भारत बना दुनिया का सबसे बड़ा शिप रीसाइक्लिंग केंद्र
वर्ष 2025 में भारत ने जहाज पुनर्चक्रण (शिप रीसाइक्लिंग) के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए दुनिया का सबसे बड़ा जहाज पुनर्चक्रण राष्ट्र बनने का गौरव प्राप्त किया। भारत की वैश्विक हिस्सेदारी बढ़कर 35.4 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि कुल पुनर्चक्रण मात्रा 2.99 मिलियन ग्रॉस टन दर्ज की गई। यह वृद्धि 2024 के 30.1 प्रतिशत और 1.86 मिलियन ग्रॉस टन की तुलना में उल्लेखनीय है। इस उपलब्धि ने भारत को समुद्री उद्योग में एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित किया है।
भारत में जहाज पुनर्चक्रण उद्योग
जहाज पुनर्चक्रण वह प्रक्रिया है जिसमें अपनी उपयोगी आयु पूरी कर चुके जहाजों को तोड़कर उनसे स्टील, मशीनरी और अन्य मूल्यवान सामग्रियों को पुनः प्राप्त किया जाता है। भारत में यह उद्योग मुख्य रूप से गुजरात के अलंग में केंद्रित है, जिसे दुनिया के सबसे बड़े जहाज पुनर्चक्रण केंद्रों में गिना जाता है। अलंग शिप रीसाइक्लिंग यार्ड ने पिछले कुछ वर्षों में आधुनिक तकनीकों और बेहतर सुरक्षा मानकों को अपनाकर अपनी क्षमता और प्रतिष्ठा दोनों में वृद्धि की है। विशेष बात यह है कि भारत ने यह उपलब्धि “मैरीटाइम इंडिया विजन 2030” के निर्धारित लक्ष्य से पहले हासिल कर ली।
कानूनी ढांचा और अंतरराष्ट्रीय मानक
भारत में जहाज पुनर्चक्रण गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए “रीसाइक्लिंग ऑफ शिप्स एक्ट, 2019” लागू किया गया है। यह कानून भारतीय नियमों को जहाजों के सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल पुनर्चक्रण से संबंधित हांगकांग अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के अनुरूप बनाता है। भारत ने वर्ष 2019 में इस सम्मेलन का अनुमोदन किया था और 26 जून 2025 से इसके प्रावधान अनिवार्य हो गए। इस सम्मेलन के तहत श्रमिकों की सुरक्षा, खतरनाक अपशिष्टों के सुरक्षित निपटान तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए स्पष्ट मानक निर्धारित किए गए हैं।
क्षमता विस्तार और आधुनिकीकरण
जहाज पुनर्चक्रण उद्योग को आधुनिक बनाने के लिए बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने 53.5 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की है। इस सहायता के परिणामस्वरूप 115 पुनर्चक्रण सुविधाएं हांगकांग सम्मेलन के मानकों के अनुरूप बनाई गई हैं। सरकार भविष्य में अलंग शिप रीसाइक्लिंग यार्ड के विस्तार के माध्यम से देश की पुनर्चक्रण क्षमता को लगभग 9 मिलियन लाइट डिस्प्लेसमेंट टन तक बढ़ाने की योजना पर कार्य कर रही है। इससे भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और मजबूत होने की संभावना है।
चुनौतियां और सुरक्षा संबंधी चिंताएं
हालांकि भारत ने इस क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है, लेकिन श्रमिक सुरक्षा और पर्यावरणीय जोखिम अब भी महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं। वर्ष 2025 में एनजीओ शिपब्रेकिंग प्लेटफॉर्म की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर तोड़े गए 321 जहाजों में से 214 जहाज दक्षिण एशिया में पुनर्चक्रण के लिए पहुंचे। इसी अवधि में दक्षिण एशिया में जहाज तोड़ने की गतिविधियों से जुड़े 11 श्रमिकों की मृत्यु और 62 लोगों के घायल होने की घटनाएं दर्ज की गईं। यह दर्शाता है कि उद्योग में सुरक्षा मानकों के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता अभी भी बनी हुई है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ग्रॉस टनेज किसी जहाज के आंतरिक आयतन को मापने की इकाई है और समुद्री आंकड़ों में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है।
- लाइट डिस्प्लेसमेंट टनेज जहाज के उस वजन को दर्शाता है जिसमें ईंधन, माल, यात्री और अन्य भंडार शामिल नहीं होते।
- हांगकांग अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) के ढांचे के तहत अपनाया गया था।
- भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान दक्षिण एशिया के प्रमुख जहाज पुनर्चक्रण देशों में शामिल हैं।
भारत का दुनिया का सबसे बड़ा जहाज पुनर्चक्रण राष्ट्र बनना देश के समुद्री क्षेत्र के विकास का महत्वपूर्ण संकेत है। कानूनी सुधारों, आधुनिक बुनियादी ढांचे और अंतरराष्ट्रीय मानकों के पालन के कारण यह उद्योग तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में क्षमता विस्तार और बेहतर सुरक्षा उपायों के माध्यम से भारत वैश्विक जहाज पुनर्चक्रण क्षेत्र में अपनी अग्रणी स्थिति को और मजबूत कर सकता है।