गाजा के स्वास्थ्य संकट पर भारत से मदद की अपील

गाजा के स्वास्थ्य संकट पर भारत से मदद की अपील

फिलिस्तीन दूतावास ने 20 जून 2026 को नई दिल्ली में भारत सरकार से तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान करने की अपील की। यह अनुरोध गाजा में लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सा संसाधनों की गंभीर कमी को देखते हुए किया गया है। दूतावास के अनुसार, अस्पतालों पर अत्यधिक दबाव है और आवश्यक दवाओं, चिकित्सा उपकरणों, ईंधन तथा रक्त भंडार की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। इस अपील ने एक बार फिर गाजा में जारी मानवीय संकट की गंभीरता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया है।

गाजा में गहराता स्वास्थ्य संकट

गाजा के स्वास्थ्य क्षेत्र पर लंबे समय से दबाव बना हुआ है, लेकिन वर्ष 2026 में स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 20 जून 2026 तक गाजा के 36 अस्पतालों में से केवल 19 अस्पताल आंशिक रूप से कार्य कर रहे थे। इससे लाखों लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्रभावित हुई है। फिलिस्तीनी दूतावास ने बताया कि आवश्यक 520 दवाओं में से लगभग 180 दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा डायलिसिस से जुड़ी सामग्री, शल्य चिकित्सा उपकरण, इंसुलिन और अस्पतालों के जनरेटर चलाने के लिए आवश्यक ईंधन की भी भारी कमी है। इन परिस्थितियों ने मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों दोनों के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

आरोग्य मैत्री पहल से सहायता की मांग

फिलिस्तीनी दूतावास ने भारत से अनुरोध किया है कि वह अपनी मानवीय सहायता पहल “आरोग्य मैत्री” के माध्यम से जीवनरक्षक चिकित्सा सामग्री उपलब्ध कराए। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उन देशों की सहायता के लिए शुरू की गई थी जो मानवीय संकटों का सामना कर रहे हैं। आरोग्य मैत्री के तहत भारत पहले भी विभिन्न देशों को दवाएं, चिकित्सा उपकरण और राहत सामग्री उपलब्ध करा चुका है। फिलिस्तीन ने इसी तंत्र का उपयोग करते हुए गाजा के लिए आवश्यक चिकित्सा सहायता भेजने का आग्रह किया है ताकि प्रभावित लोगों को राहत मिल सके।

मरीजों पर बढ़ता बोझ

दूतावास के अनुसार, वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक 11,000 से अधिक निर्धारित सर्जरियां स्थगित करनी पड़ी हैं। अस्पतालों में संसाधनों की कमी के कारण मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है। विशेष रूप से कैंसर रोगियों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बताई गई है। लगभग 4,000 कैंसर मरीजों को आवश्यक दवाओं की कमी के कारण तत्काल स्वास्थ्य जोखिम का सामना करना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त, अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के उपचार में भी लगातार बाधाएं आ रही हैं।

भारत का कूटनीतिक रुख

भारत लंबे समय से इजराइल-फिलिस्तीन मुद्दे पर दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता रहा है। भारत ने गाजा में स्थायी युद्धविराम और शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। मानवीय सहायता के क्षेत्र में भारत ने फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए कार्यरत संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी को वार्षिक सहयोग के तहत 25 लाख अमेरिकी डॉलर की सहायता देने की घोषणा की है। भारत का यह संतुलित दृष्टिकोण क्षेत्रीय शांति, मानवीय सहायता और कूटनीतिक समाधान को बढ़ावा देने की उसकी नीति को दर्शाता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना वर्ष 1948 में संयुक्त राष्ट्र की एक विशेषीकृत एजेंसी के रूप में हुई थी।
  • संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी फॉर फिलिस्तीन रिफ्यूजीज़ की स्थापना वर्ष 1949 में की गई थी।
  • गाजा, पश्चिमी तट और पूर्वी यरुशलम को सामूहिक रूप से कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अधिकृत फिलिस्तीनी क्षेत्र कहा जाता है।
  • भारत आधिकारिक रूप से इजराइल-फिलिस्तीन विवाद के शांतिपूर्ण समाधान हेतु दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता है।

गाजा में उत्पन्न स्वास्थ्य संकट केवल एक क्षेत्रीय समस्या नहीं बल्कि एक गंभीर मानवीय चुनौती बन चुका है। अस्पतालों की सीमित क्षमता, दवाओं और उपकरणों की कमी तथा बढ़ती मरीज संख्या ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मानवीय सहायता लाखों प्रभावित लोगों के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

Originally written on June 20, 2026 and last modified on June 20, 2026.

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