टॉयलेट्रीज़ पर नया लेबल नियम, उपभोक्ता को अब उत्पाद की प्रकृति साफ दिखेगी
सरकार ने पैक्ड पर्सनल केयर उत्पादों पर लेबलिंग को लेकर नियमों में बदलाव किया है, जिसके तहत अब कुछ चुनिंदा साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट, कॉस्मेटिक्स और टॉयलेट्रीज़ पर उनके शाकाहारी या मांसाहारी मूल को दर्शाने वाले चिन्ह लगाने होंगे। यह संशोधन उपभोक्ता को उत्पाद की प्रकृति के बारे में स्पष्ट जानकारी देने के उद्देश्य से किया गया है।
क्या बदला है नियमों में
नए प्रावधान के अनुसार शाकाहारी मूल वाले उत्पादों पर हरा बिंदु और गैर-शाकाहारी मूल वाले उत्पादों पर लाल या भूरा बिंदु दिखाना होगा। यह चिन्ह पैकेज के प्रिंसिपल डिस्प्ले पैनल के ऊपरी हिस्से में लगाया जाएगा, ताकि ग्राहक को खरीदते समय यह जानकारी आसानी से दिख सके।
यह बदलाव Legal Metrology (Packaged Commodities) Fourth Amendment Rules, 2026 के तहत किया गया है, जिसे 21 सितंबर 2026 को अधिसूचित किया गया और राजपत्र में प्रकाशन के साथ लागू माना गया।
कानूनी मेट्रोलॉजी ढांचे का महत्व
भारत में पैक्ड वस्तुओं की लेबलिंग और उपभोक्ता सूचना से जुड़े नियम Legal Metrology Act, 2009 और Legal Metrology (Packaged Commodities) Rules, 2011 के तहत आते हैं। इन नियमों में पहले से ही नेट मात्रा, निर्माता का नाम-पता और उपभोक्ता के लिए जरूरी घोषणाओं का प्रावधान है।
नया संशोधन इसी ढांचे को आगे बढ़ाता है और व्यक्तिगत देखभाल उत्पादों के लिए मूल-आधारित पहचान को अधिक स्पष्ट बनाता है। इससे उपभोक्ता को उत्पाद चुनते समय अतिरिक्त पारदर्शिता मिलती है, खासकर उन मामलों में जहां सामग्री या निर्माण प्रक्रिया को लेकर संवेदनशीलता होती है।
अदालती निर्देश और नियामकीय पृष्ठभूमि
इस विषय पर दिल्ली हाई कोर्ट ने फरवरी 2026 में सुनवाई करते हुए नियामक प्राधिकरणों से कॉस्मेटिक्स और टॉयलेट्रीज़ की लेबलिंग पर स्पष्ट रुख अपनाने को कहा था। इसके बाद नियमों में संशोधन कर पुराने प्रावधान को हटाकर नया प्रावधान जोड़ा गया। पहले इसी तरह की व्यवस्था 2014 से नियम 6(8) के तहत मौजूद थी, जिसे अब संशोधित रूप में नियम 6(4A)(d) में शामिल किया गया है।
यह बदलाव इस बात का संकेत है कि सरकार पैक्ड उपभोक्ता वस्तुओं में सूचना की स्पष्टता और मानकीकरण को लगातार मजबूत कर रही है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- Legal Metrology Act, 2009 भारत में वजन, माप और पैक्ड वस्तुओं के मानकों को नियंत्रित करता है।
- Legal Metrology (Packaged Commodities) Rules, 2011 पैक्ड वस्तुओं पर जरूरी घोषणाओं का ढांचा तय करते हैं।
- प्रिंसिपल डिस्प्ले पैनल पैकेज का वह मुख्य हिस्सा है जो उपभोक्ता को सबसे पहले दिखाई देता है।
- भारत में कुछ उत्पादों के लिए हरा, लाल या भूरा बिंदु मूल-आधारित पहचान के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।
नए नियमों के बाद उपभोक्ता अब पैक्ड पर्सनल केयर उत्पादों पर उनकी प्रकृति को पहले से अधिक आसानी से पहचान सकेंगे। यह कदम पारदर्शिता, सूचना के अधिकार और उपभोक्ता हितों की दिशा में एक महत्वपूर्ण नियामकीय बदलाव माना जा रहा है।