मंगलुरु में 1.75 मिलियन मीट्रिक टन सामरिक पेट्रोलियम भंडार को ओएनजीसी की मंजूरी

मंगलुरु में 1.75 मिलियन मीट्रिक टन सामरिक पेट्रोलियम भंडार को ओएनजीसी की मंजूरी

भारत की ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन लिमिटेड (ओएनजीसी) ने 9 जुलाई 2026 को कर्नाटक के मंगलुरु में 1.75 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता वाले सामरिक पेट्रोलियम भंडार (स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व) के निर्माण को सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान की है। यह परियोजना भारत के सामरिक कच्चे तेल भंडारण नेटवर्क के पहले चरण के विस्तार का हिस्सा है, जिसका संचालन इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (आईएसपीआरएल) द्वारा किया जाता है। इस विस्तार से देश की आपातकालीन परिस्थितियों में कच्चे तेल की उपलब्धता और ऊर्जा सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी।

क्या है सामरिक पेट्रोलियम भंडार?

सामरिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserve) कच्चे तेल का ऐसा आपातकालीन भंडार होता है, जिसे आयात में बाधा, युद्ध, वैश्विक बाजार में आपूर्ति संकट या भू-राजनीतिक तनाव जैसी परिस्थितियों में देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सुरक्षित रखा जाता है। यह व्यवस्था किसी भी देश की ऊर्जा सुरक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। वर्तमान में भारत के पास विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर में कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता का सामरिक कच्चे तेल का भंडारण नेटवर्क है। वर्ष 2019-20 की खपत के आधार पर यह भंडार लगभग 9.5 दिनों की कच्चे तेल की आवश्यकता को पूरा करने में सक्षम है।

ओएनजीसी की भूमिका और ऊर्जा सुरक्षा

ओएनजीसी भारत की सबसे बड़ी तेल एवं गैस अन्वेषण कंपनी है और यह देश की पहली सार्वजनिक क्षेत्र की ऊर्जा कंपनी बन गई है, जिसने सामरिक कच्चे तेल भंडारण सुविधा के निर्माण के लिए प्रत्यक्ष वित्तपोषण की पहल की है। यह विस्तार पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हाल के वर्षों में ईरान से जुड़े क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक कच्चे तेल बाजार में उत्पन्न भू-राजनीतिक चुनौतियों ने यह स्पष्ट किया है कि आयात पर अत्यधिक निर्भर देशों के लिए पर्याप्त सामरिक भंडारण क्षमता कितनी आवश्यक है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है।

परियोजना का संस्थागत ढांचा

मंगलुरु पहले से ही भारत के तीन प्रमुख सामरिक कच्चे तेल भंडारण केंद्रों में शामिल है। अन्य दो केंद्र विशाखापत्तनम और पादुर में स्थित हैं। इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (आईएसपीआरएल) इन सभी भंडारण सुविधाओं के विकास, संचालन और रखरखाव के लिए जिम्मेदार सरकारी कंपनी है। नया विस्तार मौजूदा भंडारण नेटवर्क को और मजबूत करेगा तथा आपातकालीन परिस्थितियों में कच्चे तेल की आपूर्ति और प्रबंधन क्षमता को बढ़ाएगा। ओएनजीसी के निदेशक मंडल ने इन भंडारों के व्यावसायिक उपयोग की संभावनाओं पर भी भारत सरकार के साथ चर्चा करने का निर्देश दिया है। हालांकि, जुलाई 2026 तक परियोजना की लागत और निर्माण अवधि की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई थी। इससे पहले जून 2026 में इसकी अनुमानित लागत लगभग 1.6 अरब अमेरिकी डॉलर बताई गई थी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत के सामरिक पेट्रोलियम भंडार की वर्तमान कुल क्षमता 5.33 मिलियन मीट्रिक टन है।
  • विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर भारत के तीन प्रमुख सामरिक कच्चे तेल भंडारण केंद्र हैं।
  • ओएनजीसी (ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन लिमिटेड) भारत की सबसे बड़ी तेल एवं गैस अन्वेषण कंपनी है।
  • आईएसपीआरएल (इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड) भारत के सामरिक पेट्रोलियम भंडारों के विकास और संचालन के लिए जिम्मेदार सरकारी कंपनी है।

मंगलुरु में सामरिक पेट्रोलियम भंडार के विस्तार को मिली मंजूरी भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा रणनीति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस परियोजना से वैश्विक आपूर्ति संकट या भू-राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति में देश की कच्चे तेल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी तथा भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और रणनीतिक तैयारी को और अधिक मजबूती मिलेगी।

Originally written on July 10, 2026 and last modified on July 10, 2026.

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