2026 QQ8 बना पृथ्वी का अस्थायी ‘मिनी-मून’
क्षुद्रग्रह 2026 QQ8 अप्रैल 2026 के आखिरी दिनों में पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में आकर उसका अस्थायी ‘मिनी-मून’ बन गया। यह चंद्रमा की तरह स्थायी उपग्रह नहीं है। अनुमान है कि दिसंबर 2026 तक यह पृथ्वी से बंधा रहेगा और फिर गुरुत्वीय पकड़ से निकलकर सूर्य की परिक्रमा करने लगेगा।
पृथ्वी के चारों ओर इसकी अस्थायी यात्रा
2026 QQ8 पृथ्वी के चारों ओर गुर्दे जैसी आकृति वाला पथ बनाता है। इसकी पृथ्वी से निकटतम दूरी लगभग 0.0038 खगोलीय इकाई है, जो पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की औसत दूरी से करीब डेढ़ गुना है। इसका आकार लगभग एक मीटर आंका गया है, हालांकि कुछ अनुमान इसे दो मीटर तक बताते हैं।
दिसंबर 2026 में पृथ्वी के गुरुत्वीय प्रभाव से बाहर निकलने के बाद यह 2027 में सूर्य की परिक्रमा करता रहेगा। इसकी छोटी बनावट के कारण यदि यह कभी पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करे, तो इसके जलकर नष्ट हो जाने की आशंका है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह पृथ्वी के लिए कोई खतरा नहीं है।
खोज और पहचान की पुष्टि
हंगरी के खगोलशास्त्री क्रिस्टियान सार्नेचकी ने 20 अगस्त को इस वस्तु को देखा था। शुरुआत में इसे अंतरिक्ष का मलबा समझा गया, लेकिन आगे के अवलोकनों से इसकी पहचान प्राकृतिक क्षुद्रग्रह के रूप में हुई। माइनर प्लैनेट सेंटर ने 29 अक्टूबर को इसकी पुष्टि की। इस प्रक्रिया में हवाई विश्वविद्यालय की 2.2 मीटर दूरबीन और लोवेल डिस्कवरी दूरबीन से मिले अवलोकनों का उपयोग किया गया।
माइनर प्लैनेट सेंटर छोटे ग्रहों और क्षुद्रग्रहों के अवलोकन जुटाता है, उनकी कक्षाओं की गणना करता है और परिणाम प्रकाशित करता है। पृथ्वी के निकट आने वाली वस्तुओं पर आगे के अवलोकनों के समन्वय में भी इसकी भूमिका रहती है।
निकट आना और पृथ्वी का उपग्रह बनना अलग घटनाएं
कक्षीय गणनाओं में 2026 QQ8 के पृथ्वी के पास आने की पिछली घटना 1965 और अगली घटना 2058 बताई गई है। लेकिन किसी क्षुद्रग्रह का पृथ्वी के नजदीक से गुजरना अपने-आप उसे पृथ्वी का उपग्रह नहीं बनाता। अस्थायी रूप से गुरुत्वीय पकड़ में आने के लिए उसकी गति और पृथ्वी के पास से गुजरने का कोण भी महत्वपूर्ण होता है। उपलब्ध अनुमान के अनुसार, 2058 की निकटता पर इसके दोबारा पृथ्वी की पकड़ में आने की संभावना नहीं है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- माइनर प्लैनेट सेंटर छोटे ग्रहों और क्षुद्रग्रहों के अवलोकनों के आधार पर उनकी कक्षाओं की गणना करता है।
- अस्थायी मिनी-मून पृथ्वी के गुरुत्वीय प्रभाव में आकर कुछ समय उसकी परिक्रमा करता है।
- क्वासी-उपग्रह पृथ्वी के गुरुत्व से बंधे नहीं होते; वे सूर्य की परिक्रमा जारी रखते हैं।
- पृथ्वी के पास से गुजरना किसी वस्तु के दोबारा गुरुत्वीय पकड़ में आने की गारंटी नहीं है।
2026 QQ8 का मामला दिखाता है कि पृथ्वी के पास से गुजरने वाले छोटे खगोलीय पिंड कभी-कभी कुछ समय के लिए उसकी कक्षा में आ सकते हैं, लेकिन यह स्थिति स्थायी नहीं होती।