भारत–ब्रिटेन व्यापार समझौते से शराब उद्योग को नई संभावनाएं, स्कॉच व्हिस्की पर आयात शुल्क में बड़ी कटौती

भारत–ब्रिटेन व्यापार समझौते से शराब उद्योग को नई संभावनाएं, स्कॉच व्हिस्की पर आयात शुल्क में बड़ी कटौती

भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) 15 जुलाई 2026 से लागू हो गया है। इस समझौते का भारतीय शराब उद्योग ने स्वागत किया है। भारतीय मादक पेय कंपनियों के परिसंघ (सीआईएबीसी) के अनुसार, यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक साझेदारी को नई गति देगा। विशेष रूप से स्कॉच व्हिस्की पर आयात शुल्क में कमी से भारतीय और ब्रिटिश दोनों उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

भारत–ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता

भारत–ब्रिटेन सीईटीए एक मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) है, जिसमें वस्तुओं, सेवाओं, निवेश और नियामकीय सहयोग को शामिल किया गया है। इस समझौते का उद्देश्य समय के साथ दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 60 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना है। समझौते के तहत भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात को ब्रिटेन के बाजार में शून्य आयात शुल्क के साथ प्रवेश मिलेगा। इससे भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी और विभिन्न उद्योगों के लिए नए बाजार अवसर उपलब्ध होंगे।

स्कॉच व्हिस्की पर आयात शुल्क में कमी

समझौते के लागू होने के साथ 15 जुलाई 2026 से स्कॉच व्हिस्की पर आयात शुल्क 150 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया है। अगले 10 वर्षों में इसे चरणबद्ध तरीके से घटाकर 40 प्रतिशत तक लाने की योजना है। इस शुल्क कटौती से स्कॉटलैंड से भारत आने वाली स्कॉच व्हिस्की की कीमतों पर प्रभाव पड़ सकता है और व्यापार में वृद्धि की संभावना है। अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में भारत को स्कॉच व्हिस्की का निर्यात लगभग 1 अरब पाउंड तक बढ़ सकता है। भारत एशिया में स्कॉच व्हिस्की के सबसे बड़े बाजारों में से एक माना जाता है।

भारतीय शराब उद्योग पर प्रभाव

सीआईएबीसी का मानना है कि आयात शुल्क में कमी से भारतीय मादक पेय उद्योग को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। उद्योग पिछले कुछ वर्षों में पैकेजिंग सामग्री, परिवहन लागत और रुपये के अवमूल्यन जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। संगठन के अनुसार, इस समझौते से तकनीकी ज्ञान, सर्वोत्तम उत्पादन पद्धतियों और निवेश का आदान-प्रदान बढ़ेगा, जिससे भारतीय उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत हो सकती है। साथ ही, संगठन ने राज्यों से यह भी आग्रह किया है कि मूल देश में बोतलबंद आयातित मदिरा को दी जाने वाली कर एवं नियामकीय रियायतों की समीक्षा की जाए, ताकि घरेलू उद्योग के लिए समान प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित हो सके।

व्यापार और निवेश सहयोग को मिलेगा बढ़ावा

मुक्त व्यापार समझौते केवल शुल्क में कमी तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे निवेश, सेवाओं, तकनीकी मानकों और औद्योगिक सहयोग को भी प्रोत्साहित करते हैं। भारत–ब्रिटेन समझौते से दोनों देशों के बीच निवेश प्रवाह, तकनीकी सहयोग और विनिर्माण क्षेत्र में नई साझेदारियों के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। यह समझौता भारतीय उद्योगों के लिए वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच प्रदान करने के साथ-साथ ब्रिटिश कंपनियों को भी भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार में निवेश और व्यापार विस्तार का अवसर देगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • सीआईएबीसी भारत की मादक पेय कंपनियों का प्रमुख उद्योग संगठन है।
  • स्कॉच व्हिस्की स्कॉटलैंड से जुड़ा एक संरक्षित भौगोलिक संकेतक (जीआई) उत्पाद है।
  • मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत देशों के बीच आयात शुल्क कम करने के साथ निवेश, सेवाओं और व्यापार नियमों पर भी सहयोग किया जाता है।
  • इंडियन मेड फॉरेन लिकर (आईएमएफएल) भारत के मादक पेय उद्योग की प्रमुख श्रेणियों में से एक है, जिसका निर्माण और बोतलबंदी भारत में की जाती है।

भारत–ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देने वाला महत्वपूर्ण कदम है। शुल्क में कमी, निवेश सहयोग और तकनीकी साझेदारी से व्यापार बढ़ने की संभावना है। साथ ही, भारतीय उद्योग के लिए वैश्विक अवसरों का विस्तार होगा और विभिन्न विनिर्माण क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को भी बढ़ावा मिलेगा।

Originally written on July 16, 2026 and last modified on July 16, 2026.

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