईपीएमएल एक विशेष प्रयोजन कंपनी है, जिसे किसी खास परियोजना के लिए बनाया जाता है।

सरकारी और औद्योगिक ढांचे के इस संयोजन से परियोजना के लिए भूमि, बंदरगाह संपर्क, निवेश और संचालन की तैयारी आसान होने की उम्मीद है। अनुमान है कि इस क्लस्टर से करीब 90,000 रोजगार सृजित हो सकते हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ग्रॉस टन भार का माप जहाज के आंतरिक आयतन से जुड़ा होता है, न कि उसके वजन से।
  • ग्रीनफील्ड परियोजना का अर्थ है नई, अविकसित भूमि पर पूरी तरह नया औद्योगिक ढांचा बनाना।
  • विशेष प्रयोजन कंपनी किसी एक परियोजना या उद्देश्य के लिए बनाई गई अलग कानूनी इकाई होती है।
  • रायगढ़ जिला महाराष्ट्र के कोंकण तट पर स्थित है और दिगी क्षेत्र के माध्यम से अरब सागर तक पहुंच रखता है।

दिगी शिपबिल्डिंग क्लस्टर भारत के समुद्री उद्योग को बड़े पैमाने पर विस्तार देने की दिशा में एक रणनीतिक परियोजना है। इससे न केवल जहाज निर्माण क्षमता बढ़ेगी, बल्कि महाराष्ट्र को एक नए औद्योगिक समुद्री केंद्र के रूप में भी पहचान मिल सकती है।

Originally written on September 16, 2026 and last modified on September 16, 2026.

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