सोडा ऐश आयात पर दो साल की सीमा की सिफारिश
भारत में सोडा ऐश के आयात पर दो साल के लिए मात्रात्मक सीमा लगाने की सिफारिश की गई है। वाणिज्य मंत्रालय के अधीन व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) ने 6 नवंबर 2026 को जांच के बाद यह कदम सुझाया। यह अभी सिफारिश है; इसे लागू करने का अंतिम निर्णय केंद्र सरकार को लेना है।
आयात में तेज बढ़ोतरी बनी चिंता
डीजीटीआर की जांच में पाया गया कि 2023–24 में सोडा ऐश का आयात 89 प्रतिशत बढ़ा और उसके बाद भी ऊंचे स्तर पर बना रहा। जांच के अनुसार, आयात में इस वृद्धि से घरेलू उद्योग को गंभीर नुकसान पहुंचने का खतरा है। इसी आधार पर आयात की मात्रा सीमित करने वाले सुरक्षा उपायों की सिफारिश की गई है।
आवेदन भारत के क्षार निर्माता संघ ने डीसीडब्ल्यू लिमिटेड, जीएचसीएल लिमिटेड, नीरमा लिमिटेड, आरएसपीएल लिमिटेड और टाटा केमिकल्स की ओर से दाखिल किया था। सोडा ऐश रासायनिक उद्योग का एक महत्वपूर्ण उत्पाद है और इसका उपयोग कांच तथा डिटर्जेंट जैसे उत्पादों के निर्माण में होता है। आयात सीमा का उद्देश्य घरेलू उत्पादकों को आयात में अचानक आई वृद्धि से राहत देना है।
दो वर्षों के लिए प्रस्तावित आयात कोटा
सिफारिश के अनुसार, पहले वर्ष में आयात की अधिकतम सीमा 7,54,992 मीट्रिक टन और दूसरे वर्ष में 7,92,740 मीट्रिक टन होगी। दोनों वर्षों का कुल प्रस्तावित कोटा 15,47,732 मीट्रिक टन है। देशवार आवंटन में अमेरिका के लिए 3,26,745 टन, तुर्किये के लिए 2,63,829 टन और ईरान तथा संयुक्त अरब अमीरात के लिए संयुक्त रूप से 2,27,443 टन रखा गया है।
इसके अलावा रूस के लिए 1,44,092 टन, यूरोपीय संघ के लिए 2,40,217 टन, केन्या के लिए 2,49,786 टन और चीन के लिए 95,298 टन का आवंटन प्रस्तावित है। अन्य देशों के लिए 322 टन निर्धारित हैं। ये सभी आंकड़े दोनों वर्षों की कुल मात्रा से संबंधित हैं।
त्रैमासिक सीमा और सुरक्षा उपायों का अर्थ
प्रत्येक देश का वार्षिक कोटा चार तिमाही हिस्सों में बांटा जाएगा। आयातकों को संबंधित तिमाही में निर्धारित सीमा के भीतर ही आयात करना होगा। इस तरह कुल कोटे के साथ-साथ हर तिमाही में आने वाली मात्रा पर भी नियंत्रण रहेगा।
सुरक्षा उपाय (सेफगार्ड) व्यापार उपचार का एक अस्थायी साधन है। यह अनुचित व्यापार तक सीमित नहीं होता; आयात में बढ़ोतरी से घरेलू उद्योग को गंभीर नुकसान हो या उसका खतरा हो, तो इसका उपयोग किया जा सकता है। डीजीटीआर जांच और सिफारिश करता है, जबकि उपाय लागू करने के लिए केंद्र सरकार को राजस्व विभाग की अधिसूचना जारी करनी होती है। इसलिए प्रस्तावित कोटे को लागू प्रतिबंध नहीं माना जाना चाहिए।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- डीजीटीआर वाणिज्य विभाग के अधीन व्यापार उपचार संबंधी जांच करने वाला प्राधिकरण है।
- सोडा ऐश का सामंजस्यपूर्ण प्रणाली वर्गीकरण उपशीर्षक 2836.20 है; सोडियम बाइकार्बोनेट का वर्गीकरण 2836.30 है।
- सोडा ऐश बनाने की सॉल्वे प्रक्रिया में नमकीन पानी और चूना पत्थर का उपयोग होता है। अमोनिया दोबारा उपयोग के लिए प्राप्त किया जाता है और कैल्शियम क्लोराइड सह-उत्पाद होता है।
- सुरक्षा उपाय अस्थायी होते हैं और बढ़े हुए आयात से गंभीर क्षति या उसके खतरे की स्थिति में लागू किए जा सकते हैं।
अब प्रस्ताव पर केंद्र सरकार का निर्णय महत्वपूर्ण होगा। अधिसूचना जारी होने तक आयात कोटे की सिफारिश को लागू व्यवस्था नहीं माना जाएगा।