भारत ने जबरन श्रम से बने आयातित उत्पादों पर लगाया प्रतिबंध, विदेशी व्यापार नीति में बड़ा संशोधन
भारत सरकार ने 13 जुलाई 2026 को विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के माध्यम से एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी कर ऐसे उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है, जिनका निर्माण पूरी तरह या आंशिक रूप से जबरन श्रम (फोर्स्ड लेबर) के माध्यम से किया गया हो। यह प्रावधान विदेशी व्यापार नीति (एफटीपी), 2023 में नए पैरा 2.20बी को जोड़कर लागू किया गया है। यह भारत का पहला ऐसा आयात प्रतिबंध है, जिसे विशेष रूप से जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों को रोकने के उद्देश्य से लागू किया गया है।
विदेशी व्यापार नीति और डीजीएफटी की भूमिका
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाली प्रमुख संस्था है, जो भारत के आयात-निर्यात नियमों और विदेशी व्यापार से संबंधित अधिसूचनाओं का संचालन करती है। विदेश व्यापार नीति (एफटीपी), 2023 भारत में आयात, निर्यात तथा उनसे जुड़े अनुपालन संबंधी नियमों का प्रमुख ढांचा है। इसी नीति में संशोधन कर जबरन श्रम से निर्मित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध का कानूनी आधार तैयार किया गया है।
जबरन श्रम की परिभाषा
नई अधिसूचना में जबरन श्रम की परिभाषा अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के फोर्स्ड लेबर कन्वेंशन, 1930 (कन्वेंशन संख्या 29) के अनुरूप अपनाई गई है। इस कन्वेंशन के अनुसार, जब किसी व्यक्ति से किसी दंड या दंड की आशंका के दबाव में ऐसा कार्य कराया जाए जिसे उसने स्वेच्छा से स्वीकार न किया हो, तो उसे जबरन या अनिवार्य श्रम माना जाता है। यह अंतरराष्ट्रीय श्रम अधिकारों की सुरक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण कानूनी मानकों में से एक है।
जांच प्रक्रिया और नए प्रावधान
नई व्यवस्था के तहत डीजीएफटी को यह अधिकार दिया गया है कि वह आयातित वस्तुओं के निर्माण में जबरन श्रम के उपयोग से जुड़े आरोपों की जांच कर सके। यदि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह सिद्ध होता है कि किसी उत्पाद का निर्माण जबरन श्रम के माध्यम से हुआ है, तो डीजीएफटी ऐसे उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश कर सकता है। अधिसूचना के अनुसार, ये नए नियम राजपत्र में प्रकाशित होने के 30 दिन बाद प्रभावी होंगे। इससे आयातकों को नए प्रावधानों के अनुरूप अपनी आपूर्ति श्रृंखला और अनुपालन व्यवस्था सुनिश्चित करने का समय मिलेगा।
वैश्विक व्यापार के संदर्भ में महत्व
यह कदम वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में श्रम मानकों को मजबूत करने की दिशा में उठाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के अनुरूप है। दुनिया के कई देश अब आयातित वस्तुओं के उत्पादन में श्रमिकों के अधिकारों और नैतिक उत्पादन प्रक्रियाओं को महत्व दे रहे हैं। भारत का यह निर्णय भी जिम्मेदार व्यापार, पारदर्शिता और मानवाधिकारों के संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) भारत के विदेशी व्यापार ढांचे के अंतर्गत अधिसूचनाएं जारी करने वाली प्रमुख संस्था है।
- जबरन श्रम से बने उत्पादों पर प्रतिबंध के लिए विदेशी व्यापार नीति, 2023 में पैरा 2.20बी जोड़ा गया है।
- अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने फोर्स्ड लेबर कन्वेंशन (संख्या 29) को वर्ष 1930 में अपनाया था।
- सेक्शन 301 संयुक्त राज्य अमेरिका का एक व्यापारिक प्रावधान है, जिसका उपयोग अनुचित व्यापारिक प्रथाओं की जांच के लिए किया जाता है।
भारत द्वारा जबरन श्रम से निर्मित उत्पादों के आयात पर लगाया गया यह प्रतिबंध देश की व्यापार नीति में एक महत्वपूर्ण सुधार है। इससे न केवल नैतिक व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि वैश्विक श्रम मानकों के अनुरूप भारत की प्रतिबद्धता भी मजबूत होगी। साथ ही, यह कदम पारदर्शी, जिम्मेदार और मानवाधिकारों का सम्मान करने वाली वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रोत्साहित करने में सहायक सिद्ध हो सकता है।