लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम में सुधार नोटिस व्यवस्था लागू

लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम में सुधार नोटिस व्यवस्था लागू

भारत सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग ने 29 जून 2026 को लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम, 2009 के तहत इम्प्रूवमेंट नोटिस (Improvement Notice) व्यवस्था लागू की है। इस सुधार का उद्देश्य कारोबार करने में सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देना, स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहित करना तथा पहली बार होने वाली प्रक्रियात्मक त्रुटियों पर अनावश्यक दंडात्मक कार्रवाई और मुकदमेबाजी को कम करना है। यह व्यवस्था उपभोक्ता संरक्षण को बनाए रखते हुए व्यवसायों के लिए अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद नियामक ढांचा तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम, 2009 क्या है?

लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम, 2009 भारत में वजन, माप और उनसे संबंधित व्यापारिक गतिविधियों को विनियमित करने वाला प्रमुख कानून है। इसके अंतर्गत पैकेज्ड वस्तुओं के मानक, माप एवं तौल उपकरणों की गुणवत्ता तथा निर्माण, आयात, बिक्री और वितरण से जुड़े संस्थानों के अनुपालन की व्यवस्था निर्धारित की जाती है। इस अधिनियम का प्रशासन भारत सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा किया जाता है।

इम्प्रूवमेंट नोटिस व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएं

नई व्यवस्था के तहत यदि कोई निर्माता, आयातक, पैकर, डीलर, मरम्मतकर्ता, व्यापारी, एमएसएमई अथवा अन्य विनियमित इकाई पहली बार किसी निर्दिष्ट प्रक्रियात्मक या नियामकीय उल्लंघन की दोषी पाई जाती है, तो लीगल मेट्रोलॉजी अधिकारी उसे सीधे दंडित करने के बजाय एक इम्प्रूवमेंट नोटिस जारी कर सकता है। इस नोटिस में कमी या त्रुटि का स्पष्ट उल्लेख होगा तथा उसे सुधारने के लिए उचित समय दिया जाएगा। यदि संबंधित इकाई निर्धारित अवधि के भीतर अपनी त्रुटि को सुधार लेती है, तो उसके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई से बचा जा सकता है। हालांकि यदि नोटिस का पालन नहीं किया जाता या बार-बार उल्लंघन किया जाता है, तो अधिनियम के तहत सामान्य कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

जन विश्वास संशोधन अधिनियम और उपभोक्ता संरक्षण

यह सुधार जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अधिनियम, 2026 के माध्यम से लागू किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था केवल पहली बार होने वाली प्रक्रियात्मक और नियामकीय त्रुटियों तक सीमित है। धोखाधड़ी, छेड़छाड़, जानबूझकर किए गए उल्लंघन तथा उपभोक्ता हितों को प्रभावित करने वाले गंभीर मामलों में पहले की तरह कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। इस प्रकार सुधार का उद्देश्य ईमानदार व्यवसायों को अनुपालन का अवसर देना है, न कि कानून के प्रवर्तन को कमजोर करना।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम, 2009 का प्रशासन भारत में उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा किया जाता है।
  • लीगल मेट्रोलॉजी का संबंध व्यापार और वाणिज्य में प्रयुक्त वजन एवं माप के मानकों से होता है।
  • जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अधिनियम, 2026 का उद्देश्य विभिन्न कानूनों में प्रक्रियात्मक बोझ कम करना और भरोसे पर आधारित शासन को बढ़ावा देना है।
  • एमएसएमई, निर्माता, आयातक, पैकर, डीलर और व्यापारी भी इम्प्रूवमेंट नोटिस व्यवस्था के दायरे में शामिल हैं।

नई इम्प्रूवमेंट नोटिस व्यवस्था भारत में नियामक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे व्यवसायों को पहली बार हुई वास्तविक प्रक्रियात्मक त्रुटियों को सुधारने का अवसर मिलेगा, जबकि उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए धोखाधड़ी, बार-बार होने वाले उल्लंघनों और गंभीर मामलों पर सख्त कार्रवाई पहले की तरह जारी रहेगी। यह सुधार पारदर्शिता, अनुपालन और सुगम कारोबारी वातावरण को मजबूत करने की दिशा में एक संतुलित कदम माना जा रहा है।

Originally written on June 30, 2026 and last modified on June 30, 2026.

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