भारतीय रेलवे की ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पहल: माल ढुलाई को आधुनिक बनाने के लिए आठ नए सुधार

भारतीय रेलवे की ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पहल: माल ढुलाई को आधुनिक बनाने के लिए आठ नए सुधार

भारतीय रेलवे ने 14 जुलाई 2026 को माल ढुलाई व्यवस्था को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और कुशल बनाने के उद्देश्य से ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पहल के तहत आठ नए संरचनात्मक सुधारों की घोषणा की। इन सुधारों के साथ 52 सप्ताह में 52 सुधार लागू करने के लक्ष्य में अब तक 17 सुधार पूरे किए जा चुके हैं। इन कदमों का उद्देश्य रेल माल परिवहन को तेज, लागत प्रभावी और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना है, जिससे देश की लॉजिस्टिक्स प्रणाली को भी मजबूती मिलेगी।

कंटेनरीकरण को बढ़ावा और माल परिवहन में बदलाव

नई सुधार योजना के तहत भारतीय रेलवे ने कंटेनरीकरण को विशेष प्राथमिकता दी है। कंटेनरीकरण का अर्थ है माल को मानकीकृत कंटेनरों में परिवहन करना, जिससे लोडिंग, अनलोडिंग, भंडारण और परिवहन की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनती है। अब फ्लाई ऐश का परिवहन खुले वैगनों के बजाय बंद कंटेनरों में किया जाएगा। इसके अलावा उर्वरक, खाद्यान्न, आटा और दालों जैसे उत्पादों के कंटेनरीकृत परिवहन की भी अनुमति दी गई है। मांग के अनुसार वितरण सुनिश्चित करने के लिए व्यक्तिगत कंटेनरों को रेक प्वाइंट पर सुरक्षित रखने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर और विशेष वैगन डिज़ाइन

भारतीय रेलवे ने कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों (सीटीओ) के लिए एकीकृत लाइसेंस प्रणाली लागू की है। पहले अलग-अलग श्रेणियों की लाइसेंस व्यवस्था थी, जिसे समाप्त कर सभी मार्गों के लिए एक समान लाइसेंस प्रणाली लागू की गई है। इसके लिए पंजीकरण शुल्क 25 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही निजी उद्योगों और निर्माताओं को अपनी औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुसार विशेष प्रकार के माल वैगनों के डिज़ाइन प्रस्तुत करने की अनुमति दी गई है। इन डिज़ाइनों को भारतीय रेलवे के अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) द्वारा परीक्षण और स्वीकृति मिलने के बाद ही उपयोग में लाया जाएगा।

मालभाड़ा, निर्माण प्रक्रिया और पेट्रोलियम लॉजिस्टिक्स में सुधार

रेलवे ने उर्वरक और खाद्यान्न के मालभाड़ा ढांचे को भी सरल बनाया है। पहले लागू बहु-स्तरीय शुल्क प्रणाली के स्थान पर अब प्रति टन प्रति किलोमीटर के आधार पर शुल्क निर्धारित किया जाएगा, जिससे शुल्क निर्धारण अधिक पारदर्शी और आसान होगा। निर्माण कार्यों के लिए ठेकेदारों को अब अग्रिम रूप से 10 प्रतिशत प्रदर्शन सुरक्षा राशि जमा करनी होगी तथा निविदाओं के लिए पात्रता मानकों को भी अधिक सख्त बनाया गया है। भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के लिए रेलवे ने रेल भूमि पोर्टल भी शुरू किया है। इसके अतिरिक्त तेल कंपनियों को पेट्रोलियम उत्पादों के परिवहन हेतु विशेष टैंक वैगनों की खरीद या लीज़ पर लेने तथा उन्हें भारतीय रेलवे नेटवर्क पर संचालित करने की अनुमति प्रदान की गई है। इससे ऊर्जा क्षेत्र की आपूर्ति श्रृंखला को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारतीय रेलवे विश्व के सबसे बड़े एकल प्रबंधन वाले रेल नेटवर्कों में से एक है।
  • कंटेनरीकरण वैश्विक स्तर पर माल परिवहन का सबसे प्रभावी और सुरक्षित तरीका माना जाता है।
  • अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) भारतीय रेलवे का मानक निर्धारण, डिज़ाइन और परीक्षण करने वाला प्रमुख तकनीकी संस्थान है।
  • रेल मालभाड़ा सामान्यतः माल के वजन, दूरी, वस्तु के प्रकार और वैगन की श्रेणी के आधार पर निर्धारित किया जाता है।

भारतीय रेलवे की ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पहल देश की माल परिवहन प्रणाली को आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और उद्योग-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इन सुधारों से न केवल लॉजिस्टिक्स लागत कम होने की संभावना है, बल्कि कंटेनरीकरण, डिजिटल प्रक्रियाओं और निजी क्षेत्र की भागीदारी के माध्यम से रेल माल परिवहन की दक्षता और विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।

Originally written on July 15, 2026 and last modified on July 15, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *