पंजाब में पराली जलाने के मामले बढ़े, निगरानी सख्त
पंजाब में 15 सितंबर से 5 नवंबर 2026 के बीच खेतों में आग लगाने की 2,787 घटनाएं दर्ज की गईं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 4 नवंबर तक इनकी संख्या 2,347 थी। इससे एक दिन में 440 नए मामले सामने आने का संकेत मिलता है। पराली जलाने से रोकने के लिए राज्य में जुर्माने, प्राथमिकी और प्रशासनिक निगरानी के उपाय जारी हैं।
तरनतारन और फिरोजपुर में सबसे अधिक घटनाएं
जिलेवार आंकड़ों में तरनतारन 586 मामलों के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि फिरोजपुर में 361 घटनाएं दर्ज की गईं। संगरूर में 240, अमृतसर में 221, बठिंडा में 216 और पटियाला में 156 मामले सामने आए। ये आंकड़े राज्य के अलग-अलग कृषि क्षेत्रों में पराली प्रबंधन की चुनौती को दर्शाते हैं।
जुर्माना, प्राथमिकी और निगरानी
प्रशासन ने 914 मामलों में पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के तौर पर 46.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और इसमें से 24.85 लाख रुपये वसूले। कुल 710 प्राथमिकी दर्ज की गईं। इनमें तरनतारन की 294 प्राथमिकी भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत दर्ज हुईं। यह धारा लोक सेवक द्वारा जारी आदेश की अवज्ञा से संबंधित है। इसके अतिरिक्त, 829 मामलों में राजस्व अभिलेखों में ‘रेड एंट्री’ की गई।
4 नवंबर को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने पंजाब के 12 जिलों के वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ वीडियो बैठक की। आयोग ने निगरानी और कार्रवाई तेज करने तथा आग की घटनाएं रोकने या उन पर नजर रखने में विफल रहने वाले नोडल अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए।
पराली प्रबंधन के विकल्प और मिट्टी पर असर
धान और गेहूं की कटाई के बाद अगली फसल की बुवाई के लिए कम समय मिलने पर कुछ किसान अवशेष जलाते हैं। यह तरीका कम लागत वाला हो सकता है, लेकिन बार-बार पराली जलाने से मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्मजीव और जीव-जंतु प्रभावित होते हैं। इससे मिट्टी का जैविक पदार्थ घट सकता है और कार्बन-नाइट्रोजन संतुलन बिगड़ सकता है।
पराली का प्रबंधन खेत में ही करने के लिए हैप्पी सीडर जैसे यंत्रों का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह फसल-अवशेष को छोटे टुकड़ों में काटकर खेत में समान रूप से फैला देता है। कटाई के बाद एंजाइम-आधारित जैव अपघटक का छिड़काव भी एक विकल्प है, जो मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ाने और उसकी सेहत बनाए रखने में सहायक हो सकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग का गठन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता से जुड़े विषयों के प्रबंधन के लिए किया गया है।
- भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 लोक सेवक द्वारा विधिवत जारी आदेश की अवज्ञा से संबंधित है।
- हैप्पी सीडर फसल-अवशेष को खेत में फैलाते हुए बुवाई करने में मदद करने वाला कृषि यंत्र है।
- पराली जलाने से मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्मजीवों और जैविक पदार्थ पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
घटनाओं में तेज बढ़ोतरी के बीच प्रशासन की कार्रवाई के साथ खेत में अवशेष प्रबंधन के व्यावहारिक विकल्प अपनाना भी जरूरी है।