भारत-यूके व्यापार समझौते के तहत वाहन आयात पर शुल्क रियायत के नए नियम लागू

भारत-यूके व्यापार समझौते के तहत वाहन आयात पर शुल्क रियायत के नए नियम लागू

भारत सरकार ने भारत-यूनाइटेड किंगडम व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) के तहत यूनाइटेड किंगडम से आयात होने वाली यात्री कारों और मालवाहक वाहनों पर कोटा-आधारित सीमा शुल्क रियायतों की प्रक्रिया अधिसूचित कर दी है। यह समझौता और इससे संबंधित नियम 15 जुलाई 2026 से प्रभावी होंगे। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने 9 जुलाई 2026 को इस संबंध में सार्वजनिक अधिसूचना जारी की। इस पहल का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देना और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है।

भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता

भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता एक द्विपक्षीय व्यापार संधि है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को सरल और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है। ऑटोमोबाइल क्षेत्र के अंतर्गत भारत चरणबद्ध तरीके से यूनाइटेड किंगडम से आयातित वाहनों पर लगने वाले लगभग 110 प्रतिशत आयात शुल्क को घटाकर 10 प्रतिशत तक लाएगा। यह प्रक्रिया टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) व्यवस्था के माध्यम से लागू की जाएगी, जिससे सीमित संख्या में वाहनों को रियायती शुल्क पर आयात करने की अनुमति मिलेगी।

यात्री कारों के लिए टैरिफ रेट कोटा

समझौते के पहले वर्ष में भारत यूनाइटेड किंगडम में निर्मित 20,000 आंतरिक दहन इंजन (आईसीई) वाली यात्री कारों के आयात की अनुमति रियायती सीमा शुल्क पर देगा। इन वाहनों पर शुल्क इंजन क्षमता के आधार पर 30 प्रतिशत से 50 प्रतिशत के बीच होगा। पांचवें वर्ष तक इस कोटा को बढ़ाकर 37,000 वाहन कर दिया जाएगा और उस समय इन पर लागू सीमा शुल्क घटकर 10 प्रतिशत रह जाएगा। यह व्यवस्था चरणबद्ध उदारीकरण के सिद्धांत पर आधारित है।

पात्रता और प्रमाणन संबंधी नियम

रियायती शुल्क का लाभ प्राप्त करने के लिए आयातकों को यूनाइटेड किंगडम के सक्षम प्राधिकरण द्वारा जारी मूल प्रमाण-पत्र (सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन) प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। केवल मूल उपकरण निर्माता (ओईएम), उनके अधिकृत डीलर और अधिकृत चैनल साझेदार ही टैरिफ रेट कोटा के लिए आवेदन कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त, पात्रता सुनिश्चित करने के लिए ओईएम द्वारा जारी पूर्व-क्रय समझौता भी आवश्यक होगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि रियायतों का लाभ केवल अधिकृत आयातकों को ही मिले।

इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन वाहनों के लिए प्रावधान

भारत ने प्रारंभिक वर्षों में इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाले वाहनों को इस रियायती व्यवस्था से बाहर रखा है। इन श्रेणियों के वाहनों पर शुल्क रियायतें समझौते के छठे वर्ष से लागू होंगी। इसी चरण से भारत में निर्मित 20,000 से 80,000 ब्रिटिश पाउंड मूल्य वाले इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन वाहनों को यूनाइटेड किंगडम के बाजार में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा। इससे स्वच्छ ऊर्जा आधारित वाहन उद्योग को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) ऐसी व्यापार व्यवस्था है, जिसमें निर्धारित मात्रा तक आयात पर कम सीमा शुल्क लगाया जाता है।
  • आंतरिक दहन इंजन (आईसीई) वाले वाहन पेट्रोल या डीजल ईंधन से संचालित होते हैं।
  • सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन एक मानक सीमा शुल्क दस्तावेज है, जो किसी वस्तु के निर्माण वाले देश की पुष्टि करता है।
  • विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्य करता है और विदेश व्यापार संबंधी प्रक्रियाओं से जुड़ी अधिसूचनाएं जारी करता है।

भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नई गति देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वाहन आयात पर चरणबद्ध शुल्क कटौती, स्पष्ट पात्रता नियम और भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा आधारित वाहनों को मिलने वाली रियायतें इस समझौते को दीर्घकालिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती हैं। इससे भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा, निवेश और तकनीकी सहयोग को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

Originally written on July 11, 2026 and last modified on July 11, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *