चीन से आयातित सीमलेस स्टील पाइप पर भारत ने एंटी-डंपिंग शुल्क की अवधि बढ़ाई
भारत सरकार ने घरेलू इस्पात उद्योग के हितों की रक्षा के लिए चीन से आयातित सीमलेस ट्यूब, पाइप और लोहे, मिश्रधातु अथवा गैर-मिश्रधातु इस्पात के खोखले प्रोफाइल पर लागू एंटी-डंपिंग शुल्क को 27 जनवरी 2027 तक बढ़ा दिया है। यह निर्णय वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग द्वारा अधिसूचित किया गया है। यह शुल्क सीमा शुल्क टैरिफ की हेडिंग 7304 के अंतर्गत आने वाले उन उत्पादों पर लागू होगा जिनका बाहरी व्यास 355.6 मिलीमीटर से अधिक नहीं है। इस कदम का उद्देश्य अनुचित मूल्य पर होने वाले आयात से भारतीय इस्पात उद्योग को होने वाले नुकसान को रोकना है।
क्या है एंटी-डंपिंग शुल्क?
एंटी-डंपिंग शुल्क एक विशेष सीमा शुल्क है, जिसे तब लगाया जाता है जब कोई देश अपने उत्पादों को दूसरे देश में सामान्य बाजार मूल्य से कम कीमत पर बेचता है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में इस प्रक्रिया को ‘डंपिंग’ कहा जाता है। इससे आयातक देश के घरेलू उद्योग को अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है और स्थानीय उत्पादकों को आर्थिक नुकसान हो सकता है। भारत में एंटी-डंपिंग शुल्क व्यापार उपचार (ट्रेड रेमेडी) व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उद्देश्य मुक्त व्यापार को बाधित करना नहीं, बल्कि अनुचित व्यापारिक गतिविधियों से घरेलू उद्योग की रक्षा करना है।
किन उत्पादों पर लागू होगा यह निर्णय?
यह विस्तार सीमलेस ट्यूब, सीमलेस पाइप तथा लोहे, मिश्रधातु और गैर-मिश्रधातु इस्पात से बने खोखले प्रोफाइल पर लागू होगा। सीमलेस पाइप ऐसे इस्पात उत्पाद होते हैं जिनमें किसी प्रकार की वेल्डिंग जोड़ नहीं होती, इसलिए इन्हें अधिक मजबूत और उच्च दबाव वाले औद्योगिक कार्यों के लिए उपयुक्त माना जाता है। ये सभी उत्पाद सीमा शुल्क टैरिफ की हेडिंग 7304 के अंतर्गत वर्गीकृत हैं, जिसमें लोहे अथवा इस्पात से बने सीमलेस ट्यूब, पाइप और खोखले प्रोफाइल शामिल किए गए हैं।
समीक्षा प्रक्रिया और कानूनी व्यवस्था
भारत में व्यापार उपचार संबंधी जांच का कार्य वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्यरत व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) करता है। एंटी-डंपिंग शुल्क की निर्धारित अवधि समाप्त होने से पहले ‘सनसेट रिव्यू’ किया जाता है। इस समीक्षा का उद्देश्य यह जांचना होता है कि यदि शुल्क हटा दिया जाए तो क्या डंपिंग और घरेलू उद्योग को होने वाली क्षति दोबारा जारी रह सकती है। वर्तमान सनसेट रिव्यू मार्च 2026 में शुरू किया गया था। जिंदल सॉ, किर्लोस्कर फेरस और महाराष्ट्र सीमलेस जैसी भारतीय कंपनियों ने शुल्क जारी रखने की मांग की थी। इन उत्पादों पर पहली बार वर्ष 2017 में एंटी-डंपिंग शुल्क लगाया गया था, जिसे वर्ष 2021 में भी बढ़ाया गया था। पहले यह शुल्क 27 अक्टूबर 2026 को समाप्त होने वाला था, लेकिन नवीनतम निर्णय के तहत इसकी अवधि 27 जनवरी 2027 तक बढ़ा दी गई है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एंटी-डंपिंग शुल्क भारत की तीन प्रमुख व्यापार उपचार व्यवस्थाओं में से एक है। अन्य दो हैं—प्रतिकारी शुल्क (काउंटरवेलिंग ड्यूटी) और संरक्षात्मक शुल्क (सेफगार्ड ड्यूटी)।
- सीमा शुल्क टैरिफ की हेडिंग 7304 में सीमलेस ट्यूब, पाइप और लोहे अथवा इस्पात के खोखले प्रोफाइल शामिल होते हैं।
- ‘सनसेट रिव्यू’ के माध्यम से यह तय किया जाता है कि एंटी-डंपिंग शुल्क को आगे जारी रखा जाए या नहीं।
- व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) भारत में एंटी-डंपिंग, प्रतिकारी और संरक्षात्मक उपायों से संबंधित जांच करने वाली प्रमुख संस्था है।
चीन से आयातित सीमलेस स्टील उत्पादों पर एंटी-डंपिंग शुल्क की अवधि बढ़ाने का निर्णय भारत के घरेलू इस्पात उद्योग को अनुचित मूल्य प्रतिस्पर्धा से बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह व्यवस्था निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देने के साथ-साथ देश के विनिर्माण क्षेत्र और रोजगार की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।