मृत तारे के आसपास ‘फीनिक्स ग्रह’ की नई संभावना
खगोलविदों ने एक सफेद बौने तारे HS 0209+0832 के आसपास एक ऐसे ग्रह की संभावना पहचानी है, जिसे ‘दूसरी पीढ़ी’ का ग्रह माना जा रहा है। यह खोज इसलिए अहम है क्योंकि यह संकेत देती है कि किसी तारे के जीवन के अंत के बाद भी उसके आसपास ग्रह जैसी संरचनाएँ फिर से बन सकती हैं। यह अध्ययन 5 अक्टूबर 2026 को Nature Astronomy में प्रकाशित हुआ और इसमें यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक तथा यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-मैडिसन के शोधकर्ता शामिल थे।
सफेद बौना तारा क्या होता है
सफेद बौना किसी सूर्य जैसे तारे के जीवन का अंतिम चरण होता है। जब तारा अपना परमाणु ईंधन खत्म कर देता है, तो वह अपनी बाहरी परतें छोड़ देता है और एक अत्यंत सघन अवशेष के रूप में बचता है। इसका द्रव्यमान सूर्य के बराबर हो सकता है, लेकिन आकार पृथ्वी जैसा छोटा रह जाता है। इसी कारण सफेद बौने तारों का अध्ययन तारकीय विकास और ग्रह प्रणालियों के भविष्य को समझने में महत्वपूर्ण माना जाता है।
‘दूसरी पीढ़ी’ के ग्रह का संकेत
HS 0209+0832 के आसपास मिले संभावित ग्रह को वैज्ञानिकों ने ‘फीनिक्स ग्रह’ जैसा नाम इसलिए दिया है, क्योंकि माना जा रहा है कि यह तारे के मरने की प्रक्रिया के दौरान निकले पदार्थ से बना होगा। सामान्य ग्रहों की तरह यह तारे के जन्म के समय नहीं, बल्कि उसके बाद बने पदार्थ से विकसित हुआ हो सकता है। यदि यह पुष्टि होती है, तो यह ग्रह-निर्माण की पारंपरिक समझ को और व्यापक बनाएगा।
रासायनिक संकेतों से मिली अहम कड़ी
इस खोज का आधार सफेद बौने के वातावरण में मिला असामान्य रासायनिक पैटर्न है। इसमें जिंक, तांबा और नियोबियम जैसे तत्व सूर्य की तुलना में 1,000 गुना से भी अधिक मात्रा में पाए गए। वैज्ञानिकों के अनुसार यह पैटर्न s-process यानी धीमी न्यूट्रॉन-अवशोषण प्रक्रिया से जुड़ा है, जो मरते हुए तारों के भीतर होती है। यही संकेत इस संभावना को मजबूत करते हैं कि तारे के आसपास ग्रह-निर्माण के लिए आवश्यक पदार्थ मौजूद रहा होगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सफेद बौना किसी सूर्य जैसे तारे के जीवन का अंतिम अवशेष होता है।
- दूसरी पीढ़ी का ग्रह तारे के मरने के बाद बचे या निकले पदार्थ से बन सकता है।
- HS 0209+0832 के आसपास संभावित ग्रह का कक्षीय काल लगभग 4.4 पृथ्वी दिवस बताया गया है।
- इस संभावित ग्रह का आकार बृहस्पति जैसा अनुमानित किया गया है।
खगोल विज्ञान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज
यह मामला इसलिए भी खास है क्योंकि इससे तारकीय मृत्यु के बाद ग्रह प्रणालियों के पुनर्गठन को समझने में मदद मिल सकती है। ऐसे सफेद बौना तंत्र यह जानने का अवसर देते हैं कि ग्रह कितने समय तक टिक सकते हैं, किन परिस्थितियों में वे नष्ट होते हैं और क्या नए ग्रह बाद में बन सकते हैं। इसी तरह के अध्ययन बाह्यग्रहों की खोज में इस्तेमाल होने वाली तकनीकों, जैसे ट्रांजिट फोटोमेट्री और तारकीय चमक में आने वाली सूक्ष्म गिरावट, की उपयोगिता भी दिखाते हैं।
कुल मिलाकर, HS 0209+0832 के आसपास मिला यह संभावित ग्रह तारकीय जीवन के अंत के बाद भी ग्रह-निर्माण की संभावना का एक रोचक संकेत है। अगर आगे के अवलोकन इसे पुष्ट करते हैं, तो यह खोज ग्रहों और तारों के दीर्घकालिक विकास को समझने में एक महत्वपूर्ण संदर्भ बन सकती है।