जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी में महिला आरक्षण व्यवस्था लागू, राजनीति में बढ़ेगा महिलाओं का प्रतिनिधित्व
केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण व्यवस्था को औपचारिक रूप से लागू कर दिया है। 17 अप्रैल 2026 को जारी अधिसूचना के माध्यम से महिलाओं के लिए सीट आरक्षण से जुड़े प्रावधानों को प्रभावी बनाया गया। इससे पहले 16 अप्रैल 2026 को संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 को लागू करने की अधिसूचना जारी की गई थी, जिसके तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों का आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। यह भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा संवैधानिक कदम माना जा रहा है।
महिला आरक्षण का संवैधानिक आधार
संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 ने महिलाओं के लिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का कानूनी ढांचा तैयार किया। इसे महिला आरक्षण अधिनियम भी कहा जाता है। इस संशोधन का उद्देश्य राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और उन्हें निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व देना है। यह कानून दिल्ली विधानसभा पर भी लागू होता है। हालांकि, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अलग कानूनी संशोधन आवश्यक थे, क्योंकि इन क्षेत्रों की विधानसभाएं अलग वैधानिक व्यवस्थाओं के तहत संचालित होती हैं।
जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी के लिए अलग कानून
पुडुचेरी में महिला आरक्षण के प्रावधान सरकार ने ‘गवर्नमेंट ऑफ यूनियन टेरिटरीज (संशोधन) अधिनियम, 2023’ के माध्यम से लागू किए। वहीं जम्मू-कश्मीर के लिए यह बदलाव ‘जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2023’ के जरिए लाया गया। गृह मंत्रालय ने हाल ही में राजपत्र अधिसूचना जारी कर इन प्रावधानों को औपचारिक रूप से लागू किया। इससे यह सुनिश्चित हो गया कि परिसीमन पूरा होने के बाद दोनों केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें कानूनी रूप से लागू होंगी।
तुरंत क्यों लागू नहीं होगा आरक्षण
हालांकि कानून लागू हो चुका है, लेकिन महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें तुरंत प्रभाव से नहीं दिखाई देंगी। इसका कारण यह है कि कानून के अनुसार आरक्षण का वास्तविक कार्यान्वयन अगली जनगणना के बाद होने वाले पहले परिसीमन के बाद ही संभव होगा। यानी निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं के पुनर्निर्धारण के बाद ही सीटों का आरक्षण लागू किया जाएगा। अगली प्रासंगिक जनगणना 2027 मानी जा रही है, जो 1 अप्रैल 2026 से 1 मार्च 2027 तक निर्धारित है। इसलिए महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें अगले चुनावी चक्र में ही देखने को मिल सकती हैं।
2026 के विधेयक और राजनीतिक बहस
महिला आरक्षण को 2029 से लागू करने के लिए 2026 में तीन बड़े विधेयक संसद में पेश किए गए थे—संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक। हालांकि ये तीनों विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सके। इसके बावजूद 2023 का मूल संवैधानिक संशोधन अभी भी पूरी तरह वैध है। सरकार की हालिया अधिसूचनाएं यह स्पष्ट करती हैं कि महिला आरक्षण की कानूनी नींव मजबूत बनी हुई है, जबकि परिसीमन, समय-सीमा और कार्यान्वयन को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 को महिला आरक्षण अधिनियम के नाम से भी जाना जाता है।
- यह कानून लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करता है।
- महिला आरक्षण का वास्तविक कार्यान्वयन अगली जनगणना के बाद होने वाले पहले परिसीमन पर निर्भर करता है।
- जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अलग वैधानिक संशोधन आवश्यक थे क्योंकि उनकी विधानसभाएं अलग कानूनी ढांचे के तहत संचालित होती हैं।
जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी में महिला आरक्षण व्यवस्था का लागू होना भारतीय लोकतंत्र में लैंगिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव परिसीमन और अगली जनगणना के बाद ही दिखाई देगा, लेकिन यह कदम महिलाओं को राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व देने की मजबूत शुरुआत है। आने वाले वर्षों में यह सुधार भारत की राजनीतिक संरचना को अधिक समावेशी और संतुलित बना सकता है।