सेमिकॉन मिशन 2.0 और मोबाइल फोन विनिर्माण योजना को मंजूरी, इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन

सेमिकॉन मिशन 2.0 और मोबाइल फोन विनिर्माण योजना को मंजूरी, इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 15 जुलाई 2026 को सेमिकॉन मिशन 2.0 और मोबाइल फोन विनिर्माण योजना को मंजूरी देकर भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर उद्योग को नई गति देने का निर्णय लिया। सेमिकॉन मिशन 2.0 के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि मोबाइल फोन विनिर्माण योजना के लिए 62,500 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। दोनों योजनाओं का संयुक्त परिव्यय लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये है, जिसका उद्देश्य भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

सेमिकॉन मिशन 2.0 की प्रमुख विशेषताएं

भारत सरकार ने वर्ष 2021 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन की शुरुआत की थी। अब सेमिकॉन मिशन 2.0 के माध्यम से इस कार्यक्रम की अवधि 5 वर्ष से बढ़ाकर 12 वर्ष कर दी गई है। यह मिशन सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के छह प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। इनमें चिप डिजाइन, उपकरण एवं कच्ची सामग्री का निर्माण, नई फैब्रिकेशन इकाइयों (फैब्स) की स्थापना, एडवांस्ड पैकेजिंग, अनुसंधान एवं विकास तथा कुशल मानव संसाधन विकास शामिल हैं। इन सभी क्षेत्रों में निवेश बढ़ाकर भारत को सेमीकंडक्टर उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

मोबाइल फोन विनिर्माण योजना

नई मोबाइल फोन विनिर्माण योजना बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए लागू उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई-एलएसईएम) योजना का स्थान लेगी। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए लागू रहेगी। योजना के अंतर्गत पात्र बिक्री पर 2.25 प्रतिशत से 5 प्रतिशत तक प्रोत्साहन दिया जाएगा। यदि कंपनियां मोबाइल फोन के पुर्जों की घरेलू खरीद बढ़ाती हैं, तो उन्हें 1.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा। वहीं डिजाइन और अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों के लिए 3 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। इस योजना का उद्देश्य भारतीय ब्रांडों को बढ़ावा देना, घरेलू मूल्य संवर्धन बढ़ाना और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप बनाना है।

निवेश, उत्पादन और रोजगार

सेमिकॉन मिशन 2.0 के तहत लगभग 4 लाख करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित करने और योजना अवधि के दौरान 2 लाख करोड़ रुपये मूल्य के सेमीकंडक्टर उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत स्थापित होने वाली पहली नई फैब इकाई के वर्ष 2028 तक शुरू होने की उम्मीद है। दूसरी ओर, मोबाइल फोन विनिर्माण योजना के माध्यम से लगभग 39 लाख करोड़ रुपये मूल्य के मोबाइल फोन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही योजना की अवधि में करीब 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है। इससे भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात क्षमता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भागीदारी भी मजबूत होगी।

भारत में सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र

सेमीकंडक्टर चिप्स का उपयोग मोबाइल फोन, कंप्यूटर, ऑटोमोबाइल, रक्षा उपकरण, दूरसंचार तथा औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स सहित अनेक क्षेत्रों में किया जाता है। फैब्रिकेशन यूनिट (फैब) वह अत्याधुनिक संयंत्र होता है, जहां सिलिकॉन वेफर पर सेमीकंडक्टर चिप्स का निर्माण किया जाता है। भारत की सेमीकंडक्टर नीति में चिप डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग और संपूर्ण औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के विकास पर समान रूप से जोर दिया गया है। जुलाई 2026 तक माइक्रोन, केन्स और सीजी सेमी जैसी तीन कंपनियां सेमिकॉन मिशन 1.0 के अंतर्गत व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर चुकी थीं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन की शुरुआत वर्ष 2021 में की गई थी।
  • सेमिकॉन मिशन 2.0 की अवधि 12 वर्ष निर्धारित की गई है।
  • एडवांस्ड पैकेजिंग सेमीकंडक्टर निर्माण प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण है, जिसमें चिप को उपयोग योग्य स्वरूप दिया जाता है।
  • फैब (फैब्रिकेशन यूनिट) वह संयंत्र होता है जहां सिलिकॉन वेफर पर सेमीकंडक्टर चिप्स का निर्माण किया जाता है।

सेमिकॉन मिशन 2.0 और मोबाइल फोन विनिर्माण योजना भारत को उच्च तकनीक विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात और सेमीकंडकटर उत्पादन के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इन पहलों से घरेलू निवेश, रोजगार, तकनीकी नवाचार और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

Originally written on July 16, 2026 and last modified on July 16, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *