सेबी ने एआईएफ के लिए GARUDA फ्रेमवर्क को दी मंजूरी
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 19 जून 2026 को वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) के लिए GARUDA फ्रेमवर्क को मंजूरी दे दी। यह निर्णय सेबी (वैकल्पिक निवेश कोष) विनियम, 2012 में संशोधन के माध्यम से लागू किया गया है। GARUDA का पूरा नाम “ग्रीन-चैनल: एआईएफ रोलआउट अपॉन डॉक्यूमेंट एक्नॉलेजमेंट” है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य एआईएफ योजनाओं के लॉन्च की प्रक्रिया को तेज, सरल और अधिक कुशल बनाना है।
भारत में वैकल्पिक निवेश कोष (AIF) क्या हैं?
वैकल्पिक निवेश कोष या एआईएफ ऐसे निजी निवेश साधन होते हैं जिनमें निवेशकों से धन एकत्र कर विभिन्न परिसंपत्तियों में निवेश किया जाता है। इनका संचालन और विनियमन सेबी (वैकल्पिक निवेश कोष) विनियम, 2012 के तहत किया जाता है। एआईएफ को उनकी निवेश रणनीति और नियामकीय ढांचे के आधार पर तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है—श्रेणी-I, श्रेणी-II और श्रेणी-III। ये फंड स्टार्टअप, अवसंरचना, निजी इक्विटी, हेज फंड और अन्य वैकल्पिक निवेश क्षेत्रों में पूंजी उपलब्ध कराते हैं।
GARUDA फ्रेमवर्क की प्रमुख विशेषताएं
GARUDA फ्रेमवर्क के तहत एआईएफ की नियमित योजनाओं (रेगुलर स्कीम्स) के लॉन्च की समयसीमा में बड़ा बदलाव किया गया है। पहले किसी नई योजना को शुरू करने के लिए लगभग 30 दिनों तक प्रतीक्षा करनी पड़ती थी, जबकि अब यह अवधि घटाकर केवल 10 कार्यदिवस कर दी गई है। इसके अलावा, केवल मान्यता प्राप्त निवेशकों (अक्रेडिटेड इन्वेस्टर्स) के लिए बनाई गई योजनाएं और एंजेल फंड अब सेबी द्वारा दस्तावेजों की स्वीकृति प्राप्त होते ही तुरंत लॉन्च किए जा सकेंगे। इससे निवेश प्रक्रिया अधिक तेज और निवेशकों के लिए सुविधाजनक बनने की उम्मीद है।
दस्तावेजीकरण और अनुपालन में बदलाव
नई व्यवस्था के तहत अक्रेडिटेड निवेशक-आधारित योजनाओं और एंजेल फंड्स के लिए एक महत्वपूर्ण राहत प्रदान की गई है। अब इन्हें प्राइवेट प्लेसमेंट मेमोरेंडम (पीपीएम) दाखिल करने के लिए सेबी-पंजीकृत मर्चेंट बैंकर की सेवाएं लेना अनिवार्य नहीं होगा। इसके स्थान पर एआईएफ प्रबंधक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) या समकक्ष अधिकारी तथा अनुपालन अधिकारी को नियामकीय अनुपालन का आंतरिक आश्वासन (अंडरटेकिंग) प्रस्तुत करना होगा। इससे लागत में कमी आएगी और प्रक्रिया अधिक सरल होगी।
निवेश क्षेत्र पर संभावित प्रभाव
GARUDA फ्रेमवर्क से निवेश क्षेत्र में तेजी आने की संभावना है। नई योजनाओं को बाजार में लाने की प्रक्रिया तेज होने से निवेशकों को नए अवसर जल्दी उपलब्ध होंगे। साथ ही स्टार्टअप और नवाचार आधारित व्यवसायों को पूंजी जुटाने में भी सहायता मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत के वैकल्पिक निवेश उद्योग को अधिक प्रतिस्पर्धी और आकर्षक बनाएगा तथा घरेलू एवं विदेशी निवेशकों का विश्वास बढ़ाएगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सेबी की स्थापना भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 के तहत की गई थी।
- प्राइवेट प्लेसमेंट मेमोरेंडम (पीपीएम) किसी एआईएफ योजना का प्रमुख प्रकटीकरण दस्तावेज होता है।
- एंजेल फंड एआईएफ की एक उप-श्रेणी है, जो स्टार्टअप कंपनियों में निवेश के लिए पूंजी जुटाती है।
- अक्रेडिटेड निवेशक वे निवेशक होते हैं जो निर्धारित वित्तीय पात्रता मानकों को पूरा करते हैं।
सेबी द्वारा GARUDA फ्रेमवर्क को मंजूरी देना भारत के वैकल्पिक निवेश क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है। इससे निवेश योजनाओं की स्वीकृति और लॉन्च प्रक्रिया में तेजी आएगी, अनुपालन संबंधी बोझ कम होगा और पूंजी बाजार में नवाचार एवं निवेश गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा।