कर्नाटक ने इंजीनियर्स डे को दी आधिकारिक मान्यता, ‘Er.’ उपसर्ग भी मंजूर
कर्नाटक सरकार ने 15 सितंबर को इंजीनियर्स डे के रूप में आधिकारिक राज्य-स्तरीय आयोजन घोषित किया है। इसी के साथ राज्य ने इंजीनियरों को अपने नाम के आगे ‘Er.’ उपसर्ग इस्तेमाल करने की अनुमति भी दी है। यह कदम इंजीनियरिंग पेशे की पहचान को औपचारिक मान्यता देने के रूप में देखा जा रहा है।
क्यों खास है यह फैसला
भारत में इंजीनियर्स डे हर साल 15 सितंबर को मनाया जाता है, जो भारत रत्न सर एम. विश्वेश्वरैया की जयंती है। कर्नाटक का यह निर्णय केवल एक औपचारिक घोषणा नहीं है, बल्कि राज्य में तकनीकी शिक्षा, नवाचार और इंजीनियरिंग समुदाय के योगदान को सार्वजनिक सम्मान देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
सरकार के आदेश के अनुसार, 15 सितंबर 2026 को जारी इस निर्णय के बाद इंजीनियर्स डे को राज्य के आधिकारिक आयोजनों में शामिल किया गया है। साथ ही, ‘Er.’ उपसर्ग को ‘Tr.’ की तरह एक पेशेवर पहचान के रूप में मान्यता दी गई है, जैसा कि भारत में कुछ अन्य व्यवसायों के साथ भी देखा जाता है।
सर एम. विश्वेश्वरैया और इंजीनियरिंग विरासत
सर एम. विश्वेश्वरैया भारतीय इंजीनियरिंग इतिहास के सबसे प्रतिष्ठित नामों में गिने जाते हैं। वे 1912 से 1918 तक मैसूर के दीवान रहे और सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण तथा औद्योगिक योजना से जुड़े कार्यों के लिए प्रसिद्ध हैं। कर्नाटक के कृष्णराज सागर बांध के लिए उनके द्वारा डिजाइन किए गए स्वचालित स्लुइस गेट्स उनकी तकनीकी दूरदृष्टि का महत्वपूर्ण उदाहरण माने जाते हैं।
उन्हें 1955 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। उनकी जयंती को इंजीनियर्स डे के रूप में मनाना देश में इंजीनियरिंग क्षेत्र के योगदान को याद करने की एक स्थापित परंपरा है।
कर्नाटक में इंजीनियरिंग शिक्षा का व्यापक आधार
कर्नाटक देश के उन राज्यों में शामिल है जहां इंजीनियरिंग शिक्षा का बड़ा नेटवर्क मौजूद है। राज्य से हर साल एक लाख से अधिक इंजीनियर स्नातक निकलते हैं। बेंगलुरु, मैसूरु और अन्य शहरी केंद्रों में कई इंजीनियरिंग कॉलेज, तकनीकी विश्वविद्यालय और शोध संस्थान स्थित हैं। ऐसे में यह निर्णय राज्य की शैक्षणिक और पेशेवर पहचान से भी जुड़ता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत में इंजीनियर्स डे हर साल 15 सितंबर को मनाया जाता है।
- यह दिन सर एम. विश्वेश्वरैया की जयंती के रूप में मनाया जाता है।
- सर एम. विश्वेश्वरैया को 1955 में भारत रत्न मिला था।
- कर्नाटक ने 2026 में इंजीनियरों के लिए ‘Er.’ उपसर्ग को मान्यता दी।
कर्नाटक का यह फैसला इंजीनियरिंग पेशे को सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर नई पहचान देता है। साथ ही, यह राज्य की तकनीकी परंपरा और सर एम. विश्वेश्वरैया की विरासत को भी औपचारिक सम्मान प्रदान करता है।