भारत में आयोजित होगी ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक
भारत 22–23 जून 2026 को ब्रिक्स (BRICS) देशों की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की महत्वपूर्ण बैठक की मेजबानी करने जा रहा है। इस बैठक की अध्यक्षता भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल करेंगे। इसमें ब्रिक्स सदस्य देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार या प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुख भाग लेंगे। यह बैठक वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों, आतंकवाद-रोधी सहयोग और उभरते तकनीकी खतरों पर विचार-विमर्श के लिए एक महत्वपूर्ण मंच मानी जा रही है। साथ ही, यह सितंबर 2026 में भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
ब्रिक्स और सुरक्षा सहयोग का महत्व
ब्रिक्स एक प्रमुख अंतर-सरकारी समूह है, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। हाल के वर्षों में इस समूह का विस्तार हुआ है और ईरान भी इसका सदस्य बन चुका है। आर्थिक सहयोग के साथ-साथ ब्रिक्स ने सुरक्षा क्षेत्र में भी अपनी भूमिका को मजबूत किया है। ब्रिक्स के सुरक्षा एजेंडे में आतंकवाद-रोधी सहयोग, साइबर सुरक्षा, संगठित अपराध, डिजिटल खतरों तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर समन्वय प्रमुख रूप से शामिल हैं। सदस्य देश साझा चिंताओं पर विचार-विमर्श कर सामूहिक रणनीतियां विकसित करने का प्रयास करते हैं।
बैठक का मुख्य विषय
इस वर्ष की बैठक का मुख्य विषय “वर्तमान विश्व के समक्ष गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियां” रखा गया है। वैश्विक स्तर पर सुरक्षा की अवधारणा तेजी से बदल रही है और नई तकनीकों के विकास ने कई नए जोखिम भी पैदा किए हैं। बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर हमले, डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा, सूचना युद्ध, डेटा संरक्षण तथा सीमा-पार खतरों जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। इसके अतिरिक्त, सदस्य देश राष्ट्रीय सुरक्षा के बदलते स्वरूप और भविष्य की चुनौतियों पर अपने विचार साझा करेंगे।
कार्य समूहों की समीक्षा और शिखर सम्मेलन की तैयारी
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुख ब्रिक्स के संयुक्त कार्य समूहों की रिपोर्टों की समीक्षा करेंगे। इनमें आतंकवाद-रोधी सहयोग तथा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के सुरक्षित उपयोग से संबंधित कार्य समूह विशेष रूप से शामिल हैं। यह बैठक सितंबर 2026 में भारत में प्रस्तावित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए एक तैयारी मंच के रूप में भी कार्य करेगी। यहां लिए गए निर्णय और सुझाव आगामी शिखर सम्मेलन के एजेंडे को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
संभावित द्विपक्षीय मुलाकातें
बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय चर्चाओं की भी संभावना है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी के इसमें भाग लेने की उम्मीद है। इसके अलावा ईरान के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में शामिल हो सकते हैं। आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा, साइबर खतरों और अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच अलग-अलग स्तर पर बातचीत होने की संभावना है। ऐसी बैठकों से सदस्य देशों को आपसी विश्वास बढ़ाने और साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग को मजबूत करने का अवसर मिलता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ब्रिक्स समूह की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत और चीन के साथ हुई थी, जबकि दक्षिण अफ्रीका वर्ष 2010 में इसमें शामिल हुआ।
- अजीत डोभाल वर्ष 2014 से भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद पर कार्यरत हैं।
- सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय साइबर शासन और डिजिटल सुरक्षा का महत्वपूर्ण विषय है।
- आतंकवाद-रोधी सहयोग ब्रिक्स सुरक्षा बैठकों के प्रमुख और नियमित एजेंडा बिंदुओं में से एक है।
भारत में आयोजित होने वाली ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बदलती तकनीकी और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच यह मंच सदस्य देशों को साझा चुनौतियों पर विचार-विमर्श करने और प्रभावी समाधान तलाशने का अवसर प्रदान करेगा। आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियों के संदर्भ में भी यह बैठक विशेष महत्व रखती है।