भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम
भारत में उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने 8 नवंबर 2023 को विदेशी उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए नए नियम लागू किए थे। इन नियमों के तहत प्रतिष्ठित विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में अपने शाखा परिसर स्थापित करने और डिग्री कार्यक्रम संचालित करने की अनुमति दी गई है। 19 जून 2026 तक पांच विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में भौतिक कैंपस स्थापित करने के लिए औपचारिक स्वीकृति पत्र प्राप्त हो चुके हैं। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रमुख लक्ष्यों में से एक मानी जा रही है।
यूजीसी के 2023 नियमों की प्रमुख विशेषताएं
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग एक वैधानिक संस्था है, जिसकी स्थापना विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 के तहत की गई थी। नवंबर 2023 में अधिसूचित नियमों के अनुसार, विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित विदेशी उच्च शिक्षण संस्थान भारत में अपने शाखा परिसर स्थापित कर सकते हैं। इन संस्थानों को यूजीसी द्वारा निर्धारित मानकों और गुणवत्ता मानदंडों का पालन करना होगा। साथ ही, वे भारत में डिग्री, डिप्लोमा और अन्य शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित कर सकेंगे। इस कदम का उद्देश्य भारतीय छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा देश के भीतर ही उपलब्ध कराना है।
स्वीकृति प्राप्त करने वाले विश्वविद्यालय
अब तक पांच विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस स्थापित करने के लिए स्वीकृति पत्र प्राप्त हुआ है। इनमें यूनाइटेड किंगडम के चार विश्वविद्यालय और ऑस्ट्रेलिया का एक विश्वविद्यालय शामिल है। इन विश्वविद्यालयों में यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैम्पटन, यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल, यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल, यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क तथा यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स शामिल हैं। इन संस्थानों को भारत में उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विभिन्न शहरों में अपने परिसर स्थापित करने की अनुमति दी गई है।
कैंपस और शैक्षणिक कार्यक्रम
यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैम्पटन ने 2025-26 शैक्षणिक सत्र से गुरुग्राम स्थित अपने कैंपस में पढ़ाई शुरू कर दी है। वहीं यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल और यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क मुंबई में अपने परिसर विकसित कर रही हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स बेंगलुरु के मन्यता बिजनेस पार्क में अपना कैंपस स्थापित कर रही है, जहां अगस्त 2026 से शैक्षणिक गतिविधियां शुरू होने की योजना है। मुंबई में यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल द्वारा इमर्सिव आर्ट्स, वित्त, डेटा साइंस, अर्थशास्त्र, बिजनेस मैनेजमेंट, उद्यमिता और नवाचार जैसे विषयों की पढ़ाई कराई जाएगी। यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क वित्त, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ कंप्यूटर विज्ञान, साइबर सुरक्षा, व्यवसाय, अर्थशास्त्र, रचनात्मक उद्योग और प्रबंधन जैसे पाठ्यक्रम उपलब्ध कराएगी। वहीं यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स व्यवसाय, कंप्यूटर विज्ञान और साइबर सुरक्षा के कार्यक्रम शुरू करेगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति और लागत में कमी
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण को महत्वपूर्ण लक्ष्य के रूप में शामिल किया है। विदेशी विश्वविद्यालयों के भारत में आने से छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की डिग्री प्राप्त करने के लिए विदेश जाने की आवश्यकता कम हो सकती है। उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी के अनुसार, भारत में संचालित विदेशी विश्वविद्यालयों की डिग्री विदेश जाकर पढ़ाई करने की तुलना में लगभग 60 प्रतिशत तक कम लागत पर प्राप्त की जा सकती है। इससे बड़ी संख्या में भारतीय छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुलभ होने की संभावना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्थापना विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 के तहत की गई थी।
- विदेशी विश्वविद्यालयों के भारत में शाखा परिसर स्थापित करने संबंधी नियम 8 नवंबर 2023 को अधिसूचित किए गए थे।
- गुजरात के गिफ्ट सिटी में पहले से डीकिन यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ वोलोंगोंग और क्वीन्स यूनिवर्सिटी बेलफास्ट के कैंपस संचालित हैं।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का एक प्रमुख उद्देश्य भारतीय उच्च शिक्षा को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।
भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस स्थापित होने से उच्च शिक्षा क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू हो रहा है। इससे छात्रों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता वाली शिक्षा देश के भीतर उपलब्ध होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और भारत को वैश्विक शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति मिलेगी। आने वाले वर्षों में यह पहल भारतीय शिक्षा व्यवस्था को और अधिक आधुनिक, प्रतिस्पर्धी तथा वैश्विक बनाएगी।