अंटार्कटिका का ओजोन छिद्र 2026 में सातवां सबसे बड़ा

अंटार्कटिका का ओजोन छिद्र 2026 में सातवां सबसे बड़ा

अंटार्कटिका के ऊपर 2026 में बना ओजोन छिद्र पिछले 48 वर्षों के मापन रिकॉर्ड में सातवां सबसे बड़ा रहा। नासा और अमेरिका के राष्ट्रीय महासागरीय एवं वायुमंडलीय प्रशासन (एनओएए) ने 4 नवंबर को बताया कि इस वर्ष इसका विस्तार असामान्य रूप से शक्तिशाली ध्रुवीय भँवर और चरम मौसमी परिस्थितियों से प्रभावित हुआ। इसके बावजूद, वायुमंडल में ओजोन-क्षयकारी पदार्थों की मात्रा कम होने से छिद्र का आकार उस स्थिति से छोटा रहा, जो इन रसायनों के चरम स्तर पर होने पर बन सकता था।

सितंबर में अधिकतम विस्तार

ओजोन छिद्र का एक दिन का सबसे बड़ा विस्तार 18 सितंबर को दर्ज किया गया। उस दिन इसका क्षेत्रफल लगभग 1.05 करोड़ वर्ग मील, यानी 2.71 करोड़ वर्ग किलोमीटर था। ओजोन क्षरण के चरम मौसम—7 सितंबर से 13 अक्टूबर—के दौरान इसका औसत क्षेत्रफल करीब 96 लाख वर्ग मील (2.5 करोड़ वर्ग किलोमीटर) रहा।

एनओएए के गुब्बारा-आधारित उपकरणों ने 17 अक्टूबर को दक्षिण ध्रुव के ठीक ऊपर ओजोन की न्यूनतम सांद्रता 105 डॉबसन इकाई मापी। अब तक का रिकॉर्ड न्यूनतम स्तर अक्टूबर 2006 में दर्ज 92 डॉबसन इकाई है। इस तुलना से स्पष्ट है कि 2026 का स्तर गंभीर था, लेकिन ऐतिहासिक न्यूनतम तक नहीं पहुँचा।

ध्रुवीय भँवर और ओजोन क्षरण

अंटार्कटिका के ऊपर हर वर्ष बनने वाला ओजोन छिद्र वास्तव में वायुमंडल में खुला हुआ छेद नहीं, बल्कि ओजोन की मात्रा में मौसमी और तीव्र कमी का क्षेत्र है। ध्रुवीय भँवर अंटार्कटिका के ऊपर ठंडी समतापमंडलीय हवा को घेरकर रखता है। इन ठंडी परिस्थितियों में ध्रुवीय समतापमंडलीय बादल बनते हैं। सूर्य का प्रकाश लौटने पर इनमें सक्रिय हुए क्लोरीन-युक्त यौगिक ओजोन अणुओं को नष्ट करने वाली रासायनिक प्रक्रियाओं को तेज करते हैं।

ओजोन-क्षयकारी पदार्थों की वायुमंडलीय मात्रा यदि वर्ष 2000 के चरम स्तर जैसी होती, तो 2026 का छिद्र अनुमानतः 10 से 20 लाख वर्ग मील और बड़ा होता। यह अनुमान दिखाता है कि रसायनों पर नियंत्रण ने ओजोन परत के क्षरण को सीमित करने में भूमिका निभाई है, हालांकि मौसम अब भी हर वर्ष के आकार को प्रभावित करता है।

ओजोन परत की बहाली के संकेत

वैज्ञानिकों के अनुसार हाल के वर्षों में वार्षिक ओजोन छिद्र देर से बनने लगा है, जिसे ओजोन परत के धीरे-धीरे सुधरने का संकेत माना जा रहा है। इस दीर्घकालिक सुधार का प्रमुख कारण 1987 का मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल है, जिसके तहत ओजोन-क्षयकारी रसायनों को चरणबद्ध रूप से हटाने पर सहमति बनी। इसके विपरीत, 2025 का अंटार्कटिक ओजोन छिद्र 1992 के बाद दर्ज पाँच सबसे छोटे छिद्रों में शामिल था।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • अंटार्कटिक ओजोन छिद्र का मानचित्रण सामान्यतः 220 डॉबसन इकाई से कम कुल-स्तंभ ओजोन वाले क्षेत्र के आधार पर किया जाता है।
  • एक डॉबसन इकाई उस ओजोन परत की मोटाई दर्शाती है जो पूरी वायुमंडलीय ओजोन को मानक तापमान और दबाव पर संपीड़ित करने पर 0.01 मिलीमीटर होगी।
  • मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के क्रियान्वयन में सहायता के लिए 1991 में बहुपक्षीय कोष स्थापित किया गया था। यह विकासशील देशों को तय चरणबद्ध कटौती दायित्वों को पूरा करने में मदद करता है।

2026 के आँकड़े बताते हैं कि ओजोन परत की बहाली जारी है, लेकिन ध्रुवीय मौसम और भँवर की तीव्रता अब भी अंटार्कटिक ओजोन छिद्र के वार्षिक आकार को प्रभावित कर सकती है।

Originally written on November 5, 2026 and last modified on November 5, 2026.

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