भारत में पहली बार ब्लू स्विमर क्रैब पालन तकनीक का सफल प्रदर्शन
चेन्नई स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय खारे पानी जलीय कृषि संस्थान (आईसीएआर-सीआईबीए) ने 22 जून 2026 को भारत में पहली बार ब्लू स्विमर क्रैब पालन तकनीक का सफल प्रदर्शन किया। यह उपलब्धि देश के जलीय कृषि क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस परीक्षण में संस्थान द्वारा तैयार किए गए हैचरी बीज और विशेष रूप से विकसित पेलेटेड फीड “बीएसक्रैबप्लस” का उपयोग किया गया। इस नई तकनीक से तटीय क्षेत्रों में मत्स्य पालन करने वाले किसानों के लिए आय के नए अवसर खुलने की संभावना है।
ब्लू स्विमर क्रैब क्या है?
ब्लू स्विमर क्रैब का वैज्ञानिक नाम पोर्टुनस रेटिकुलेटस (Portunus reticulatus) है। यह पोर्टुनस वंश का एक महत्वपूर्ण समुद्री केकड़ा है, जिसे खारे पानी की जलीय कृषि में व्यावसायिक रूप से अत्यधिक महत्व प्राप्त है। यह प्रजाति एशिया के कई देशों में बड़े पैमाने पर पाली जाती है। इसकी तेज वृद्धि दर, उच्च बाजार मांग और अच्छे आर्थिक प्रतिफल के कारण इसे तटीय मत्स्य उद्योग के लिए लाभकारी माना जाता है।
आईसीएआर-सीआईबीए द्वारा विकसित तकनीक
आईसीएआर-सीआईबीए ने ब्लू स्विमर क्रैब की खेती के लिए एक संपूर्ण तकनीकी पैकेज विकसित और मानकीकृत किया है। इस पैकेज में हैचरी बीज उत्पादन, नर्सरी पालन तथा व्यावसायिक स्तर की खेती की वैज्ञानिक प्रक्रियाएं शामिल हैं। संस्थान ने इस प्रजाति के लिए विशेष रूप से “बीएसक्रैबप्लस” नामक संतुलित पेलेटेड आहार भी विकसित किया है। यह आहार केकड़ों की बेहतर वृद्धि और उत्पादन सुनिश्चित करने में मदद करता है। इस तकनीकी पैकेज का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक और टिकाऊ जलीय कृषि प्रणाली उपलब्ध कराना है।
मुथुकाडु परीक्षण के परिणाम
यह प्रदर्शन परीक्षण चेन्नई स्थित आईसीएआर-सीआईबीए के मुथुकाडु प्रायोगिक केंद्र में किया गया। 105 दिनों की पालन अवधि के बाद प्रति हेक्टेयर 1,100 किलोग्राम उत्पादन दर्ज किया गया, जो व्यावसायिक दृष्टि से काफी उत्साहजनक माना जा रहा है। परीक्षण के दौरान तैयार हुए केकड़ों का औसत वजन लगभग 150 ग्राम था। बाजार में इन केकड़ों को लगभग 500 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक्री योग्य पाया गया, जिससे इस खेती की आर्थिक संभावनाएं स्पष्ट होती हैं।
किसानों और स्वयं सहायता समूहों को लाभ
इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहलू भी सामने आया है। 22 जून 2026 को आयोजित फसल कटाई कार्यक्रम के दौरान चेंगलपट्टू जिले के पुधुनेमेलिकुप्पम गांव के सक्सेस स्वयं सहायता समूह को अनुसूचित जाति उप-योजना के अंतर्गत 1,22,500 रुपये की आय हस्तांतरित की गई। इस पहल का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर समुदायों को आधुनिक जलीय कृषि तकनीकों से जोड़कर उनकी आय और आजीविका में सुधार करना है। कार्यक्रम में समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए) के अंतर्गत कार्यरत राजीव गांधी एक्वाकल्चर केंद्र के निदेशक भी उपस्थित रहे।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- आईसीएआर-सीआईबीए का पूरा नाम केंद्रीय खारे पानी जलीय कृषि संस्थान (Central Institute of Brackishwater Aquaculture) है।
- ब्लू स्विमर क्रैब का वैज्ञानिक नाम पोर्टुनस रेटिकुलेटस है।
- यह प्रदर्शन परीक्षण चेन्नई के मुथुकाडु प्रायोगिक केंद्र में आयोजित किया गया था।
- अनुसूचित जाति उप-योजना का उद्देश्य लक्षित लाभार्थी आधारित विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देना है।
भारत में ब्लू स्विमर क्रैब पालन तकनीक का सफल प्रदर्शन जलीय कृषि क्षेत्र में नवाचार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह तकनीक तटीय किसानों की आय बढ़ाने, रोजगार सृजन करने और समुद्री खाद्य निर्यात को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। साथ ही, वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक तकनीक के माध्यम से देश के मत्स्य क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।