उपग्रह नेटवर्क के लिए अलग अनुमति व्यवस्था की तैयारी

उपग्रह नेटवर्क के लिए अलग अनुमति व्यवस्था की तैयारी

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाताओं के लिए अलग अनुमति व्यवस्था बनाने की सिफारिश की है। 5 नवंबर 2026 को दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत की गई यह सिफारिश बाध्यकारी नहीं है। इसे लागू करने के लिए दूरसंचार विभाग (DoT) की स्वीकृति आवश्यक होगी।

उपग्रह नेटवर्क प्रदाताओं की भूमिका

प्रस्तावित अनुमति से पात्र कंपनियां भारत में उपग्रह संचार नेटवर्क स्थापित और संचालित कर सकेंगी। इसमें गेटवे तथा नेटवर्क उपकरण शामिल होंगे। ऐसी कंपनियां अपना नेटवर्क दूरसंचार ऑपरेटरों या इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को किराये पर दे सकेंगी, लेकिन उपभोक्ताओं को सीधे सेवाएं नहीं बेच पाएंगी। उन्हें उपग्रहों का स्वामित्व रखने की जरूरत भी नहीं होगी और यह अनुमति उपग्रह प्रक्षेपित करने या उनका संचालन करने का अधिकार नहीं देगी।

पात्रता के लिए कंपनी के पास अधिकृत उपग्रह क्षमता हो सकती है, वह ऐसी क्षमता रखने वाली कंपनी की सहायक इकाई हो सकती है या भारत में गेटवे संचालित करने का समझौता कर सकती है। प्रस्तावित राष्ट्रीय अनुमति की अवधि 20 वर्ष होगी और इसे अगले 20 वर्षों के लिए नवीनीकृत किया जा सकेगा। ट्राई ने प्रवेश शुल्क 37.5 लाख रुपये और समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) का 8 प्रतिशत वार्षिक लाइसेंस शुल्क सुझाया है। दूरसंचार ऑपरेटर अपने शुल्क की गणना में उपग्रह नेटवर्क प्रदाता को किए गए भुगतान की कटौती कर सकेंगे।

स्पेक्ट्रम और प्रत्यक्ष उपग्रह संपर्क

सैटेलाइट आधारित सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम प्रशासनिक तरीके से अधिकतम पांच वर्ष के लिए दिया जा सकेगा। जरूरत पड़ने पर दो वर्ष का विस्तार भी संभव होगा। स्पेक्ट्रम शुल्क की अंतिम दर तय नहीं है: सिफारिश के विस्तृत हिस्से में इसका निर्धारण दूरसंचार विभाग पर छोड़ा गया है, जबकि प्रति मेगाहर्ट्ज 3,500 रुपये के वार्षिक न्यूनतम शुल्क का उल्लेख भी सामने आया है। एजीआर के 4 प्रतिशत शुल्क से जुड़ा प्रस्ताव भी लंबित बताया गया है।

ट्राई ने उन क्षेत्रों में सीधे सामान्य स्मार्टफोन तक उपग्रह संपर्क की अनुमति देने की भी सिफारिश की है जहां मोबाइल टावर उपलब्ध नहीं हैं। इसके लिए ऑपरेटर मौजूदा स्पेक्ट्रम का उपयोग अतिरिक्त शुल्क के बिना कर सकेंगे, बशर्ते सभी 22 दूरसंचार सर्किलों में एक ही आवृत्ति चैनल उपलब्ध हो।

भारत में डेटा और सुरक्षा संबंधी शर्तें

भारतीय उपयोगकर्ताओं का संचार यातायात भारत स्थित गेटवे से होकर गुजरना होगा और उसे विदेश में न भेजा जा सकेगा, न उसकी प्रतिलिपि बनाई जा सकेगी। प्रदाताओं को वास्तविक समय में निगरानी और कानूनी अवरोधन की सुविधा देनी होगी। अनुमति मिलने के 12 महीनों के भीतर गेटवे चालू करना भी जरूरी होगा। ये शर्तें नेटवर्क सुरक्षा और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों की पहुंच सुनिश्चित करने से जुड़ी हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • दूरसंचार अधिनियम, 2023 में स्पेक्ट्रम आवंटन का सामान्य तरीका नीलामी है, लेकिन उपग्रह सेवाओं जैसी निर्दिष्ट श्रेणियों में प्रशासनिक आवंटन संभव है।
  • एजीआर दूरसंचार लाइसेंस शुल्क की गणना का आधार है, कंपनी का लाभ नहीं। इसमें स्वीकार्य कटौतियां लाइसेंस की शर्तों से तय होती हैं।
  • 3जीपीपी के रिलीज़ 17 ने गैर-स्थलीय नेटवर्क के लिए 5जी न्यू रेडियो मानक जोड़ा, जिससे उपग्रह संपर्क को मोबाइल नेटवर्क मानकों में शामिल किया गया।
  • प्रत्यक्ष उपग्रह-से-फोन सेवा विशेष उपग्रह सुविधा रहित, सामान्य स्मार्टफोन पर भी काम कर सकती है।

प्रस्तावित व्यवस्था उपग्रह नेटवर्क को मौजूदा दूरसंचार ढांचे से जोड़ सकती है। हालांकि, इसकी शुरुआत दूरसंचार विभाग की स्वीकृति और शुल्क संबंधी शर्तों के अंतिम निर्धारण पर निर्भर करेगी।

Originally written on November 6, 2026 and last modified on November 6, 2026.

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