आईआईएससी का नया मॉडल CO₂ से ईंधन बनाने की दिशा में बड़ी छलांग

आईआईएससी का नया मॉडल CO₂ से ईंधन बनाने की दिशा में बड़ी छलांग

भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु के शोधकर्ताओं ने कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) को ईंधन और रसायनों में बदलने की प्रक्रिया को समझने के लिए एक ऐसा कम्प्यूटेशनल ढांचा विकसित किया है, जो 9,389 प्राथमिक रासायनिक अभिक्रियाओं का मानचित्र तैयार करता है। यह अध्ययन 6 अक्टूबर 2026 को Nature Communications में प्रकाशित हुआ और इसमें तांबे के उत्प्रेरक पर होने वाली CO₂ हाइड्रोजनेशन प्रक्रिया पर खास ध्यान दिया गया है।

CO₂ हाइड्रोजनेशन क्यों अहम है

CO₂ हाइड्रोजनेशन एक उत्प्रेरकीय प्रक्रिया है, जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड हाइड्रोजन के साथ प्रतिक्रिया करके मेथनॉल और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे उत्पाद बनाती है। यह क्षेत्र इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें एक प्रमुख ग्रीनहाउस गैस को उपयोगी रसायनों में बदला जा सकता है। तांबे-आधारित उत्प्रेरक इस शोध क्षेत्र में लंबे समय से अध्ययन का विषय रहे हैं, क्योंकि वे CO₂ रूपांतरण में कई संभावित प्रतिक्रिया मार्गों को संभव बनाते हैं।

आईआईएससी के मॉडल ने क्या नया दिखाया

पहले के मॉडलों में केवल 152 अभिक्रियाओं को शामिल किया गया था और उनमें मुख्य उत्पाद के रूप में फॉर्मिक एसिड की भविष्यवाणी की गई थी। लेकिन आईआईएससी के विस्तृत नेटवर्क ने 9,389 अभिक्रियाओं को जोड़कर तस्वीर को कहीं अधिक स्पष्ट बनाया। इस बड़े नेटवर्क ने लगभग 40 गुना अधिक CO₂ रूपांतरण की भविष्यवाणी की और मेथनॉल तथा कार्बन मोनोऑक्साइड को प्रमुख उत्पाद बताया, जो प्रयोगात्मक परिणामों से मेल खाते हैं।

शोधकर्ताओं ने इस ढांचे में क्वांटम-यांत्रिक सिमुलेशन, मशीन लर्निंग, स्वचालित अभिक्रिया खोज और गतिज मॉडलिंग को एक साथ जोड़ा। इससे CO₂ से ईंधन बनने की प्रक्रिया के हर छोटे चरण को ट्रैक करने वाला एक विस्तृत प्रतिक्रिया नेटवर्क तैयार किया जा सका।

भविष्य के लिए यह मॉडल क्यों उपयोगी है

अध्ययन में एक ऐसा हाइड्रोजन-ट्रांसफर मार्ग भी पहचाना गया, जिसमें कुछ चरणों में आणविक हाइड्रोजन (H₂) सीधे प्रतिक्रिया मध्यवर्तियों तक पहुंच सकता है। यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उत्प्रेरक की कार्यप्रणाली को बेहतर समझने में मदद मिलती है और अधिक प्रभावी प्रक्रिया डिजाइन की संभावना बढ़ती है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, इस ढांचे को केवल CO₂ रूपांतरण तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसे अन्य उत्प्रेरकों के साथ CO₂ अपचयन, नाइट्रोजन अपचयन और जल विभाजन जैसी प्रक्रियाओं के अध्ययन में भी अपनाया जा सकता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • कार्बन डाइऑक्साइड का रासायनिक सूत्र CO₂ है और इसमें एक कार्बन तथा दो ऑक्सीजन परमाणु होते हैं।
  • मेथनॉल का रासायनिक सूत्र CH₃OH है और इसका उपयोग ईंधन तथा औद्योगिक कच्चे माल के रूप में होता है।
  • कार्बन मोनोऑक्साइड का रासायनिक सूत्र CO है और यह संश्लेषण गैस रसायन में एक महत्वपूर्ण मध्यवर्ती है।
  • Nature Communications स्प्रिंगर नेचर द्वारा प्रकाशित एक सहकर्मी-समीक्षित वैज्ञानिक पत्रिका है।

यह अध्ययन दिखाता है कि उन्नत कम्प्यूटेशनल तकनीकें जटिल रासायनिक प्रक्रियाओं को समझने में कितनी उपयोगी हो सकती हैं। CO₂ को उपयोगी उत्पादों में बदलने की दिशा में यह काम भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा और हरित रसायन विज्ञान के लिए अहम आधार बन सकता है।

Originally written on October 6, 2026 and last modified on October 6, 2026.

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