भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज ने 100 करोड़ लाभार्थियों का आंकड़ा पार किया
भारत में सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था ने जुलाई 2026 तक एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 100 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को अपने दायरे में शामिल कर लिया है। आधिकारिक अनुमानों के अनुसार वर्ष 2025 में देश की 64 प्रतिशत से अधिक आबादी सामाजिक सुरक्षा कवरेज के अंतर्गत आ चुकी थी। यह विस्तार श्रमिक कल्याण, डिजिटल पंजीकरण प्रणालियों और संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए लागू सुरक्षा उपायों के कारण संभव हुआ है। इससे भारत दुनिया के सबसे बड़े सामाजिक सुरक्षा नेटवर्क वाले देशों में शामिल हो गया है।
सामाजिक सुरक्षा क्या है और इसका महत्व
सामाजिक सुरक्षा ऐसी व्यवस्था है जिसके माध्यम से सरकार नागरिकों को वृद्धावस्था, बीमारी, बेरोजगारी, मातृत्व, दिव्यांगता और कार्यस्थल पर होने वाली दुर्घटनाओं जैसी परिस्थितियों में आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान करती है। भारत में इस व्यवस्था के प्रमुख स्तंभ कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) और कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) हैं। ये संस्थान कर्मचारियों को पेंशन, भविष्य निधि, स्वास्थ्य सेवाएं तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ उपलब्ध कराते हैं।
प्रमुख संस्थानों की बढ़ती पहुंच
14 जुलाई 2026 तक ईपीएफओ के आठ करोड़ से अधिक सक्रिय सदस्य और लगभग 80 लाख पेंशनभोगी थे। वहीं, ईएसआईसी के माध्यम से 15 करोड़ से अधिक बीमित कर्मचारियों और उनके आश्रितों को स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा लाभ मिल रहे थे। दूसरी ओर, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए शुरू किए गए ई-श्रम पोर्टल पर 31.7 करोड़ से अधिक श्रमिक पंजीकृत हो चुके हैं। यह पोर्टल असंगठित श्रमिकों को विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
रोजगार और श्रमिक कल्याण को मिला नया बल
पिछले एक दशक में लगभग 17 करोड़ रोजगार अवसर सृजित किए गए। इसके साथ ही प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के माध्यम से अगले दो वर्षों में 3.5 करोड़ औपचारिक क्षेत्र की नौकरियां सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने सामाजिक सुरक्षा का दायरा लगातार बढ़ाने पर जोर दिया है, जिससे अधिक से अधिक नागरिक औपचारिक सुरक्षा तंत्र का लाभ उठा सकें।
नई कल्याणकारी योजना की घोषणा
6 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार ने 50,000 करोड़ रुपये के प्रावधान वाली एक नई कल्याणकारी योजना की घोषणा की। इस योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और मध्यम वर्ग के पात्र परिवारों को प्रतिवर्ष प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य आम नागरिकों की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करना और सामाजिक कल्याण को व्यापक बनाना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक निकाय है।
- कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) बीमित कर्मचारियों और उनके आश्रितों को स्वास्थ्य तथा सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करता है।
- ई-श्रम पोर्टल की शुरुआत असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करने और उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए की गई थी।
- ब्रिक्स (BRICS) का पूर्ण रूप ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका है।
भारत की श्रमिक कल्याण प्रणाली में अंशदायी योजनाएं, बीमा आधारित सुरक्षा और डिजिटल श्रमिक डेटाबेस जैसे कई महत्वपूर्ण घटक शामिल हैं। वर्ष 2025 और 2026 के दौरान सामाजिक सुरक्षा कवरेज में हुई तेज़ वृद्धि ने देश की कल्याणकारी व्यवस्था को नई मजबूती प्रदान की है। इससे करोड़ों श्रमिकों और उनके परिवारों को बेहतर सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा मिलने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।