कज़ाखस्तान में दूसरे अमूर बाघ की रिहाई से पुनर्वास को बल

कज़ाखस्तान में दूसरे अमूर बाघ की रिहाई से पुनर्वास को बल

कज़ाखस्तान ने 31 अक्टूबर 2026 को अमूर नाम के नर बाघ को इले-बाल्खाश राज्य प्राकृतिक अभयारण्य में छोड़ा। इस क्षेत्र में छोड़ा गया वह दूसरा बाघ है। इससे पहले 31 जुलाई को मादा बाघ उमित को जंगल में छोड़ा गया था। यह पहल उस इलाके में बाघों को फिर से बसाने की कोशिश का हिस्सा है, जहां कभी कैस्पियन या तुरान बाघ पाए जाते थे।

रिहाई से पहले हुई स्वास्थ्य और व्यवहार जांच

अमूर, उमित और उनके दो शावक मई 2026 में रूस के खाबारोव्स्क क्षेत्र से कज़ाखस्तान लाए गए थे। अमूर बाघों को इसलिए चुना गया क्योंकि उनका आनुवंशिक संबंध विलुप्त कैस्पियन बाघ से निकट माना जाता है। रिहाई से पहले दोनों वयस्क बाघों की पशु-चिकित्सकीय जांच और व्यवहार का आकलन किया गया। उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए उपग्रह कॉलर लगाए गए हैं।

उमित के बारे में बताया गया है कि वह नए वातावरण के अनुकूल हो रही है और अपने लिए शिकार भी कर रही है। दोनों शावक अभी विशेषज्ञों की देखरेख में हैं। अधिकारियों के अनुसार, 2027 में उनकी स्थिति का आकलन कर उन्हें जंगल में छोड़ने पर फैसला किया जा सकता है।

आवास और शिकार प्रजातियों की बहाली

इले-बाल्खाश अभयारण्य की स्थापना 2018 में हुई थी। बाघों के लिए सुरक्षित आवास बनाने के साथ यहां उनके भोजन का आधार भी मजबूत किया जा रहा है। इसमें बुखारा हिरण और कुलान जैसी प्रजातियों की बहाली शामिल है। सितंबर 2026 में अल्तिन-एमेल राष्ट्रीय उद्यान से 30 कुलान अभयारण्य में लाए गए।

यह कार्यक्रम केवल बाघों को छोड़ने तक सीमित नहीं है। गांवों के आसपास जोखिम घटाने के लिए मानव-बाघ संघर्ष रोकने वाली टीमें और स्थानीय लोगों को सतर्क करने की व्यवस्था बनाई जा रही है। कज़ाखस्तान, रूस, अमूर टाइगर सेंटर और विश्व वन्यजीव कोष इस प्रयास में भागीदार हैं।

दीर्घकालीन लक्ष्य और क्षेत्रीय महत्व

कार्यक्रम का लक्ष्य लगभग 50 बाघों की ऐसी आबादी स्थापित करना है जो लंबे समय तक खुद को बनाए रख सके। इसके लिए 2033 तक कम से कम 10 बाघों को छोड़ने की योजना है। कैस्पियन बाघ इस क्षेत्र से 70 वर्ष से अधिक समय पहले लुप्त हो गया था; इसलिए इसकी वापसी के प्रयास में उपयुक्त आवास, पर्याप्त शिकार और स्थानीय समुदायों की सुरक्षा—तीनों अहम हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • 2015 के एक वर्गीकरण प्रस्ताव में साइबेरियाई और कैस्पियन बाघों को मुख्यभूमि उपप्रजाति Panthera tigris tigris में रखा गया था।
  • इस प्रस्ताव में सुंडा द्वीपों के बाघों को अलग उपप्रजाति Panthera tigris sondaica माना गया।
  • वंश-विकास संबंधी अध्ययन के अनुसार, कैस्पियन और साइबेरियाई बाघों की साझा पूर्वज आबादी पूर्वी चीन से गांसू-सिल्क रोड गलियारे के रास्ते मध्य एशिया पहुंची और फिर साइबेरिया की ओर फैली।
  • मध्य एशिया के रेगिस्तानी क्षेत्रों में कैस्पियन बाघों का आवास जलधाराओं के किनारे संकरी पट्टियों के रूप में था, जो कुछ किलोमीटर तक ही चौड़ी हो सकती थीं।

अमूर की रिहाई कज़ाखस्तान के बाघ पुनर्वास कार्यक्रम का अगला चरण है। इसकी दीर्घकालीन सफलता आवास और शिकार प्रजातियों की बहाली के साथ मानव-बाघ संघर्ष कम करने पर निर्भर करेगी।

Originally written on November 5, 2026 and last modified on November 5, 2026.

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