राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान नीति 2026 का मसौदा जारी

राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान नीति 2026 का मसौदा जारी

भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर) ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान नीति 2026 का मसौदा सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया है। यह देश की पहली व्यापक राष्ट्रीय नीति है, जो जैव-चिकित्सा विज्ञान, नैदानिक चिकित्सा, सार्वजनिक स्वास्थ्य, महामारी विज्ञान, डिजिटल स्वास्थ्य और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे क्षेत्रों को एकीकृत ढांचे में लाने का प्रयास करती है। मसौदे पर आम जनता और विशेषज्ञों से 27 जुलाई 2026 तक सुझाव आमंत्रित किए गए हैं।

नीति का उद्देश्य और प्रमुख विशेषताएं

इस मसौदा नीति का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य अनुसंधान को भारत में रोगों के वास्तविक बोझ और सार्वजनिक स्वास्थ्य की प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाना है। इसके साथ ही अनुसंधान को राज्यों के स्वास्थ्य कार्यक्रमों और सेवा वितरण प्रणाली से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया गया है, ताकि शोध के निष्कर्ष सीधे स्वास्थ्य सेवाओं में उपयोग किए जा सकें। नीति साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने, स्वदेशी नवाचार तथा स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

तीन-स्तरीय प्रशासनिक व्यवस्था

मसौदे में स्वास्थ्य अनुसंधान के लिए तीन-स्तरीय शासन व्यवस्था का प्रस्ताव रखा गया है।

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान संचालन समिति (National Health Research Stewardship Committee) रणनीतिक दिशा और समन्वय प्रदान करेगी।
  • स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR) नीति के कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा।
  • भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) वैज्ञानिक एवं तकनीकी नेतृत्व प्रदान करेगी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य विभिन्न संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और अनुसंधान की गुणवत्ता बढ़ाना है।

अनुसंधान वित्तपोषण और भविष्य की योजना

मसौदे के अनुसार वर्तमान में भारत स्वास्थ्य अनुसंधान पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 0.024 प्रतिशत खर्च करता है, जबकि उच्च आय वाले देशों का औसत 0.27 प्रतिशत है। इस अंतर को कम करने के लिए नीति में वर्ष 2037 तक इसे 0.072 प्रतिशत तथा 2047 तक 0.15 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान एजेंडा तैयार करने का प्रस्ताव भी दिया गया है, जिसके माध्यम से समय-समय पर प्राथमिक अनुसंधान क्षेत्रों की पहचान की जाएगी। इसके लिए रोग भार, वैज्ञानिक अवसर, समानता और राष्ट्रीय हित जैसे मानदंड अपनाए जाएंगे।

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य

  • इससे पहले राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान नीति 2011 लागू की गई थी।
  • नई नीति में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल स्वास्थ्य जैसे उभरते क्षेत्रों को विशेष महत्व दिया गया है।
  • मसौदे पर 27 जुलाई 2026 तक सार्वजनिक सुझाव मांगे गए हैं।
  • नीति में वर्ष 2047 तक के दीर्घकालिक स्वास्थ्य अनुसंधान लक्ष्यों का उल्लेख किया गया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) भारत में जैव-चिकित्सा अनुसंधान की सर्वोच्च संस्था है।
  • स्वास्थ्य अनुसंधान में जैव-चिकित्सा विज्ञान, नैदानिक चिकित्सा, सार्वजनिक स्वास्थ्य, महामारी विज्ञान और डिजिटल स्वास्थ्य जैसे क्षेत्र शामिल होते हैं।
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 ने स्वास्थ्य अनुसंधान को देश के स्वास्थ्य विकास का महत्वपूर्ण आधार माना था।
  • स्वास्थ्य अनुसंधान का उद्देश्य नई दवाओं, टीकों, निदान तकनीकों और बेहतर स्वास्थ्य नीतियों के विकास में वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध कराना है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान नीति 2026 का यह मसौदा भारत की स्वास्थ्य अनुसंधान व्यवस्था को अधिक समन्वित, आधुनिक और भविष्य उन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो यह न केवल अनुसंधान क्षमता को मजबूत करेगा, बल्कि देश की स्वास्थ्य सेवाओं, नवाचार और जनस्वास्थ्य परिणामों में भी दीर्घकालिक सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

Originally written on July 16, 2026 and last modified on July 16, 2026.

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