असम-मेघालय में मिला नया पुष्पीय पौधा, सीमित आवास से संरक्षण की चिंता
असम और मेघालय के जंगलों में शोधकर्ताओं ने फूलों वाले पौधे की एक नई प्रजाति खोजी है। इसका वैज्ञानिक नाम Disporum kamakhasiense रखा गया है। इस खोज का विवरण वनस्पति विज्ञान की पत्रिका Novon में 4 और 5 नवंबर 2026 को प्रकाशित हुआ। पौधे का सीमित फैलाव और उसके आवास पर बढ़ता दबाव इसके संरक्षण को महत्वपूर्ण बनाता है।
कहाँ मिला नया पौधा
शोध दल ने इस प्रजाति को असम के कामरूप जिले के गर्भंगा आरक्षित वन, दीमा हसाओ जिले के लाइसोंग और मेघालय के बारापानी क्षेत्र में दर्ज किया। इसकी पहली पहचान जून और जुलाई 2025 में किए गए क्षेत्रीय अन्वेषणों के दौरान हुई थी।
इस पौधे का नामकरण ‘कामरूप’ और ‘खासी पहाड़ियों’ से जुड़े नामों को मिलाकर किया गया है। कामरूप असम का एक प्राचीन नाम है, जबकि खासी पहाड़ियाँ मेघालय के प्रमुख भौगोलिक क्षेत्रों में शामिल हैं।
पौधे की पहचान और आवास
Disporum kamakhasiense की ऊँचाई लगभग 120 से 180 सेंटीमीटर तक होती है। इसके तने शाखाओं वाले हैं और पत्तियाँ चौड़ी, पीताभ-हरी तथा स्पष्ट शिराओं वाली होती हैं। इस पर सफेद, तारे के आकार के नाजुक फूल खिलते हैं।
यह पौधा बाँस के जंगलों के नीचे चट्टानी ढलानों पर 200 से 1,100 मीटर की ऊँचाई के बीच पाया गया। इसकी विशेषताओं और भौगोलिक वितरण के आधार पर शोधकर्ताओं ने इसे Disporum वंश की एक नई मैदानी प्रजाति के रूप में वर्णित किया है। अध्ययन में गुवाहाटी स्थित केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान, मिसौरी वनस्पति उद्यान के हर्बेरियम और कलियाबोर कॉलेज के शोधकर्ता शामिल थे।
सीमित आबादी से संरक्षण की चुनौती
शोधकर्ताओं के अनुसार इस प्रजाति की आबादी छोटी और सीमित क्षेत्रों तक फैली है। सड़क विस्तार, वनों की कटाई और पौधों के अत्यधिक दोहन से इसके प्राकृतिक आवास पर दबाव पड़ सकता है। इसी कारण अध्ययन में इसे संभावित रूप से संकटग्रस्त बताया गया है। यह औपचारिक संरक्षण-स्थिति घोषित होने के समान नहीं है; इसकी स्थिति समझने के लिए आगे अध्ययन की आवश्यकता है।
शोध दल ने इस पौधे की आबादी और आवास पर अधिक विस्तृत संरक्षण-अध्ययन करने की जरूरत बताई है। पूर्वोत्तर भारत के जंगलों में सीमित क्षेत्र में मिलने वाली प्रजातियों की पहचान जैव विविधता के दस्तावेजीकरण और उनके संरक्षण की योजना बनाने में मदद करती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- Disporum वंश के बारहमासी पुष्पीय पौधे एशिया में उत्तरी भारत से जापान और दक्षिण में इंडोनेशिया तक पाए जाते हैं; इनका विस्तार रूस के सुदूर पूर्व तक भी है।
- उत्तर अमेरिका की कुछ प्रजातियाँ पहले Disporum में शामिल थीं, लेकिन गुणसूत्रीय, रासायनिक और आणविक प्रमाणों के आधार पर उन्हें Prosartes वंश में रखा गया।
- एपीजी तृतीय वर्गीकरण प्रणाली में कोल्चिकेसी कुल को एकबीजपत्री समूह के लिलिएल्स गण में रखा गया है।
- नई प्रजाति का नाम Disporum kamakhasiense है और इसका वर्णन पूर्वोत्तर भारत के असम तथा मेघालय से प्राप्त नमूनों के आधार पर किया गया।
नई प्रजाति की खोज पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध वनस्पति विविधता को सामने लाती है, जबकि इसका सीमित आवास समय रहते संरक्षण-अध्ययन की आवश्यकता रेखांकित करता है।