मार्क वुड ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को कहा अलविदा
इंग्लैंड के तेज गेंदबाज मार्क वुड ने 22 सितंबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया। 36 वर्षीय वुड ने घुटने की बार-बार होने वाली चोटों के कारण 11 साल लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर को विराम दिया। अपनी रफ्तार और आक्रामक गेंदबाजी के लिए पहचाने जाने वाले वुड इंग्लैंड की सीमित ओवरों और टेस्ट टीम के अहम गेंदबाज रहे।
करियर में रफ्तार, विकेट और बड़े मुकाबले
मार्क वुड ने इंग्लैंड के लिए 38 टेस्ट मैच खेले और 119 विकेट लिए। टेस्ट क्रिकेट में उनका औसत 30.79 रहा। वनडे में उन्होंने 70 मैचों में 80 विकेट हासिल किए, जबकि टी20 अंतरराष्ट्रीय में 38 मैचों में 54 विकेट लिए। इस तरह वे इंग्लैंड के लिए टी20 अंतरराष्ट्रीय विकेट लेने वालों की सूची में छठे स्थान पर रहे।
वुड की गेंदबाजी की सबसे बड़ी पहचान उनकी तेज गति रही, जिसकी वजह से वे नई गेंद और डेथ ओवरों दोनों में उपयोगी साबित हुए। चोटों के बावजूद उन्होंने लंबे समय तक इंग्लैंड की तेज गेंदबाजी आक्रमण को मजबूती दी।
विश्व कप जीत और आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच
मार्क वुड 2019 वनडे विश्व कप जीतने वाली इंग्लैंड टीम और 2022 टी20 विश्व कप जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे। यह उपलब्धि उनके करियर की सबसे बड़ी टीम सफलताओं में गिनी जाएगी।
उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच नवंबर 2025 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एशेज सीरीज के पहले टेस्ट में आया था, जिसे इंग्लैंड आठ विकेट से हार गया था। मार्च 2026 में उन्होंने चोट से उबरने की धीमी प्रक्रिया पर बात करते हुए संन्यास के संकेत भी दिए थे।
अब घरेलू क्रिकेट और फ्रेंचाइजी लीग पर फोकस
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट छोड़ने के बाद वुड ने डरहम के लिए टी20 ब्लास्ट में घरेलू क्रिकेट जारी रखने और फ्रेंचाइजी लीगों में खेलने की योजना जताई है। उनका केंद्रीय अनुबंध अगले महीने समाप्त होने वाला था, इसलिए यह फैसला उनके करियर के अगले चरण की दिशा भी तय करता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- टेस्ट क्रिकेट अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का सबसे लंबा प्रारूप है और इसमें एक मैच पांच दिन तक चलता है।
- वनडे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में प्रत्येक टीम को 50-50 ओवर मिलते हैं।
- टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में प्रत्येक टीम 20-20 ओवर खेलती है।
- एशेज इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली जाने वाली प्रतिष्ठित टेस्ट सीरीज है।
मार्क वुड का अंतरराष्ट्रीय करियर चोटों के बीच भी प्रभावशाली रहा, जिसमें उन्होंने इंग्लैंड को दो विश्व कप खिताब दिलाने वाली टीमों का हिस्सा बनकर अहम योगदान दिया। अब वे घरेलू और फ्रेंचाइजी क्रिकेट में अपनी तेज गेंदबाजी का असर जारी रखने की कोशिश करेंगे।