आरबीआई का एसएनएफए ढांचा: तनावग्रस्त परिसंपत्तियों के प्रबंधन में बड़ा सुधार
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों में तनावग्रस्त परिसंपत्तियों के बेहतर प्रबंधन के उद्देश्य से स्पेसिफाइड नॉन-फाइनेंशियल एसेट्स (Specified Non-Financial Assets – SNFAs) के लिए एक नया प्रूडेंशियल फ्रेमवर्क लागू किया है। यह व्यवस्था रिजॉल्यूशन ऑफ स्ट्रेस्ड एसेट्स डायरेक्शंस, 2025 में संशोधन के माध्यम से लाई गई है और 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी। इसका उद्देश्य अधिग्रहित गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों के मूल्यांकन, लेखांकन और समयबद्ध निपटान के लिए एक समान एवं पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
एसएनएफए क्या हैं?
स्पेसिफाइड नॉन-फाइनेंशियल एसेट्स (एसएनएफए) वे अचल संपत्तियां या अन्य गैर-वित्तीय परिसंपत्तियां होती हैं जिन्हें बैंक किसी ऐसे उधारकर्ता से अपने बकाया ऋण की आंशिक या पूर्ण वसूली के बदले अपने कब्जे में लेते हैं, जिसका ऋण गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) घोषित हो चुका हो। ये परिसंपत्तियां वित्तीय दावों से अलग होती हैं क्योंकि इनमें भूमि, भवन या अन्य अचल संपत्तियां शामिल होती हैं, जिन्हें ऋण चूक की स्थिति में अधिग्रहित किया जाता है।
किन संस्थानों पर लागू होगा नया ढांचा?
यह नया प्रावधान क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आरआरबी), सभी अखिल भारतीय वित्तीय संस्थान, वाणिज्यिक बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक तथा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) पर लागू होगा। इससे विभिन्न वित्तीय संस्थानों में एसएनएफए के प्रबंधन के लिए एक समान नियामकीय ढांचा स्थापित होगा।
अधिग्रहण और निपटान के नए नियम
आरबीआई के निर्देशों के अनुसार प्रत्येक बैंक को एसएनएफए के अधिग्रहण, पात्रता, सीमा निर्धारण, वसूली प्रयासों और परिसंपत्तियों के निपटान के लिए अपनी आंतरिक नीति तैयार करनी होगी। नए नियमों के तहत ऐसी परिसंपत्तियों का अधिकतम सात वर्ष के भीतर निपटान अनिवार्य होगा। इसके अलावा, किसी भी एसएनएफए को मूल ऋणकर्ता या उससे संबंधित पक्षों को दोबारा बेचने पर रोक लगाई गई है, जिससे हितों के टकराव और दुरुपयोग की संभावना कम होगी।
मूल्यांकन और लेखांकन व्यवस्था
आरबीआई ने एसएनएफए के मूल्यांकन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। किसी अधिग्रहित परिसंपत्ति का मूल्य समाप्त किए गए ऋण के नेट बुक वैल्यू अथवा डिस्ट्रेस सेल वैल्यू, दोनों में से जो कम हो, उसी के आधार पर निर्धारित किया जाएगा। डिस्ट्रेस सेल वैल्यू का आकलन कम-से-कम दो स्वतंत्र बाहरी मूल्यांकनकर्ताओं द्वारा किया जाएगा। लेखांकन के दृष्टिकोण से एसएनएफए को ग्रॉस एनपीए, नेट एनपीए या अन्य तनावग्रस्त परिसंपत्तियों की श्रेणी में शामिल नहीं किया जाएगा। इन्हें बैंक की बैलेंस शीट में अलग लेखा शीर्ष के अंतर्गत प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे वित्तीय विवरण अधिक पारदर्शी बनेंगे।
पुरानी एसएनएफए परिसंपत्तियों के लिए संक्रमण व्यवस्था
30 सितंबर 2026 तक बैंक की पुस्तकों में दर्ज सभी पुरानी एसएनएफए परिसंपत्तियों को नए दिशा-निर्देशों के अनुरूप 30 सितंबर 2027 तक लाना अनिवार्य होगा। इससे पुराने और नए मामलों में एक समान नियामकीय व्यवस्था लागू हो सकेगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को हुई थी और यह देश का केंद्रीय बैंक है।
- गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) वह ऋण होता है, जिस पर निर्धारित अवधि से अधिक समय तक ब्याज या मूलधन का भुगतान नहीं किया जाता।
- क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आरआरबी) की स्थापना क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976 के तहत की गई थी।
- स्मॉल फाइनेंस बैंक भारत में आरबीआई के लाइसेंसिंग मानदंडों के तहत स्थापित अनुसूचित बैंकों की एक विशेष श्रेणी हैं।
आरबीआई का यह नया एसएनएफए फ्रेमवर्क बैंकिंग क्षेत्र में तनावग्रस्त गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों के प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और उत्तरदायी बनाएगा। इससे परिसंपत्तियों के समयबद्ध निपटान, बेहतर मूल्यांकन और वित्तीय विवरणों की स्पष्टता बढ़ेगी, जिससे बैंकिंग प्रणाली की स्थिरता और विश्वसनीयता को भी मजबूती मिलेगी।