लद्दाख में देश के पहले उच्च हिमालयी फ्लोरीकल्चर पार्कों की शुरुआत

लद्दाख में देश के पहले उच्च हिमालयी फ्लोरीकल्चर पार्कों की शुरुआत

लद्दाख के लेह जिले में 22 जून 2026 को दो उच्च हिमालयी पुष्प उद्यानों (फ्लोरीकल्चर पार्क) की आधारशिला रखी गई। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने चोगलामसर और स्तकना में इन परियोजनाओं का शुभारंभ किया। इन परियोजनाओं को भारत में अपनी तरह का पहला प्रयास बताया जा रहा है, जिसका उद्देश्य ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्र में फूलों की खेती को बढ़ावा देना, जैव विविधता को समृद्ध करना और स्थानीय लोगों के लिए नए रोजगार अवसर पैदा करना है।

लद्दाख में फ्लोरीकल्चर का महत्व

फ्लोरीकल्चर बागवानी की वह शाखा है जो फूलों और सजावटी पौधों की खेती से संबंधित होती है। सामान्यतः यह क्षेत्र व्यावसायिक उत्पादन, उद्यान सज्जा और निर्यात के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले और कठिन जलवायु वाले क्षेत्र में फ्लोरीकल्चर का विकास स्थानीय कृषि प्रणाली में विविधता लाने का एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे किसानों को पारंपरिक खेती के अलावा अतिरिक्त आय के स्रोत प्राप्त हो सकते हैं और क्षेत्र में हरित विकास को बढ़ावा मिलेगा।

परियोजनाओं का क्षेत्रफल और स्थान

पहला फ्लोरीकल्चर पार्क चोगलामसर में विकसित किया जा रहा है, जिसका कुल क्षेत्रफल 92,687 वर्ग मीटर होगा। इसे लद्दाख की पहली समर्पित फ्लोरीकल्चर परियोजना के रूप में विकसित किया जा रहा है। दूसरी परियोजना लेह स्थित लद्दाख विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी, स्तकना परिसर में स्थापित की जाएगी। यह पार्क 1.02 लाख वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में विकसित होगा। दोनों परियोजनाएं मिलकर क्षेत्र में फूलों की खेती और अनुसंधान को नई दिशा प्रदान करेंगी।

वैज्ञानिक सहयोग और फूलों की खेती

इन परियोजनाओं को तकनीकी और वैज्ञानिक सहायता प्रदान करने के लिए केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के कृषि विभाग और सीएसआईआर-हिमालयी जैवसंसाधन प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएचबीटी), पालमपुर के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इन केंद्रों पर लिली, ग्लैडियोलस और ट्यूलिप जैसे उच्च मूल्य वाले फूलों की खेती का प्रदर्शन किया जाएगा। बाद में इस तकनीक और अनुभव को किसान सहकारी समितियों को हस्तांतरित किया जाएगा, जिससे वे व्यावसायिक स्तर पर फूलों की खेती कर सकें।

हरित आवरण और पर्यटन को बढ़ावा

इन परियोजनाओं को लद्दाख के पर्यावरणीय लक्ष्यों से भी जोड़ा गया है। प्रशासन ने क्षेत्र के हरित आवरण को वर्तमान 0.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। फ्लोरीकल्चर पार्कों के विकास से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। रंग-बिरंगे फूलों के खेत पर्यटकों को आकर्षित करेंगे, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर पैदा होंगे।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • लद्दाख वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद एक केंद्र शासित प्रदेश बना था।
  • लेह और कारगिल लद्दाख के दो प्रमुख जिले हैं।
  • फ्लोरीकल्चर, बागवानी की वह शाखा है जो फूलों और सजावटी पौधों की खेती से संबंधित है।
  • सीएसआईआर-आईएचबीटी (हिमालयी जैवसंसाधन प्रौद्योगिकी संस्थान) वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के अंतर्गत कार्यरत एक प्रमुख अनुसंधान संस्थान है।

लद्दाख में स्थापित किए जा रहे ये उच्च हिमालयी फ्लोरीकल्चर पार्क कृषि नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन विकास का अनूठा उदाहरण हैं। इन परियोजनाओं से न केवल स्थानीय किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी, बल्कि क्षेत्र की जैव विविधता और हरित आवरण को भी नई मजबूती प्राप्त होगी।

Originally written on June 23, 2026 and last modified on June 23, 2026.

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