दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण पर सख्ती, ग्रैप का तीसरा चरण लागू
दीपावली से पहले वायु प्रदूषण बढ़ने के बीच वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने 6 नवंबर 2026 को दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रैप) का तीसरा चरण लागू कर दिया। इसका उद्देश्य प्रदूषण के गंभीर स्तर तक पहुंचने से पहले उत्सर्जन और धूल पर नियंत्रण करना है।
दिल्ली की हवा ‘बहुत खराब’ श्रेणी में
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, 6 नवंबर को सुबह 9 बजे दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 391 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। शहर के 59 निगरानी केंद्रों में से 30 पर हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में थी। एक अन्य रिपोर्ट में दिल्ली का औसत एक्यूआई 382 बताया गया। इन स्तरों के मद्देनजर आयोग ने एहतियाती कदम उठाए।
वाहनों और निर्माण गतिविधियों पर रोक
ग्रैप के तीसरे चरण के तहत दिल्ली और गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद तथा गौतम बुद्ध नगर में बीएस-तीन पेट्रोल और बीएस-चार डीजल वाले हल्के चारपहिया वाहनों के चलने पर रोक लगाई गई है। पुराने डीजल मालवाहक वाहनों को दिल्ली में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में गैर-जरूरी निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़ी धूल पैदा करने वाली गतिविधियां प्रतिबंधित हैं। कुछ आवश्यक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को छूट दी गई है। पत्थर तोड़ने और खनन की गतिविधियां भी पूरे क्षेत्र में बंद रहेंगी।
स्कूलों और कार्यालयों के लिए निर्देश
दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में कक्षा पांच तक की पढ़ाई को मिश्रित व्यवस्था में चलाने का निर्देश दिया गया है, जिसमें ऑनलाइन और प्रत्यक्ष कक्षाएं शामिल हो सकती हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के सरकारी, नगरपालिका और निजी कार्यालयों को कर्मचारियों की प्रत्यक्ष उपस्थिति 50 प्रतिशत तक सीमित करने और बाकी कर्मचारियों को घर से काम करने की सलाह देने को कहा गया है।
धूल कम करने के लिए सड़कों की मशीनों से सफाई और पानी का छिड़काव बढ़ाया जाएगा। ये कदम वाहन उत्सर्जन, निर्माण गतिविधियों और सड़क की धूल जैसे प्रदूषण स्रोतों पर एक साथ नियंत्रण के लिए हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत का राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक आठ प्रदूषकों के मानकों को शामिल करता है।
- समग्र एक्यूआई निकालने में प्रदूषकों के उप-सूचकांकों का औसत नहीं लिया जाता; सबसे अधिक उप-सूचकांक समग्र मान तय करता है।
- वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की स्थापना वर्ष 2021 के कानून के तहत हुई। इसे दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में निर्देश देने के अधिकार प्राप्त हैं।
- ग्रैप के चरणों को लागू करने में पूर्वानुमानित एक्यूआई का भी उपयोग किया जा सकता है, इसलिए प्रदूषण स्तर संबंधित सीमा तक पहुंचने से पहले कदम उठाए जा सकते हैं।
ग्रैप का तीसरा चरण प्रदूषण के बढ़ते जोखिम को देखते हुए क्षेत्रीय स्तर पर लागू किया गया है। इसके प्रभावी पालन के लिए प्रशासनिक निर्देशों के साथ नागरिकों का सहयोग भी अहम रहेगा।